NCLAT में अपील और राहत
- पॉलीकैब का पक्ष (Senior Advocate Arun Kathpalia):पॉलीकैब की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कठपालिया ने दलील दी कि पॉलीकैब भारत की सबसे बड़ी एकीकृत केबल निर्माता कंपनी है और कंपनी अपने अधिकारों और तर्कों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना (Without Prejudice) पूरी ₹2.78 करोड़ की राशि जमा करने के लिए तैयार है। उन्होंने क्रेडिट नोट्स और पूर्व-मौजूद विवादों (Pre-existing Disputes) का भी हवाला दिया।
- NCLAT का आदेश:अपीलीय न्यायाधिकरण ने माना कि कंपनी की स्थिति और राशि जमा करने की उसकी तत्परता को देखते हुए, CIRP आदेश को अगले आदेशों तक स्थगित रखा जाना न्यायसंगत है:“यद्यपि प्रतिवादी द्वारा विवाद के अस्तित्व का विरोध किया गया है, लेकिन अपीलकर्ता (पॉलीकैब) की स्थिति और उसके द्वारा पूरी राशि जमा करने की इच्छा को देखते हुए, उक्त राशि जमा कराई जाए और आक्षेपित आदेश पर अगले आदेश तक रोक लगाई जाती है।”
नई दिल्ली: दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 (Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 – IBC) की धारा 9 के तहत परिचालन लेनदार (Operational Creditor) द्वारा दायर याचिकाओं की स्वीकार्यता, चालू व सॉल्वेंट कंपनियों (Going Concern Companies) के खिलाफ ऋण वसूली के हथियार के रूप में IBC के दुरुपयोग पर रोक, पूर्व-विद्यमान विवादों (Pre-existing Disputes) और बहीखातों के समाधान (Reconciliation of Accounts) का महत्व, तथा अपीलीय स्तर पर पूरी विवादित राशि अदालत में जमा करने की शर्त पर कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (Corporate Insolvency Resolution Process – CIRP) को स्थगित रखने की NCLAT की अपीलीय शक्तियों पर राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण ने एक महत्वपूर्ण राहतकारी आदेश दिया है।
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण (NCLAT) की प्रधान पीठ—जिसमें कार्यवाहक अध्यक्ष न्यायमूर्ति योगेश खन्ना, तकनीकी सदस्य बरुण मित्रा और तकनीकी सदस्य अजय दास मेहरोत्रा शामिल हैं—ने 9 अक्टूबर 2026 को भारत की सबसे बड़ी केबल और वायर निर्माता कंपनी पॉलीकैब इंडिया लिमिटेड (Polycab India Limited) के निलंबित निदेशक भारत अजय जयसिंघानी की अपील पर सुनवाई करते हुए NCLT अहमदाबाद पीठ के दिवाला आदेश पर रोक लगा दी है। अधिकरण ने निर्देश दिया कि कंपनी द्वारा पूरी विवादित राशि (₹2.78 करोड़) NCLAT में जमा कराने के अधीन CIRP प्रक्रिया को अगले आदेश तक स्थगित (Kept in abeyance) रखा जाए।
अपीलीय अधिकरण (NCLAT) के प्रमुख न्यायिक निष्कर्ष एवं अंतरिम आदेश
1. ‘कंपनी की सॉल्वेंसी और राशि जमा करने की तत्परता पर अंतरिम रोक’
NCLAT की तीन-सदस्यीय पीठ ने अपने आदेश में दर्ज किया: “यद्यपि प्रत्यर्थी (एसियर मेटल्स) द्वारा विवाद के अस्तित्व का विरोध किया गया है, किंतु यह कहना पर्याप्त है कि अपीलकर्ता (पॉलीकैब) की बाजार स्थिति (Status of the Appellant) तथा इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि अपीलकर्ता अपने अधिकारों और दलीलों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना (Without prejudice to its rights and contentions) संपूर्ण राशि जमा करने को तैयार है, उक्त राशि जमा कराई जाए और आक्षेपित आदेश पर रोक लगाई जाती है तथा इसे अगले आदेश तक स्थगित रखा जाए।”
2. वरिष्ठ अधिवक्ता की प्रमुख विधिक दलीलें:
- जयसिंघानी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कठपालिया ने दलील दी कि पॉलीकैब देश की सबसे बड़ी एकीकृत केबल और वायर निर्माता कंपनी है और पूरी तरह वित्तीय रूप से सक्षम (Solvent) है।
- उन्होंने रेखांकित किया कि परिचालन लेनदार के साथ क्रेडिट नोट्स, खातों के मिलान और विलंब शुल्क/डेमरेज (Demurrage Charges) को लेकर पूर्व से ही वास्तविक विवाद मौजूद था।
- कंपनी ने बिना शर्त स्वीकार्यता के बजाय अदालत की संतुष्टि के लिए दावा की गई पूरी राशि ₹2.78 करोड़ जमा करने की स्वैच्छिक पेशकश की।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं NCLT अहमदाबाद का आदेश
| विवरण | घटनाक्रम एवं तथ्य |
| कॉरपोरेट देनदार (Corporate Debtor) | पॉलीकैब इंडिया लिमिटेड (देश की प्रमुख केबल और वायर विनिर्माता)। |
| परिचालन लेनदार (Operational Creditor) | एसियर मेटल्स प्राइवेट लिमिटेड (Asier Metals Pvt. Ltd.) — एल्यूमीनियम इनगॉट आपूर्तिकर्ता। |
| कथित परिचालन ऋण (Operational Debt) | ₹2.78 करोड़ (सप्लाई इनवॉइस पर आधारित बकाया)। |
| पॉलीकैब का मूल बचाव (NCLT के समक्ष) | 1. इनवॉइस केवल ‘अनंतिम बिलिंग’ (Provisional Billing) दर्शाते थे और लेजर का मिलान बाकी था। 2. डिलीवरी में देरी के कारण ₹80 लाख का डेमरेज डिडक्शन लंबित था। |
| NCLT अहमदाबाद का रुख (7 अक्टूबर 2026) | न्यायिक सदस्य शमी खान और तकनीकी सदस्य संजीव शर्मा की पीठ ने पॉलीकैब का बचाव खारिज कर दिया था: • परचेज ऑर्डर (PO) की दरें तय और अपरिवर्तनीय थीं। • गुणवत्ता, मात्रा या देरी को लेकर पहले कोई डेबिट नोट या आधिकारिक पत्राचार नहीं किया गया था। • पीठ ने CIRP शुरू कर सुनीत जगदीशचंद्र शाह को अंतरिम समाधान पेशेवर (IRP) नियुक्त कर दिया था। |
| NCLAT का हस्तक्षेप (9 अक्टूबर 2026) | ₹2.78 करोड़ की पूरी राशि जमा करने की शर्त पर CIRP कार्यवाही स्थगित; कंपनी का प्रबंधन बहाल। |
विधिक एवं कॉरपोरेट विश्लेषण: क्या कहता है IBC कानून?
- IBC ऋण वसूली का मंच नहीं (IBC is not a Debt Recovery Mechanism):
- सर्वोच्च न्यायालय ने स्विस रिबन बनाम भारत संघ (2019) और मोबिलॉक्स इनोवेशंस (2017) में बार-बार दोहराया है कि IBC का प्राथमिक उद्देश्य कंपनियों का पुनरुद्धार और उन्हें चालू स्थिति में बनाए रखना है। इसका उपयोग वित्तीय रूप से मजबूत कंपनियों पर दबाव बनाकर छोटे-मोटे व्यावसायिक विवादों में वसूली करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
- धारा 9 की अनिवार्य पूर्व-शर्त — विवाद की अनुपस्थिति (Absence of Pre-existing Dispute):
- परिचालन लेनदार की याचिका तभी स्वीकार हो सकती है जब मांग नोटिस जारी होने से पहले पक्षों के बीच कोई वास्तविक विवाद न हो। यदि खातों के मिलान, क्रेडिट नोट या माल की गुणवत्ता/देरी को लेकर विवाद का आभास मिलता है, तो NCLT को दिवाला प्रक्रिया शुरू करने से बचना चाहिए।
- पूर्ण राशि जमा कराने का प्रभाव (Deposit of Disputed Amount):
- जब कोई बड़ी कंपनी विवादित राशि को सीधे अपीलीय अदालत में जमा करने को तैयार हो जाती है, तो लेनदार के वित्तीय हितों की रक्षा हो जाती है। ऐसी स्थिति में सैकड़ों कर्मचारियों और हजारों शेयरधारकों वाली सूचीबद्ध कंपनी को केवल ₹2.78 करोड़ के विवाद के कारण दिवालियापन के गर्त में धकेलना अर्थव्यवस्था के व्यापक हित के विपरीत माना जाता है।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: भारत अजय जयसिंघानी (निलंबित निदेशक, पॉलीकैब) बनाम एसियर मेटल्स प्राइवेट लिमिटेड व अन्य [कंपनी अपील (AT) (दिवाला) – NCLAT नई दिल्ली]
- पीठ: न्यायमूर्ति योगेश खन्ना (कार्यवाहक अध्यक्ष), बरुण मित्रा (तकनीकी सदस्य) और अजय दास मेहरोत्रा (तकनीकी सदस्य)
- अपीलीय आदेश की तिथि: 9 अक्टूबर 2026
- अगली सुनवाई की तिथि: 26 अक्टूबर 2026
- संबद्ध निचली पीठ: NCLT अहमदाबाद (आदेश दिनांक: 7 अक्टूबर 2026; न्यायिक सदस्य शमी खान व तकनीकी सदस्य संजीव शर्मा)
- विधिक प्रतिनिधित्व:
- अपीलकर्ता (पॉलीकैब) की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कठपालिया
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 (IBC) — धारा 9 (परिचालन लेनदार द्वारा CIRP प्रारंभ करने का आवेदन), धारा 8 (मांग नोटिस) एवं धारा 61 (NCLAT में अपील)
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- सॉल्वेंट कंपनियों के विरुद्ध दिवाला कार्यवाही का स्थगन: ‘यदि कॉरपोरेट देनदार चालू और सॉल्वेंट कंपनी है तथा विवादित परिचालन राशि जमा करने को तैयार है, तो CIRP को तुरंत प्रभावी रखने के बजाय उसे स्थगित रखना न्यायसंगत है ताकि व्यावसायिक स्थिरता बनी रहे।’
- अंतिम परिणाम: NCLT अहमदाबाद का 7 अक्टूबर का CIRP आदेश अंतरिम रूप से स्थगित; अंतरिम समाधान पेशेवर (IRP) की शक्तियां निष्प्रभावी; पॉलीकैब को ₹2.78 करोड़ की पूरी राशि जमा करने का निर्देश; मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को निर्धारित।
Appellate Tribunal:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अपीलीय ट्रिब्यूनल | राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT, New Delhi) |
| अपीलकर्ता | भारत अजय जयसिंघानी (निलंबित निदेशक, Polycab India) |
| परिचालन लेनदार (Operational Creditor) | एसियर मेटल्स प्राइवेट लिमिटेड (Asier Metals Pvt. Ltd.) |
| दावा की गई राशि | ₹2.78 करोड़ (एल्युमीनियम इंगोट्स आपूर्ति से जुड़ा बकाया) |
| NCLT अहमदाबाद का मूल आदेश | 7 अक्टूबर 2026 को धारा 9 IBC याचिका स्वीकार कर CIRP शुरू की थी। |
| NCLAT का अंतरिम फैसला | CIRP आदेश पर रोक; पॉलीकैब द्वारा पूरी विवादित राशि कोर्ट में जमा करने का निर्देश। |
| अगली सुनवाई | 26 अक्टूबर 2026 |

