सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणी
जब ECI की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शेषाद्रि नायडू ने कोर्ट को बताया कि 2023 की मतगणना का वीडियो ट्रेस नहीं हो पा रहा है, तो पीठ ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा:
“भारत निर्वाचन आयोग यह कैसे कह सकता है कि उसने अपना रिकॉर्ड खो दिया है? आपका पूरा उद्देश्य ही चुनाव कराना है और आपके पास दस्तावेज होने चाहिए। ‘हम इसे ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं’ कहने का सवाल कहां उठता है? आपके पास जो भी है, उसे अगली सुनवाई पर पेश करें। अन्यथा हमें आपके खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकालना पड़ेगा। हम इस तरह के बहाने (Lame Excuses) स्वीकार नहीं करेंगे।” — सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली: लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) के तहत चुनाव याचिकाओं में न्यायिक समीक्षा का दायरा, निर्वाचन संचालन नियम, 1961 (Conduct of Elections Rules, 1961) के तहत डाक मतपत्रों (Postal Ballots) की पुनः जांच व पुनर्गणना (Recounting) की विधिक प्रक्रिया, चुनाव आयोग द्वारा मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग व पर्यवेक्षक रिपोर्ट (Observer’s Report) के आधिकारिक संधारण (Custody of Election Records), तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम / भारतीय साक्ष्य संहिता के तहत साक्ष्य छिपाने या नष्ट होने पर अदालत द्वारा प्रतिकूल निष्कर्ष (Adverse Inference) निकालने के सिद्धांत पर सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को आड़े हाथों लिया है।
न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने बुधवार (14 अक्टूबर 2026) को कर्नाटक के शृंगेरी (Sringeri) विधानसभा क्षेत्र के चुनाव विवाद की सुनवाई के दौरान यह कड़ी नाराजगी व्यक्त की। शीर्ष अदालत तब स्तब्ध रह गई जब निर्वाचन आयोग ने अदालत के समक्ष दावा किया कि वह वर्ष 2023 में हुई मूल मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग का पता लगाने में असमर्थ है (Unable to trace the video recording)। पीठ ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि आयोग के ऐसे लचर बहाने नहीं चलेंगे और यदि अगली तारीख तक रिकॉर्ड पेश नहीं किए गए, तो अदालत चुनाव आयोग के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकालेगी।
सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख न्यायिक निष्कर्ष एवं विधिक टिप्पणियां
1. ‘चुनाव आयोग यह कैसे कह सकता है कि उसका रिकॉर्ड गुम हो गया है?’
खंडपीठ ने चुनाव आयोग द्वारा रिकॉर्ड की अभिरक्षा (Custody of Records) में दिखाई गई उदासीनता पर तीखे सवाल उठाते हुए दर्ज किया:*”भारत निर्वाचन आयोग (ECI) यह कैसे कह सकता है कि उसने अपना रिकॉर्ड खो दिया है? (How can the Election Commission of India say that it has lost its record?) आपका पूरा उद्देश्य ही चुनाव निष्पक्ष रूप से कराना है, और आपके पास आधिकारिक दस्तावेज सुरक्षित होने चाहिए। आपके यह कहने का प्रश्न ही कहां उठता है कि ‘हां, हम इसे खोजने का प्रयास कर रहे हैं’? आपने इसे निर्वाचित उम्मीदवार को दे दिया? क्या आयोग के पास रिकॉर्ड की कोई आधिकारिक अभिरक्षा नहीं है? आपके पास जो कुछ भी रिकॉर्ड है, उसे अगली सुनवाई की तारीख पर पेश करें। अन्यथा, हमें आपके विरुद्ध प्रतिकूल निष्कर्ष (Adverse Inference) निकालना होगा। हम इस प्रकार के लचर बहाने (Lame Excuses) बिल्कुल स्वीकार नहीं करेंगे।”*
2. पर्यवेक्षक रिपोर्ट और वीडियो फुटेज की मांग:
- कांग्रेस विधायक टी.डी. राजेगौड़ा ने याचिका में मांग की है कि 2023 की मूल मतगणना और मई 2026 में हाईकोर्ट के आदेश पर कराई गई पुनर्गणना—दोनों की आधिकारिक वीडियो रिकॉर्डिंग और चुनाव आयोग के सामान्य प्रेक्षक (General Observer Report) की रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की जाए।
- जब पीठ ने आयोग को इन दस्तावेजों और फुटेज को पेश करने का निर्देश देने की बात कही, तो चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शेषाद्रि नायडू ने असमर्थता जताते हुए कहा कि आयोग 2023 की मूल मतगणना वीडियो का पता नहीं लगा पा रहा है।
- पीठ ने इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए मामले को 15 फरवरी 2027 के लिए सूचीबद्ध किया और तब तक संपूर्ण सामग्री प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश दिया।
शृंगेरी चुनाव विवाद का तथ्यात्मक घटनाक्रम एवं कानूनी सफर
| तारीख / चरण | घटनाक्रम एवं न्यायिक कार्यवाही |
| मई 2023 (विधानसभा चुनाव परिणाम) | कर्नाटक की शृंगेरी विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी टी.डी. राजेगौड़ा ने भाजपा प्रत्याशी डी.एन. जीवराज को मात्र 201 मतों के बेहद करीबी अंतर से हराया और निर्वाचित घोषित हुए। |
| कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनाव याचिका | पराजित भाजपा प्रत्याशी डी.एन. जीवराज ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर भ्रष्टाचार और डाक मतपत्रों की गिनती में गड़बड़ी के आरोप लगाए। |
| 6 अप्रैल 2026 (हाईकोर्ट का आदेश) | हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के आरोपों में राजेगौड़ा को क्लीन चिट दी, परंतु 279 खारिज किए गए डाक मतपत्रों (Rejected Postal Ballots) के पुनर्सत्यापन का निर्देश दिया। |
| 3 मई 2026 (संशोधित परिणाम) | रिटर्निंग ऑफिसर (RO) ने पुनर्गणना के बाद संशोधित परिणाम घोषित किया, जिसमें कथित तौर पर राजेगौड़ा के मतों में 255 वोटों की कमी आ गई और जीवराज को विजेता घोषित कर दिया गया। |
| मई 2026 (सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत) | राजेगौड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शीर्ष अदालत ने अंतरिम आदेश पारित कर निर्देश दिया कि याचिका के लंबित रहने तक राजेगौड़ा ही शृंगेरी के विधायक (MLA) बने रहेंगे। |
| 14 अक्टूबर 2026 (वर्तमान सुनवाई) | वीडियो गुम होने के दावे पर सुप्रीम कोर्ट ने ईसीआई को कड़ी फटकार लगाई और प्रतिकूल निष्कर्ष की चेतावनी दी। |
सुप्रीम कोर्ट में उठाए गए विधिक आधार
- हाईकोर्ट के आदेश की सीमा से बाहर जाकर पुनर्गणना का आरोप:
- राजेगौड़ा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने केवल 279 खारिज डाक मतपत्रों के सत्यापन का सीमित आदेश दिया था।
- रिटर्निंग ऑफिसर ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर राजेगौड़ा के पक्ष में गिने जा चुके 562 वैध डाक मतपत्रों पर दोबारा विचार किया, जो प्रक्रियात्मक रूप से अवैध और मनमाना था।
- समानांतर आपराधिक मामला:
- पुनर्गणना के दौरान डाक मतपत्रों से छेड़छाड़ (Tampering with Postal Ballot Papers) के आरोपों पर भाजपा नेता जीवराज के खिलाफ एक आपराधिक मामला भी दर्ज किया गया था, जिसकी जांच पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने मई 2026 में अंतरिम रोक लगाई थी।
- चुनाव रिकॉर्ड की वैधानिक अभिरक्षा (Custody of Election Papers):
- निर्वाचन संचालन नियम, 1961 के नियम 93 और 94 के तहत, चुनाव से संबंधित सभी मतपत्र, ईवीएम डेटा, सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग जिला निर्वाचन अधिकारी/निर्वाचन आयोग की सुरक्षित अभिरक्षा में संरक्षित रखे जाने अनिवार्य होते हैं, विशेष रूप से तब जब चुनाव याचिका न्यायालय में लंबित हो। ऐसे में वीडियो “गुम” होने की बात कहना संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: टी.डी. राजेगौड़ा बनाम डी.एन. जीवराज व अन्य [सिविल अपील / विशेष अनुमति याचिका (SLP Civil) – सर्वोच्च न्यायालय]
- पीठ: न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा (खंडपीठ)
- आदेश की तिथि: 14 अक्टूबर 2026
- अगली सुनवाई की तिथि: 15 फरवरी 2027
- संबद्ध पक्षकार:
- अपीलकर्ता: टी.डी. राजेगौड़ा (कांग्रेस विधायक, शृंगेरी)
- प्रतिवादी: डी.एन. जीवराज (भाजपा नेता) एवं भारत निर्वाचन आयोग (ECI)
- ECI का प्रतिनिधित्व: वरिष्ठ अधिवक्ता शेषाद्रि नायडू
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 — धारा 80 से 116 (चुनाव याचिकाएं एवं प्रक्रिया)
- निर्वाचन संचालन नियम, 1961 (Conduct of Elections Rules, 1961) — नियम 56A, नियम 63 (पुनर्गणना) एवं नियम 93/94 (चुनाव रिकॉर्ड का संरक्षण)
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम / भारतीय साक्ष्य संहिता — धारा 114(g) (साक्ष्य प्रस्तुत न करने पर प्रतिकूल निष्कर्ष / Adverse Inference)
- अंतिम निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने ईसीआई को 2023 की मूल मतगणना और हालिया पुनर्गणना की वीडियो रिकॉर्डिंग व पर्यवेक्षक रिपोर्ट अगली सुनवाई (15 फरवरी 2027) तक पेश करने का अंतिम अवसर दिया; अन्यथा आयोग के खिलाफ प्रतिकूल विधिक निष्कर्ष निकाला जाएगा।
ECI Row: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | भारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठ | न्यायमूर्ति संजय कुमार एवं न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा |
| याचिकाकर्ता | टी.डी. राजेगौड़ा (कांग्रेस विधायक, शृंगेरी विधानसभा क्षेत्र) |
| प्रतिवादी | डी.एन. जीवराज (भाजपा प्रत्याशी) एवं भारत निर्वाचन आयोग (ECI) |
| मुख्य विवाद | 2023 की मूल मतगणना और मई 2026 में हुई पुनर्मतगणना (Recounting) के वीडियो रिकॉर्ड व प्रेक्षक (Observer) रिपोर्ट गायब होना। |
| सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश | ECI अगली तारीख तक रिकॉर्ड पेश करे; ‘वीडियो खो जाने’ जैसी लंगड़ी दलीलें नहीं मानी जाएंगी। |
| अगली सुनवाई | 15 फरवरी 2027 |

