Friday, September 18, 2026
HomeHigh CourtDelay furnishing information: पुलिस की देरी से किसी की 'आज़ादी' नहीं छीनी...

Delay furnishing information: पुलिस की देरी से किसी की ‘आज़ादी’ नहीं छीनी जा सकती…UP DGP को नसीहत

Delay furnishing information: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि जमानत के मामलों में अदालत को आवश्यक जानकारी देने में देरी करने वाले पुलिस अधिकारियों से सख्ती से निपटा जाए।

पुलिस अधिकारी की देरी से नहीं मिल पाई थी जमानत

हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पुलिस अधिकारियों की लापरवाही के कारण किसी आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Liberty) को कम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ अपहरण के एक मामले में विनोद राम द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका को स्वीकार करते हुए, न्यायमूर्ति देशवाल ने टिप्पणी की कि संबंधित पुलिस अधिकारी की ओर से हुई देरी के कारण आरोपी को पहले जमानत नहीं मिल सकी।

HC के मुख्य निर्देश और टिप्पणी

DGP को सर्कुलर जारी करने का निर्देश: हाईकोर्ट ने राज्य के DGP को एक सर्कुलर जारी करने का निर्देश दिया है कि यदि जमानत याचिकाओं में सरकारी वकील को जानकारी उपलब्ध कराने में किसी भी पुलिस अधिकारी की ओर से लापरवाही पाई जाती है, तो उससे सख्ती से निपटा जाए। कोर्ट ने इसे जमानत आवेदक की स्वतंत्रता को कम करने के समान माना।

यह रहे अदालती निर्देश

  • अनावश्यक कारावास: न्यायमूर्ति देशवाल ने कहा, “आवेदक की स्वतंत्रता में इसी कारण से कटौती की गई और जमानत का मामला होने के बावजूद वह एक महीने से अधिक समय तक अनावश्यक रूप से जेल में रहा।”
  • न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप: इससे पहले, 17 नवंबर को सूचना न दिए जाने पर हाईकोर्ट ने इसे “न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप” और “अवमाननापूर्ण” कृत्य बताया था, जिसके बाद बलिया के पुलिस अधीक्षक (SP) को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया था।

SP बलिया ने दी कार्रवाई की जानकारी

न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए, बलिया के पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने एक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल किया और कोर्ट को सूचित किया कि संबंधित सब-इंस्पेक्टर (SI) के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है और जांच पूरी होने तक उसे निलंबित कर दिया गया है।

आरोपी को मिली जमानत

कोर्ट ने आरोपी विनोद राम को जमानत देते हुए पाया कि: अपहृत व्यक्ति से आवेदक को जोड़ने वाला कोई ‘आखिरी बार देखा गया’ सबूत (Last Seen Evidence) नहीं था। आरोपी पर सह-आरोपी के बयान के आधार पर ही आरोप लगाया गया था। मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और आवेदक का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
scattered clouds
28 ° C
28 °
28 °
78 %
2.6kmh
47 %
Fri
29 °
Sat
35 °
Sun
36 °
Mon
35 °
Tue
35 °

Recent Comments