केस का संक्षिप्त ब्योरा (Case Snapshot)
| पहलू | विधिक विवरण |
| संबंधित अदालत | मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) |
| माननीय पीठ | जस्टिस एन. सतीश कुमार एवं जस्टिस एम. जोतिरामन |
| क्षेत्राधिकार | तमिलनाडु राज्य और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी |
| मुख्य विषय | मोटर दुर्घटना दावा मुआवजा वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और DBT लागू करना |
| मुख्य प्रभाव | पीड़ितों को बिचौलियों के बिना त्वरित, पारदर्शी और सीधे उनके बैंक खाते में मुआवजा मिलेगा। |
Compensation by DBT: मोटर दुर्घटना दावों (Motor Accident Claims) में पीड़ितों को मुआवजा राशि मिलने में होने वाली देरी, बिचौलियों के हस्तक्षेप और वित्तीय गड़बड़ियों को खत्म करने के लिए मद्रास हाईकोर्ट ने बेहद महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
जस्टिस एन. सतीश कुमार (Justice N Sathish Kumar) और जस्टिस एम. जोतिरामन (Justice M Jothiraman) की खंडपीठ ने मद्रास हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वे मुख्य न्यायाधीश से आवश्यक प्रशासनिक मंजूरी प्राप्त कर इस संबंध में एक विस्तृत सर्कुलर जारी करें।अदालत ने तमिलनाडु और पुडुचेरी के सभी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरणों (MACT) को निर्देश दिया है कि मुआवजा राशि का भुगतान अब अनिवार्य रूप से सीधे दावेदार के बैंक खाते में DBT (NEFT/RTGS) के माध्यम से किया जाएगा।
हाई कोर्ट द्वारा जारी प्रमुख दिशा-निर्देश (Guidelines)
मुआवजा राशि के भुगतान का नया डिजिटल ढांचा
सीधा बैंक ट्रांसफर (DBT)
• बीमा कंपनियां/परिवहन निगम सीधे दावेदार के बैंक
खाते में NEFT/RTGS द्वारा राशि जमा करेंगे।
बैंक खाते से जुड़ी सख्त शर्तें
• खाता दावेदार के स्थानीय निवास के पास होना चाहिए।
• वकीलों की सहूलियत के स्थान पर खाता नहीं खोला जाएगा।
खाते की प्रामाणिकता और सत्यापन
- पासबुक सत्यापन: अधिकरण (Tribunal) अंतिम फैसला (Award) सुनाने से पहले दावेदार के बैंक खाते के विवरण, फोटो लगी पासबुक के पहले पन्ने की सत्यापित प्रति के साथ प्राप्त करेगा।
- स्थानीय बैंक खाता: दावेदार का बैंक खाता उसके सामान्य निवास क्षेत्र/क्षेत्राधिकार में स्थित शाखा में होना चाहिए। यदि खाता नहीं है, तो खाता दावेदार के निवास स्थान के पास ही खोला जाएगा, न कि वकील की सुविधानुसार किसी स्थान पर।
- शपथ पत्र (Affidavit): ट्रायल के दौरान दावेदार को एक शपथ पत्र देना होगा कि उसके द्वारा दिए गए बैंक विवरण बिल्कुल सही हैं।
खाताधारकों से जुड़ी शर्तें और नाबालिगों की सुरक्षा
- एकल खाता (Single Account): बैंक खाता केवल दावेदार के नाम से होना चाहिए। परिवार के सदस्यों के अलावा किसी अन्य बाहरी व्यक्ति के साथ संयुक्त (Joint) खाता मान्य नहीं होगा।
- बहु-दावेदार (Multiple Claimants): यदि दावेदार एक से अधिक हैं, तो प्रत्येक के हिस्से की राशि उनके अलग-अलग व्यक्तिगत खातों में ट्रांसफर की जाएगी।
- नाबालिग दावेदार (Minor Claimants): नाबालिगों के हिस्से की राशि उनके वयस्क (Major) होने तक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या अधिकरण द्वारा निर्देशित निवेश में रखी जाएगी।
UTR नंबर और 48 घंटे का समय
- बीमा कंपनी या मुआवजा देने वाली संस्था द्वारा DBT के जरिए पैसा जमा करने के 48 घंटे के भीतर UTR नंबर और भुगतान का विवरण अधिकरण की आधिकारिक ई-मेल आईडी पर भेजना अनिवार्य होगा। इसके बाद भौतिक प्रमाण (Physical Proof) भी जमा करना होगा।
कोर्ट फीस और वकीलों की फीस का पारदर्शी प्रबंधन
- कोर्ट फीस की अग्रिम कटौती: DBT की अनुमति देने से पहले अधिकरण यह सत्यापित करेगा कि देय कोर्ट फीस चुका दी गई है।
- अलग ट्रांसफर: मुआवजे में से कोर्ट फीस और वकील की फीस का हिस्सा अलग करके सीधे अधिकरण के बैंक खाते में जमा कराया जाएगा, जबकि मुआवजे की शुद्ध राशि (Net Compensation) दावेदार के खाते में जाएगी। इसके बाद वकील तय प्रक्रिया के अनुसार अधिकरण से अपनी फीस ले सकेंगे।
मामला किस याचिका से जुड़ा था?
यह आदेश एक बीमा कंपनी द्वारा दायर अपील की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें अधिकरण (MACT) द्वारा तय की गई मुआवजा राशि को चुनौती दी गई थी। बीमा कंपनी का तर्क था कि चूंकि मृतक अविवाहित था, इसलिए उसकी व्यक्तिगत और जीवन यापन की लागत के लिए 25% के बजाय 50% की कटौती की जानी चाहिए थी। दावेदारों द्वारा कोई आपत्ति न जताए जाने पर हाई कोर्ट ने मुआवजे की राशि में संशोधन करते हुए DBT के ये व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए।
बॉटमलाइन (The Bottom Line)
मद्रास हाई कोर्ट का यह फैसला दुर्घटना पीड़ितों को राहत राशि पाने में होने वाले भ्रष्टाचार, देरी और फर्जीवाड़े को रोकने में क्रांतिकारी साबित होगा। अब मुआवजा राशि बिना किसी बिचौलिए के सीधे पीड़ित या उनके परिजनों के बैंक खाते में पहुंचेगी।

