Thursday, November 5, 2026
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Bangladesh’s Women: गर्भवती महिला को भारत में प्रवेश देने पर केंद्र करे विचार…मानवीय आधार पर दें राहत

Bangladesh’s Women: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि गर्भवती महिला और उसके बच्चे को “मानवीय आधार” पर भारत में प्रवेश देने पर विचार करे, जिन्हें इस वर्ष की शुरुआत में बांग्लादेश की ओर धकेल दिया गया था।

सुझाव: निगरानी में अस्पताल में रखें महिला को

शीर्ष कोर्ट ने सुझाव दिया कि महिला को भारत में प्रवेश देने के बाद “निगरानी में” अस्पताल में रखा जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वे मालदा (प. बंगाल) से भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के रास्ते महिला को प्रवेश देने पर केंद्र का रुख बताएं। मेहता ने कहा, “हमें दो दिन का समय दें। हम समझते हैं कि अदालत मानवीय आधार पर मामला देखने को कह रही है। हम इसपर विचार करेंगे।”

“वे भारतीय नागरिक हैं: याचिकाकर्ता

सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े ने बताया कि पीड़िता सोनाली खातून और उसका परिवार बांग्लादेश की ओर बैठे भारत में प्रवेश का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी बांग्लादेश में की गई ‘डिपोर्टेशन’ को पहले ही अवैध करार दिया जा चुका है और वे भारतीय नागरिक हैं। कोर्ट ने कहा कि केंद्र महिला और उसके बच्चे को भारत में प्रवेश देने पर विचार करे और प्रसव संबंधी किसी भी जटिलता से बचने के लिए उसे अस्पताल में निगरानी में रखा जाए। हेगड़े ने आग्रह किया कि यदि महिला को प्रवेश दिया जाता है, तो उसके पति को भी साथ आने की अनुमति दी जानी चाहिए।

पृष्ठभूमि: हाई कोर्ट ने डिपोर्टेशन को ठहराया था अवैध

केंद्र सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट के 26 सितंबर के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें सोनाली खातून और अन्य को बांग्लादेश भेजने के फैसले को “अवैध” बताया गया था।
हाई कोर्ट ने केंद्र को एक माह के भीतर छह लोगों को वापस भारत लाने का निर्देश दिया था। मामला भदू शेख द्वारा दाखिल हैबियस कॉर्पस याचिका से शुरू हुआ, जिसमें कहा गया था कि सोनाली खातून (गर्भावस्था के अंतिम चरण में), पति दानेश शेख और 5 वर्षीय बेटे को दिल्ली से हिरासत में लेकर 27 जून को बांग्लादेश भेज दिया गया। बिरभूम ज़िले के ही आमिर खान ने इसी तरह की याचिका दायर की थी कि उनकी बहन स्वीटी बीबी और दो बच्चों को भी दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लेकर सीमा पार धकेल दिया।

रोहिणी सेक्टर-26 में दो दशक से दिहाड़ी मजदूर है गर्भवती

परिवारों का कहना है कि वे दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-26 में दो दशक से दिहाड़ी मजदूर के तौर पर रह रहे थे। उन्हें 18 जून को “बांग्लादेशी” होने के संदेह में उठाया गया और 27 जून को सीमा पार भिजवा दिया गया, जिसके बाद उन्हें बांग्लादेश पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हाई कोर्ट ने केंद्र के उस हलफनामे का भी संज्ञान लिया जिसमें कहा गया था कि FRRO, गृह मंत्रालय के 2 मई 2025 के निर्देशों के तहत डिपोर्टेशन कर रहा था। लेकिन हाई कोर्ट ने माना कि पूरा डिपोर्टेशन “अत्यधिक जल्दबाज़ी” में और निर्धारित प्रक्रिया के उल्लंघन में किया गया। हाई कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था, “दिखाई दे रही यह अति-उत्सुकता गलतफहमियां पैदा कर सकती है और देश के न्यायिक माहौल को प्रभावित करती है।”अब सुप्रीम कोर्ट इस संवेदनशील मामले पर केंद्र के अगले कदम का इंतजार करेगा।

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