Foreign Divorce vs Indian Law: राजस्थान हाई कोर्ट ने वैवाहिक कानून और विदेशी अदालती फैसलों की मान्यता पर एक दूरगामी निर्णय सुनाया है।
Family Court के आदेश को पलट दिया
हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने पारिवारिक अदालत (Family Court) के उस आदेश को पलट दिया, जिसने इस आधार पर तलाक देने से मना कर दिया था कि ‘शादी का अपरिवर्तनीय रूप से टूटना’ (Irretrievable Breakdown of Marriage) भारत में तलाक का स्वतंत्र वैधानिक आधार नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई पति अपनी पत्नी को सूचित किए बिना या उसे पक्ष रखने का अवसर दिए बिना विदेशी अदालत से एकतरफा (Ex-Parte) तलाक लेता है, तो यह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत ‘क्रूरता’ (Cruelty) माना जाएगा।
मामला क्या था? (The Background)
- विवाह और विवाद: शादी 2010 में हुई थी। पत्नी अमेरिका चली गई, लेकिन वहां उसके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार और उपेक्षा हुई, जिससे मजबूर होकर वह 2013 में भारत लौट आई।
-विदेशी तलाक: 2015 में पति ने कैलिफोर्निया (USA) की एक अदालत से एकतरफा तलाक ले लिया। पत्नी को इसकी जानकारी 2018 में हुई। - पत्नी की दलील: उसने तर्क दिया कि पति का यह गुप्त कदम उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाला था और यह ‘मानसिक क्रूरता’ के दायरे में आता है।
कोर्ट के मुख्य कानूनी निष्कर्ष (Key Legal Findings)
A. विदेशी डिक्री की वैधता पर प्रहार
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कैलिफोर्निया की अदालत द्वारा दिए गए तलाक का भारत में कोई कानूनी महत्व नहीं है।
- प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन: पत्नी को न तो नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का मौका मिला।
- प्रक्रियात्मक खामी: पति ने ‘सिविल प्रक्रिया संहिता’ (CPC) की धारा 13 और 14 के तहत आवश्यक प्रमाणित प्रतियां और सबूत पेश नहीं किए।
- क्षेत्राधिकार: पत्नी अमेरिका की नागरिक नहीं थी और उसने स्वेच्छा से विदेशी अदालत के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं किया था।
B. ‘क्रूरता’ की नई व्याख्या
- हाई कोर्ट ने कहा कि हालांकि कानून में ‘शादी का टूटना’ सीधा आधार नहीं है।
- मानसिक पीड़ा: पत्नी को अंधेरे में रखकर एकतरफा संबंध विच्छेद करना उसे ‘सदमे और अनिश्चितता’ की स्थिति में छोड़ देता है, जो क्रूरता है।
- वास्तविकता बनाम सिद्धांत: कोर्ट ने कहा कि ऐसी शादी को जबरन खींचना जो पूरी तरह खत्म हो चुकी है, खुद में एक ‘क्रूरता’ है क्योंकि यह दोनों पक्षों को भावनात्मक कष्ट देता है।
हाई कोर्ट ने क्यों दिया तलाक?
- लंबा अलगाव: दोनों पक्ष 2013 से अलग रह रहे थे।
- सुलह की कमी: पति ने कभी भी पत्नी को वापस लाने या मतभेदों को सुलझाने का प्रयास नहीं किया।
- पति का आचरण: विदेशी तलाक लेना और केवल बच्चे की कस्टडी मांगना यह दर्शाता है कि वह वैवाहिक बंधन को पूरी तरह खत्म करना चाहता था।
केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| बिंदु | विवरण |
| केस रेफरेंस | NM बनाम AK (2026 LiveLaw (Raj) 152)। |
| विदेशी डिक्री | कैलिफोर्निया (2015), जिसे भारत में अमान्य करार दिया गया। |
| मुख्य आधार | पति का एकतरफा व्यवहार ‘मानसिक क्रूरता’ माना गया। |
| महत्व | विदेशी तलाक लेने वाले प्रवासी भारतीयों (NRIs) के लिए चेतावनी। |
प्रवासियों के लिए बड़ा संदेश
यह फैसला उन NRIs के लिए एक बड़ा सबक है जो सोचते हैं कि विदेशी धरती पर एकतरफा तलाक लेकर वे भारत में अपनी वैवाहिक जिम्मेदारियों से मुक्त हो सकते हैं। राजस्थान हाई कोर्ट ने साफ कर दिया कि भारतीय अदालतों के लिए ‘प्रक्रियात्मक निष्पक्षता’ और ‘प्राकृतिक न्याय’ सर्वोपरि हैं।

