Monday, August 17, 2026
HomeLaworder HindiDay-To-Day Trial: संवेदनशील मामलों में फिर से रोजाना सुनवाई की परंपरा लागू...

Day-To-Day Trial: संवेदनशील मामलों में फिर से रोजाना सुनवाई की परंपरा लागू हो…सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश

Day-To-Day Trial:सुप्रीम कोर्ट ने कहा, विशेष रूप से संवेदनशील मामलों में रोजाना (day-to-day) ट्रायल की परंपरा, जो लगभग 30 साल पहले तक चलन में थी, अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और अदालतों को इस पर वापस लौटना चाहिए।

मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने के लिए एक समिति गठित करें

न्यायमूर्ति जे.बी. पारडीवाला और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा, त्वरित न्याय का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित है और इसके लिए सभी हाईकोर्ट्स को अपनी-अपनी जिला न्यायपालिका के लाभार्थ इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने हेतु एक समिति गठित करनी चाहिए। पीठ ने अपने 22 सितम्बर के आदेश में कहा, महत्वपूर्ण या संवेदनशील मामलों में रोज़ाना ट्रायल की परंपरा को लगभग पूरी तरह छोड़ दिया गया है। हमें सच्चे मन से लगता है कि अब समय आ गया है कि अदालतें उस परंपरा पर लौटें।

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां

  • ग़ैर-निरंतर सुनवाई (piecemeal trial) से मामलों में महीनों या वर्षों तक देरी होती है, जिससे न्याय प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
  • ट्रायल कोर्ट्स अक्सर नियम तोड़ते हैं – एक गवाह का मुख्य बयान (examination-in-chief) एक महीने में और जिरह (cross-examination) अगले महीने में करते हैं।
  • जैसे ही गवाहों की जाँच शुरू हो, उसे रोज़ाना जारी रखना चाहिए जब तक कि सभी उपस्थित गवाहों की गवाही पूरी न हो जाए।
  • गवाह मौजूद होने पर भी मामूली या तुच्छ कारणों से स्थगन (adjournment) देना अस्वीकार्य है। विधायिका ने भी ऐसे स्थगनों पर नाखुशी जताई है।

हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीशों को सुझाव

  • जिला अदालतों के लिए परिपत्र (circular) जारी करें जिसमें स्पष्ट हो कि
  • गवाहों की जाँच शुरू होते ही इसे दिन-प्रतिदिन चलाया जाए।
  • स्थगन केवल अत्यंत असाधारण परिस्थितियों में मिले, जैसे परिवार में शोक आदि।
  • वकील की व्यक्तिगत असुविधा को विशेष कारण नहीं माना जाए।
  • यदि आरोपी या उसका वकील सहयोग न करे और यह देरी की साज़िश लगे तो अदालत कारण दर्ज कर आरोपी की जमानत रद्द करने पर विचार कर सकती है।
  • यह आदेश उस याचिका पर आया है जिसमें सीबीआई ने पिछले वर्ष कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा बलात्कार मामले के एक आरोपी को दी गई ज़मानत को चुनौती दी थी।
    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित मामले का ट्रायल 31 दिसम्बर तक पूरा किया जाए।

Petition(s) for Special Leave to Appeal (Crl.) No(s). 969/2025
THE CENTRAL BUREAU OF INVESTIGATION Petitioner(s) VERSUS MIR USMAN @ ARA @ MIR USMAN ALI Respondent(s)

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
31 ° C
31 °
31 °
74 %
2.1kmh
100 %
Sun
31 °
Mon
35 °
Tue
33 °
Wed
34 °
Thu
35 °