Saturday, September 26, 2026
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Unsafe Dome: राजस्थान हाई कोर्ट ने अपनी ही इमारत के असुरक्षित होने पर लिया स्वतः संज्ञान…क्या आपको पता है किसी भी क्षण गिर सकता है गुंबद

केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Overview Matrix)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण (August 2026)
माननीय पीठन्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी एवं न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर (राजस्थान हाई कोर्ट, जोधपुर)
मामलास्वतः संज्ञान जनहित याचिका (Suo Motu PIL) — हाई कोर्ट भवन की सुरक्षा
तकनीकी विशेषज्ञIIT बॉम्बे एवं IIT जोधपुर
मुख्य संरचनात्मक खतरा21 मीटर ऊंचा सेंट्रल डोम (Central Dome) जो तत्काल ढहने के कगार पर है।
अनुमानित मरम्मत लागत₹57.65 करोड़
त्वरित निर्देश1. 48 घंटे में इवेक्यूएशन प्रोटोकॉल, 72 घंटे में मॉक ड्रिल।
2. 24×7 कंट्रोल रूम एवं गुंबद क्षेत्र की बैरिकेडिंग।
3. मुख्य सचिव, PWD सचिव व DGP को व्यक्तिगत पेशी के निर्देश।
अगली सुनवाई की तिथि24 अगस्त 2026

Unsafe Dome: राजस्थान हाईकोर्ट ने अपनी जोधपुर स्थित मुख्य पीठ (Principal Seat) की इमारत की गंभीर संरचनात्मक स्थिति और उसके 21 मीटर ऊंचे केंद्रीय गुंबद (Central Dome) के ढहने के खतरे को देखते हुए स्वतः संज्ञान (Suo Motu PIL) लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है।

न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की डिवीजन बेंच ने आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) के विशेषज्ञों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इमारत का केंद्रीय गुंबद पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है और यह किसी भी पल गिर सकता है, जिससे कोर्ट परिसर में मौजूद वकीलों, जजों और आम नागरिकों की जान को गंभीर खतरा है।

पीठ ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आदेश में दर्ज किया: अदालत अत्यंत पीड़ा और कड़े ऐतराज के साथ इस गुंबद की स्थिति को दर्ज करती है। आईआईटी बॉम्बे के विशेषज्ञों की राय है कि गुंबद संरचनात्मक रूप से इस हद तक कमजोर हो चुका है कि इसका ढहना अब कोई दूर की आशंका नहीं, बल्कि एक तात्कालिक और हर समय बना रहने वाला खतरा है। ऐसी आपदा का परिणाम भयानक होगा, जिसमें अमूल्य मानव जीवन की क्षति हो सकती है।

🏛️ इमारत में कमियों और घटनाओं का ब्योरा

  1. 2019 में हुआ था उद्घाटन
    • यह नया भवन 2019 में ही शुरू हुआ था, लेकिन महज कुछ वर्षों के भीतर ही इसकी छतें ढहने, प्लास्टर गिरने, सीपेज (पानी का रिसाव) और सरिया में जंग लगने की गंभीर समस्याएं सामने आने लगीं।
  2. 2023 से लगातार हादसे
    • अप्रैल 2023 में गुंबद की छत का एक हिस्सा गिरा।
    • अप्रैल 2025 में गुंबद से प्लास्टर गिरा।
    • कई कोर्ट रूम और जजों के चैंबर में छत का प्लास्टर गिर चुका है।
  3. आईआईटी रिपोर्ट और मरम्मत लागत
    • आईआईटी जोधपुर की समिति ने पहले स्टील सुदृढ़ीकरण में भारी क्षरण (Corrosion) पाया था।
    • आईआईटी बॉम्बे की अंतरिम रिपोर्ट के अनुसार, जांचे गए ~40% हिस्से में कंक्रीट टूटने और झड़ने का खतरा है।
    • संरचनात्मक मरम्मत और रेट्रोफिटिंग (Retrofitting) का अनुमानित खर्च ₹57.65 करोड़ आंका गया है।

हाई कोर्ट द्वारा जारी आपातकालीन निर्देश

हाई कोर्ट ने सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई कड़े और तात्कालिक निर्देश जारी किए हैं।

  • गुंबद का क्षेत्र सील (Cordoned off): गुंबद के नीचे के गोलाकार खुले क्षेत्र को तुरंत सील कर दिया गया है।
  • 24×7 नियंत्रण कक्ष और निगरानी: परिसर में 24 घंटे काम करने वाला कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए और गुंबद की 24×7 मॉनिटरिंग हो।
  • 48 घंटे में इवेक्यूएशन प्लान: आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए 48 घंटे के भीतर सुरक्षा एवं निकासी योजना (Evacuation Protocol) बनाई जाए और 72 घंटे के भीतर मॉक ड्रिल (Mock Drill) आयोजित की जाए।
  • वरिष्ठ अधिकारियों की व्यक्तिगत पेशी: राजस्थान के मुख्य सचिव, वित्त एवं लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रमुख सचिव, RSRDC के प्रबंध निदेशक, राजस्थान के डीजीपी, तथा आईआईटी बॉम्बे एवं आईआईटी जोधपुर के प्रतिनिधियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
  • जवाबदेही और स्थायी योजना: राज्य सरकार और ठेकेदारों को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है कि 2019 में बनी इमारत इतनी जल्दी जर्जर कैसे हो गई, और गुंबद के पुनर्निर्माण/मजबूतीकरण के लिए समयबद्ध योजना जमा करने को कहा गया है।
  • एमीकस क्यूरी (Amicus Curiae) की नियुक्ति: अदालत की सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं और बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों की एक कानूनी टीम गठित की गई है।

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