Brutal Reality: पुणे की विशेष अदालत (Special Court) में महाराष्ट्र के पुणे जिले में एक 3 साल की मासूम बच्ची के साथ हुई हैवानियत और उसकी निर्मम हत्या के मामले में सुनवाई एक बेहद निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है।
65 वर्षीय मुख्य आरोपी को विधिक रूप से बयान दर्ज किया गया
विशेष न्यायाधीश एस. आर. सालुंखे की पीठ के समक्ष आरोपी को व्यक्तिगत रूप से सुबह 11 बजे पेश किया गया, जबकि विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) अजय मिसर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। कोर्ट ने मुकदमे के दौरान पेश हुए 54 गवाहों (जिसमें आरोपी का चचेरा भाई भी शामिल है) के बयानों के आधार पर आरोपी से अपराध के क्रम को लेकर तीखे सवाल पूछे। अदालत ने मामले के 65 वर्षीय मुख्य आरोपी को विधिक रूप से अदालत में पेश कर उसका बयान दर्ज किया। जब कोर्ट ने आरोपी को घटनास्थल के अकाट्य सीसीटीवी फुटेज दिखाए, तो वह अपने पिछले बयानों से मुकर गया और एक नया मनगढ़ंत विधिक बचाव पेश किया।
BNSS की धारा 351 के तहत कोर्ट का सीधा सवाल (Section 351 Examination)
अदालत ने आरोपी का बयान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 351 के तहत दर्ज किया। यह विधिक प्रावधान न्यायाधीश को यह अधिकार देता है कि वह आरोपी से सीधे सवाल पूछ सके ताकि आरोपी को अपनी बात रखने का पूरा और निष्पक्ष विधिक अवसर मिले। जब अदालत ने अभियोजन पक्ष (Prosecution) के डिजिटल साक्ष्यों को खुली अदालत में चलाया, तो दृश्य कुछ इस तरह बदला।
दुकान का फुटेज (Identification in Court)
शुरुआत में आरोपी को एक स्थानीय दुकान का सीसीटीवी फुटेज दिखाया गया, जिसमें वह बच्ची के लिए ‘गाठी शेव’ (एक प्रकार का नमकीन स्नैक) खरीदता नजर आ रहा था। आरोपी ने पहले तो साफ इनकार कर दिया कि वीडियो में वह नहीं है। लेकिन भरे कोर्ट रूम में जब वीडियो को कई बार चलाया गया, तो उसने अंततः स्वीकार किया कि वीडियो में वही है।
बच्ची के साथ जाने का फुटेज
इसके बाद उसे दूसरा सीसीटीवी फुटेज दिखाया गया, जिसमें वह दोपहर 3:12 बजे मासूम बच्ची का हाथ पकड़कर पास के एक गौशाले (Cowshed) की तरफ ले जाता दिख रहा था। आरोपी ने फुटेज में खुद को तो पहचान लिया, लेकिन विधिक चालाकी दिखाते हुए दावा किया कि वह उस बच्ची को नहीं जानता।
अकेले लौटने का फुटेज और कोर्ट का तीखा सवाल
उसी कैमरे के तीसरे फुटेज में आरोपी दोपहर 3:51 बजे उसी रास्ते से अकेला लौटता हुआ दिखाई दिया। इन दोनों वीडियो के समय (लगभग 39 मिनट का अंतर) को रेखांकित करते हुए विशेष जज सालुंखे ने आरोपी से सीधा और कड़ा सवाल पूछा, तुम बच्ची को साथ लेकर गौशाले गए थे, लेकिन लौटते समय वह तुम्हारे साथ नहीं थी। उस मासूम बच्ची के साथ अंदर क्या हुआ?
आरोपी का विधिक बचाव: ‘मैं फिसल कर गिर गया था’
कोर्ट के इस तीखे सवाल पर आरोपी ने बलात्कार और हत्या के आरोपों से पूरी तरह इनकार करते हुए एक नया तर्क गढ़ा। आरोपी ने कोर्ट से कहा, बच्ची गौशाले में मेरे साथ थी और मैंने उसे खाने के लिए गाठी शेव भी दिया था। लेकिन जब मैंने उसे अपनी गोद में उठाया, तो मेरा पैर अचानक फिसल गया और मैं जमीन पर गिर गया। “मेरे गिरने के कारण बच्ची के सिर में गंभीर चोट आई और वह जोर-जोर से रोने लगी। मैंने उसे डर के मारे वहीं गौशाले में एक खाट (cot) पर लिटा दिया। मुझे लगा कि अगर लोग मुझे वहां देखेंगे, तो वे समझेंगे कि मैंने बच्ची को पीटा है, इसलिए मैं डरकर वहां से भाग गया। आरोपी ने दावा किया कि भागने के 10 मिनट बाद ही ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। उसने कहा कि उसे बच्ची की मौत की खबर पुलिस से ही पता चली थी।
अभियोजन पक्ष का डरावना सच और वैज्ञानिक साक्ष्य (The Brutal Reality & DNA Proof)
आरोपी के इस ‘फिसलने वाले दावे’ के विपरीत, पुणे ग्रामीण पुलिस और अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने रोंगटे खड़े कर देने वाले विधिक तथ्य और अकाट्य वैज्ञानिक सबूत रखे हैं।
अपराध की क्रूरता: 1 मई की दोपहर आरोपी बच्ची को बछड़ा दिखाने और स्नैक देने के बहाने गौशाले में ले गया। वहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया, उसका मुंह कपड़े से भींच दिया (Gagged) और बेरहमी से पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी। अभियोजन का आरोप है कि उसने शव के साथ भी दरिंदगी की और सबूत मिटाने के लिए शव को गौशाले के कचरे में फेंक दिया।
अकाट्य DNA रिपोर्ट: अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि मृत बच्ची के शरीर पर आरोपी के वीर्य (Semen) के अंश मिले हैं, और डीएनए (DNA) टेस्ट में इसकी शत-प्रतिशत पुष्टि हो चुकी है, जो आरोपी के ‘केवल गिरने वाले’ झूठ को विधिक रूप से पूरी तरह ध्वस्त करता है।
पुराना आपराधिक इतिहास (Criminal Antecedents)
विशेष न्यायाधीश ने आरोपी के पुराने आपराधिक और सामाजिक रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल दागे।
पशु क्रूरता का इतिहास: कोर्ट ने आरोपी के चचेरे भाई द्वारा दिए गए उस बयान पर सवाल पूछा जिसमें कहा गया था कि आरोपी ने दशकों पहले एक जानवर के साथ भी अप्राकृतिक कृत्य (Unnatural Sex) किया था। आरोपी ने इसे झूठ बताया।
पुराने आपराधिक मामले: कोर्ट ने याद दिलाया कि उस पर 1998 में एक बुजुर्ग महिला के साथ बलात्कार के प्रयास और 2015 में अपनी 17 वर्षीय भतीजी के साथ छेड़छाड़ के दो पुराने मामले दर्ज हैं। आरोपी का विधिक जवाब था कि वह उन मामलों में बरी (Acquit) हो चुका है क्योंकि उसने वे अपराध नहीं किए थे।
विधिक एवं केस सारांश (Case Matrix)
| विधिक/मुख्य बिंदु | पुणे पॉक्सो विशेष अदालत की विधिक कार्यवाही (जून 2026) |
| मामला/अपराध तिथि | 3 वर्षीय बच्ची का बलात्कार और मर्डर (घटना तिथि: 1 मई)। |
| माननीय न्यायाधीश | विशेष न्यायाधीश एस. आर. सालुंखे (पुणे कोर्ट)। |
| दर्ज बयान का प्रावधान | भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 351। |
| पुलिस की चार्जशीट | पुणे ग्रामीण पुलिस ने 16 मई को 1000 से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। |
| लागू विधिक धाराएं | भारतीय न्याय संहिता (BNS) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम। |
| वैज्ञानिक साक्ष्य | आरोपी का डीएनए (DNA) मैच हो चुका है; 54 गवाहों की गवाही पूरी। |
| अगला विधिक चरण | मामले में अंतिम बहस (Final Arguments) शनिवार से शुरू होगी। |

