Saturday, June 13, 2026
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Bar Demand: एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट पर हो रही देरी…बॉम्बे हाई कोर्ट वकीलों की सुरक्षा के लिए अंतरिम दिशानिर्देशों जारी पर करेगा विचार, पढ़ें केस

Bar Demand: बॉम्बे हाई कोर्ट ने वकीलों पर लगातार बढ़ते हमलों और उनके साथ होने वाली हिंसा, डराने-धमकाने और उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने के लिए एक बेहद अहम रुख अपनाया है।

कई राज्यों में बन गए वकीलों की सुरक्षा को लेकर कानून

देश के कई राज्यों, जैसे तेलंगाना (Telangana Advocates Protection Act, 2026) और कर्नाटक में वकीलों की सुरक्षा के लिए कड़े कानून लागू किए जा चुके हैं, लेकिन महाराष्ट्र में ‘एडवोकेट्स प्रोटेक्शन बिल’ को अभी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इस देरी को देखते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक केंद्र या राज्य सरकार इस संबंध में कोई ठोस कानून नहीं बना लेती, तब तक क्या वकीलों की सुरक्षा के लिए अंतरिम दिशानिर्देश (Interim Safeguards/Guidelines) जारी किए जाने की जरूरत है, इस पर अदालत 18 जून को होने वाली अगली सुनवाई में गंभीरता से विचार करेगी। यह मामला कोल्हापुर जिला बार एसोसिएशन और अन्य की ओर से दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें महाराष्ट्र के लगभग दो लाख से अधिक वकीलों के लिए सुरक्षा उपायों की मांग की गई है।

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सुओ मोटो (Suo Motu) संज्ञान से शुरू हुआ मामला

कोर्ट परिसर में हमला: इस जनहित याचिका की पृष्ठभूमि मार्च 2026 में हुई एक घटना से जुड़ी है। मार्च 2026 में कोल्हापुर जिला न्यायालय परिसर में एक मुवक्किल (Litigant) द्वारा महिला अधिवक्ता काजल शेलके पर कथित तौर पर बेरहमी से हमला किया गया था।

हाई कोर्ट का कड़ा रुख: इस घटना का बॉम्बे हाई कोर्ट ने खुद संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लिया, जिसके बाद बार एसोसिएशन ने भी वकीलों की सुरक्षा को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

कानून बनाने में सरकारें क्यों कर रही हैं देरी?

केंद्र सरकार का पक्ष: सुनवाई के दौरान केंद्र और राज्य सरकार, दोनों ने ही कानून लागू करने में हो रही देरी के पीछे अपने-अपने प्रशासनिक तर्क दिए। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) अनिल सिंह ने अदालत को बताया कि वकीलों की सुरक्षा से जुड़ा प्रस्तावित कानून अभी लॉ कमिशन (Law Commission) के पास लंबित है और इसे अमलीजामा पहनाने में अभी काफी समय लगेगा।

राज्य सरकार का रुख: महाराष्ट्र सरकार के एडवोकेट जनरल (AG) मिलिंद साठे ने दलील दी कि राज्य सरकार ने विधानसभा में ‘एडवोकेट्स प्रोटेक्शन बिल’ पेश तो किया था, लेकिन चूंकि केंद्र के स्तर पर भी इसी विषय पर एक कानून लंबित है, इसलिए राज्य ने फिलहाल इस पर विचार टाल (Defer) दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक लॉ कमिशन की रिपोर्ट नहीं आती, कोर्ट को कोई अंतरिम निर्देश जारी नहीं करने चाहिए।

न्याय मित्र (Amici Curiae) ने सुझाए 7 अंतरिम सुरक्षा उपाय

अदालत की सहायता के लिए नियुक्त किए गए वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव चव्हाण और अधिवक्ता सत्यव्रत जोशी (Amici Curiae) ने सरकार के तर्कों का विरोध किया। उन्होंने बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा (BCMG) के दो लाख से अधिक वकीलों का पक्ष रखते हुए कहा कि वकीलों पर हमला सीधा ‘न्याय के प्रशासन’ (Administration of Justice) पर हमला है, क्योंकि वे कोर्ट के अधिकारी (Officers of the Court) होते हैं। उन्होंने मौजूदा ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) के प्रावधानों को इन हमलों से निपटने के लिए अपर्याप्त बताया और कोर्ट के सामने कुछ सुझावात्मक दिशानिर्देश रखे:

पेशेवर सुरक्षा: वकीलों को उनके पेशेवर कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान मिलने वाली धमकियों, डराने-धमकाने और जबरदस्ती से सुरक्षा दी जाए।

पुलिस की मनमानी पर रोक: वकीलों के खिलाफ पुलिस द्वारा की जाने वाली मनमानी या दुर्भावनापूर्ण कार्रवाइयों के खिलाफ विशेष सुरक्षा कवच हो।

शिकायत निवारण तंत्र: विभिन्न स्तरों पर वकीलों की समस्याओं को सुनने के लिए एक प्रभावी ग्रिवेंस रिड्रेसल मैकेनिज्म (Grievance Redressal Mechanism) बने।

समयबद्ध जांच: वकीलों पर हमले या हिंसा के मामलों में पुलिस द्वारा त्वरित जांच और समयबद्ध (Time-bound) कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

पुलिस सुरक्षा और मुआवजा: गंभीर या विश्वसनीय खतरा होने पर संबंधित वकील को पुलिस सुरक्षा दी जाए और पीड़ित वकीलों को उचित मुआवजा मिले।

संवेदीकरण (Sensitisation): पुलिस कर्मियों और कोर्ट के स्टाफ को वकीलों के अधिकारों और उनकी भूमिका के प्रति संवेदनशील बनाया जाए।

विशेषाधिकार का संरक्षण: किसी भी सार्वजनिक प्राधिकरण या पुलिस द्वारा वकील को अपने मुवक्किल के साथ हुई गोपनीय बातचीत (Professional Privilege) को उजागर करने के लिए मजबूर न किया जाए।

विश्लेषण: महाराष्ट्र में वकीलों पर हुए हालिया बड़े हमले

अदालत में यह भी रेखांकित किया गया कि महाराष्ट्र में वकीलों पर हमले की घटनाएं कोई नई नहीं हैं, बल्कि पिछले कुछ सालों में ग्राफ तेजी से बढ़ा है।

घटना का समयस्थान और घटना का विवरण
मार्च 2026कोल्हापुर जिला अदालत परिसर के भीतर एडवोकेट काजल शेलके पर एक मुवक्किल द्वारा हमला किया गया।
नवंबर 2025शेवगांव में एक वकील पर हुए हमले के बाद राज्यभर के वकीलों ने ‘एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट’ लागू करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था।
जुलाई 2021दहिसर (पश्चिम) में मुवक्किलों के साथ बैठक कर रहे दो वकीलों पर करीब 20 लोगों की भीड़ ने तलवारों और लोहे की रॉड से जानलेवा हमला किया था।
दिसंबर 2018नागपुर जिला अदालत के बाहर एक वकील लोकेश भास्कर ने वरिष्ठ अधिवक्ता सदानंद नरनवरे पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया था। (बाद में आरोपी वकील ने जहर खाकर जान दे दी थी)।
दिसंबर 2018मराठा आरक्षण के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में बहस करने के तुरंत बाद वरिष्ठ अधिवक्ता गुनरत्न सदावर्ते पर कोर्ट परिसर के बाहर ही हमला कर दिया गया था।
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