Tuesday, August 4, 2026
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Default bail: मंजूरी न होने पर भी चार्जशीट अधूरी नहीं…आरोपी को डिफॉल्ट बेल का हक नहीं

Default bail: दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ किया है कि आर्म्स एक्ट, 1959 के तहत आरोपी को सिर्फ इस आधार पर डिफॉल्ट बेल नहीं मिल सकती कि उसके खिलाफ दाखिल चार्जशीट में अभियोजन की मंजूरी नहीं है।

डिफॉल्ट बेल की याचिका को खारिज

जस्टिस तेजस करिया ने माना कि अगर अभियोजन अधूरी चार्जशीट दाखिल करता है, तो आरोपी को डिफॉल्ट बेल का अधिकार मिल सकता है, भले ही चार्जशीट तय समय में दाखिल की गई हो। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि आर्म्स एक्ट के तहत मंजूरी के बिना दाखिल चार्जशीट को अधूरी नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि आर्म्स एक्ट की धारा 39 के तहत मंजूरी जरूरी है, लेकिन अगर मंजूरी के बिना भी चार्जशीट दाखिल की गई है, तो उसे अधूरी नहीं माना जाएगा। इन सभी तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने आरोपी की डिफॉल्ट बेल की याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि इसमें कोई मेरिट नहीं है।

पुराने फैसले का हवाला

कोर्ट ने 2006 के नितिन नागपाल बनाम स्टेट केस का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि आर्म्स एक्ट के तहत मंजूरी न होना अभियोजन पर असर डाल सकता है, लेकिन इससे यह नहीं माना जा सकता कि चार्जशीट अधूरी है या जांच पूरी नहीं हुई।

यह है मामला

इस केस में आरोपी पर शिकायतकर्ता पर गोली चलाने का आरोप है। घटनास्थल से कुछ खाली कारतूस और एक जिंदा कारतूस बरामद हुआ था। शिकायतकर्ता ने आरोपी की पहचान सरकारी सीसीटीवी कैमरे से की थी। इसके बाद पुलिस ने चार्जशीट और फिर सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की।

आरोपी की दलील

आरोपी ने कहा कि पुलिस ने मंजूरी के बिना अधूरी चार्जशीट दाखिल की है, ताकि उसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 187(3) के तहत मिलने वाली डिफॉल्ट बेल से वंचित किया जा सके। उसका कहना था कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक जांच अधिकारी की रिपोर्ट को पुलिस रिपोर्ट नहीं माना जा सकता।

प्रॉसिक्यूशन की दलील

प्रॉसिक्यूशन ने कहा कि चार्जशीट 90 दिन की तय समयसीमा में दाखिल की गई थी और सिर्फ मंजूरी की प्रक्रिया लंबित होने से आरोपी को डिफॉल्ट बेल का हक नहीं मिल सकता। उन्होंने यह भी कहा कि कानून के अनुसार कोर्ट अपराध का संज्ञान लेता है, न कि सिर्फ किसी व्यक्ति विशेष का। इसलिए मंजूरी का असर BNSS के तहत अपराध के संज्ञान पर नहीं पड़ता।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 2023 के जजबीर सिंह बनाम एनआईए केस का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि मंजूरी के बिना दाखिल चार्जशीट को अधूरी नहीं माना जा सकता और इससे आरोपी को डिफॉल्ट बेल नहीं मिलती।

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