Sunday, September 20, 2026
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APP Launch: अब ऑनलाइन कर सकेंगे यौन उत्पीड़न की शिकायत…पोर्टल लॉन्च

APP Launch: दिल्ली हाईकोर्ट ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है।

“छोटा लेकिन अहम कदम है यह पोर्टल

यह पहल सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की अगुवाई में हुई। जिन्होंने इसे “छोटा लेकिन अहम कदम” बताया। उन्होंने कहा कि यह पोर्टल गरिमा, समानता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जस्टिस कोटिश्वर ने कहा कि यह पोर्टल गोपनीयता, सुविधा और पहुंच को बेहतर बनाता है। उन्होंने कहा कि यौन उत्पीड़न सिर्फ व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि संविधान में निहित स्वतंत्रता, न्याय और समानता के मूल्यों पर हमला है। उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने इस दिशा में गंभीरता दिखाई है, जबकि कई जगहों पर आंतरिक शिकायत समितियां (आईसीसी) सिर्फ नाम की हैं। अब महिलाएं अपने घर से ही सुरक्षित माहौल में शिकायत दर्ज कर सकती हैं। जस्टिस कोटिश्वर ने कहा कि यह सिर्फ सजा देने की बात नहीं, बल्कि सोच में बदलाव लाने और जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम है।

संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए 900 से ज्यादा अफसरों को ट्रेनिंग

दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने कहा कि समाज की सोच ऐसी बन गई है कि हम कई बार उत्पीड़न को पहचान ही नहीं पाते। उन्होंने बताया कि हाल ही में 900 से ज्यादा न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों को इस विषय पर संवेदनशीलता की ट्रेनिंग दी गई है। उन्होंने पीओएसएच एक्ट की धारा 10 का जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि शिकायतकर्ता की सहमति से पहले सुलह की कोशिश की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार गलतफहमियों के कारण शिकायतें होती हैं, इसलिए आईसीसी को सहानुभूति और समझदारी से काम लेना चाहिए।

अब महिलाओं को नहीं भटकना पड़ेगा

दिल्ली हाईकोर्ट की आईसीसी की चेयरपर्सन जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह ने कहा कि अब महिलाओं को यह सोचने की जरूरत नहीं कि शिकायत कहां दर्ज करें—हाईकोर्ट, बार एसोसिएशन या बार काउंसिल में। यह पोर्टल शिकायत को सीधे सही आईसीसी तक पहुंचाएगा। उन्होंने बताया कि पिछले 10 सालों में शिकायतों की संख्या कम रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि घटनाएं नहीं हुईं। यह डर और चुप्पी का माहौल था, जिसे यह पोर्टल तोड़ेगा।

डिजिटल सबूत और गोपनीयता की सुरक्षा

जस्टिस सिंह ने कहा कि हालिया सुधारों में केस का जल्दी निपटारा, शिकायतकर्ता की गोपनीयता की सुरक्षा और डिजिटल सबूतों को शामिल करना शामिल है। उन्होंने बार काउंसिल और दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सहयोग की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता की ट्रेनिंग के बाद व्यवहार में बदलाव आया है और घटनाओं में कमी आई है, सप्रेशन के कारण नहीं, बल्कि सोच में बदलाव के कारण। अब पोर्टल सभी महिला इंटर्न, वकीलों, स्टाफ और वादकारियों के लिए उपलब्ध है। यह न्यायपालिका की लैंगिक समानता और सिस्टम में सुधार की दिशा में प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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