Wednesday, October 28, 2026
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Bail vs. Recovery: जमानत की आड़ में वसूली नहीं चलेगी…इस तरह संपत्ति बेचने की शर्त को किया रद्द, अहम केस को जरूर पढ़ें

Bail vs. Recovery: सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में जमानत की शर्तों (Bail Conditions) की कानूनी सीमाएं तय की हैं।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें आरोपी को जमानत देने के बदले उसकी अचल संपत्ति बेचने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत देते समय अदालतें ऐसी शर्तें नहीं लगा सकतीं जो आरोपी को उसकी संपत्ति के अधिकार से वंचित करती हों या सजा की प्रकृति की हों।

मामला क्या था? (The Context)

  • आरोप: जून 2025 में दर्ज एक FIR के अनुसार, आरोपी पर धोखाधड़ी (Section 420) और आपराधिक विश्वासघात (Section 406/409) के आरोप थे।
  • हिरासत: आरोपी 83 दिनों तक जेल में रहा।
  • हाई कोर्ट की शर्त: मद्रास हाई कोर्ट ने जमानत तो दी, लेकिन मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वह आरोपी की संपत्तियां बेचकर उससे मिलने वाला पैसा पीड़ितों में बांट दे।

सुप्रीम कोर्ट का मुख्य निष्कर्ष: दंडात्मक शर्तें अवैध हैं

  • सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के इस कदम को कानून की मूल भावना के खिलाफ बताया।
  • Nexus (संबंध) का अभाव: जमानत की शर्तों का एकमात्र उद्देश्य आरोपी की कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करना होना चाहिए। संपत्ति बेचने का जमानत के उद्देश्य से कोई संबंध नहीं है।
  • वसूली बनाम जमानत: कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि “जमानत की कार्यवाही को वसूली (Recovery Proceedings) में नहीं बदला जा सकता।
  • सिविल बनाम क्रिमिनल: संपत्ति बेचना और दावों का निपटारा करना एक ‘अंतिम सिविल रिलीफ’ (Final Civil Relief) है। क्रिमिनल कोर्ट जमानत के स्तर पर सिविल विवादों का फैसला नहीं कर सकती।

कानून में प्रावधान का अभाव (BNSS & CrPC)

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि न तो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 और न ही CrPC, 1973 किसी भी जज को जांच या जमानत के स्तर पर आरोपी की संपत्ति बेचने का अधिकार देते हैं। महेश चंद्रा बनाम यूपी राज्य (2006) मामले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसी शर्तें जमानत प्रावधानों के लिए “अजनबी” (Alien) हैं।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
मूल सिद्धांतजमानत की शर्तें दंडात्मक (Punitive) नहीं होनी चाहिए।
संपत्ति का अधिकारजमानत की शर्त के रूप में आरोपी को उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।
क्षेत्राधिकारकोर्ट जमानत देते समय सिविल विवादों (जैसे पैसों का लेनदेन) को तय नहीं कर सकता।
नतीजाहाई कोर्ट द्वारा लगाई गई संपत्ति बेचने की शर्त को रद्द (Set Aside) कर दिया गया।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संपत्ति की सुरक्षा

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला यह सुनिश्चित करता है कि अदालतों द्वारा अपनी शक्तियों का दुरुपयोग न किया जाए। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि जब तक ट्रायल पूरा न हो जाए और दोष सिद्ध न हो जाए, तब तक किसी भी व्यक्ति की संपत्ति को “सेटलमेंट” के लिए नहीं बेचा जा सकता। न्याय का सिद्धांत कहता है कि ‘जमानत एक नियम है और जेल एक अपवाद’, लेकिन इस नियम के साथ ऐसी शर्तें नहीं जोड़ी जा सकतीं जो इसे सजा में बदल दें।

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