Crowd Control: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मथुरा-वृंदावन में त्योहारों के दौरान होने वाली भारी भीड़ और उससे जुड़ी आपदाओं पर गंभीर संज्ञान लिया है।
मामले का सारांश (Quick Highlights)
| विवरण | तथ्य |
| न्यायाधीश | जस्टिस विनोद दिवाकर |
| मुख्य मुद्दा | मथुरा में भीड़ प्रबंधन और चयनात्मक विध्वंस कार्रवाई। |
| संदर्भ | 2022 की बांके बिहारी मंदिर भगदड़। |
| अगली सुनवाई | 19 मई, 2026 |
| जवाबदेह अधिकारी | DM, SSP और नगर आयुक्त, मथुरा। |
भीड़ प्रबंधन और संकट प्रबंधन योजना का विवरण मांगा
यह आदेश स्वामी शिव स्वरूपानंद जी महाराज द्वारा दायर एक याचिका पर आया है, जिसमें उन्होंने विकास प्राधिकरण की विध्वंस (Demolition) की कार्रवाइयों को ‘भेदभावपूर्ण’ बताया था। सुनवाई के दौरान जस्टिस विनोद दिवाकर ने जिला प्रशासन और मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण (MVDA) से शहर के लिए एक व्यापक भीड़ प्रबंधन और संकट प्रबंधन योजना (Comprehensive Crowd and Crisis Management Plan) का विवरण मांगा है। हाई कोर्ट ने याचिका के दायरे को बढ़ाते हुए न केवल अवैध निर्माण, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और ऐतिहासिक स्थलों पर भीड़ के व्यवहार को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
भीड़ प्रबंधन और वैज्ञानिक अध्ययन (Scientific Approach)
- कोर्ट ने 2022 में जन्माष्टमी के दौरान बांके बिहारी मंदिर में हुई भगदड़ जैसी स्थिति (जिसमें दो लोगों की मौत हुई थी) का जिक्र करते हुए प्रशासन से कड़े सवाल पूछे हैं।
- विशेषज्ञ संस्था: क्या जिले में भीड़ के व्यवहार को समझने के लिए कोई विशेषज्ञ संस्था मौजूद है?
- वैज्ञानिक विश्लेषण: क्या हाल की भगदड़ जैसी घटनाओं पर कोई वैज्ञानिक अध्ययन, शैक्षणिक शोध या संस्थागत विश्लेषण किया गया है?
- SOP और रणनीतियां: भीड़ और संकट प्रबंधन के लिए वर्तमान में कौन सी रणनीतियां और मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOP) लागू हैं?
अवैध निर्माण और भेदभाव का आरोप
- याचिकाकर्ता का आरोप है कि MVDA पिक एंड चूज (चुनिंदा कार्रवाई) की नीति अपना रहा है।
- पक्षपातपूर्ण कार्रवाई: याचिकाकर्ता के अनुसार, 23 लोगों के खिलाफ विध्वंस के आदेश पारित किए गए थे, लेकिन कार्रवाई केवल कुछ चुनिंदा लोगों के खिलाफ ही की गई।
- अवरोध की स्थिति: कोर्ट ने टिप्पणी की कि अवैध निर्माण न केवल गैर-कानूनी हैं, बल्कि आपातकालीन स्थितियों और बचाव कार्यों के दौरान बाधा बनकर स्थिति को और अधिक खतरनाक बना देते हैं।
अधिकारियों को सख्त निर्देश
- कोर्ट ने मथुरा के डीएम, नगर आयुक्त और एसएसपी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
- सुरक्षित शहर: प्रशासन को यह बताना होगा कि शहर को सुरक्षित और रहने योग्य बनाने के लिए क्या उपाय किए गए हैं।
- अवैध निर्माण का डेटा: पिछले पांच वर्षों में अवैध निर्माण के लिए बुक की गई संपत्तियों का विवरण और उन्हें रोकने के लिए अपनाए गए वैधानिक दिशानिर्देशों की जानकारी मांगी गई है।
- प्रशिक्षण: हितधारकों (Stakeholders) को संवेदनशील बनाने और प्रशिक्षण के माध्यम से संस्थागत क्षमता बढ़ाने के लिए क्या किया जा रहा है?
सुरक्षा और शहरी नियोजन का एकीकरण
इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह रुख दर्शाता है कि केवल अवैध निर्माण गिराना काफी नहीं है; शहरी नियोजन (Urban Planning) को इस तरह से किया जाना चाहिए कि वह धार्मिक पर्यटन और भारी भीड़ के दबाव को सुरक्षित रूप से झेल सके। कोर्ट की इस सक्रियता से मथुरा-वृंदावन में भविष्य के त्योहारों के लिए एक अधिक वैज्ञानिक और सुरक्षित ढांचा तैयार होने की उम्मीद है।

