Wednesday, September 9, 2026
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Hockey India: अदालती आदेश की अनदेखी एक प्रशासनिक पाप है….जजों ने कहा: गंगा जल की तरह माफी हर किसी को पवित्र नहीं कर सकती

Hockey India: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक कड़ा फैसला सुनाते हुए हॉकी इंडिया (Hockey India) के महासचिव भोला नाथ सिंह को अदालत की अवमानना (Contempt of Court) का दोषी करार दिया है।

हाईकोर्ट के जस्टिस पुरुशेंद्र कुमार कौरव ने हॉकी इंडिया की निर्वाचित उपाध्यक्ष सईद आसिमा अली की याचिका पर यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने भोला नाथ सिंह को दोषी ठहराते हुए सजा पर सुनवाई के लिए 4 मई की तारीख तय की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF) के पदाधिकारी द्वारा अदालती आदेशों की जानबूझकर की गई अनदेखी एक “प्रशासनिक पाप” के समान है।

मामला क्या था? (The Dispute)

  • मूल विवाद: उपाध्यक्ष आसिमा अली ने भोला नाथ सिंह को उनके पद से हटाने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। आरोप था कि सिंह ‘स्पोर्ट्स कोड’ (Sports Code) के तहत आयु और कार्यकाल के नियमों के कारण पद के लिए अयोग्य हैं।
  • अदालती निर्देश (जनवरी 2025): कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए हॉकी इंडिया को निर्देश दिया था कि वे आसिमा अली को कार्यकारी बोर्ड (Executive Board) की सभी बैठकों के लिए लिंक प्रदान करें ताकि वह उनमें भाग ले सकें।
  • अवमानना: आरोप लगा कि 4 जुलाई 2025 और 27 जुलाई 2025 को हुई बैठकों के लिए जानबूझकर लिंक नहीं दिए गए, जिससे कोर्ट के आदेश का उल्लंघन हुआ।

कोर्ट की तल्ख टिप्पणियां (Strict Observations)

  • अदालत ने भोला नाथ सिंह के आचरण पर बहुत सख्त टिप्पणी की।
  • “गंगा जल” वाली उपमा: कोर्ट ने कहा, “बिना शर्त माफी, गंगा जल की तरह नहीं है जो प्रतिवादी (विशेष रूप से भोला नाथ सिंह) को उनके सचेत, सुनियोजित और जानबूझकर किए गए अनादर के पाप से पवित्र कर सके।”
  • सुधार की कोशिश नहीं: कोर्ट ने नोट किया कि अवमानना को सुधारने (Purge the contempt) का कोई प्रयास नहीं किया गया और न ही आदेश में बदलाव की मांग की गई।
  • सरकारी फंड और जिम्मेदारी: कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय खेल महासंघ राज्य से फंड प्राप्त करते हैं, ऐसे में उनके द्वारा अदालती आदेशों की अवमानना एक “प्रशासनिक पाप” (Administrative Sin) है।

अब आगे क्या होगा?

  • सजा पर सुनवाई: कोर्ट 4 मई को तय करेगा कि इस अवमानना के लिए क्या सजा दी जाए।
  • सुधार का मौका: हालांकि सिंह को दोषी पाया गया है, लेकिन कोर्ट ने उन्हें 4 मई से पहले अवमानना को “सुधारने” (Purge) की छूट दी है। इसके लिए उन्हें बोर्ड की बैठकों के संबंध में उचित कदम उठाने होंगे।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
दोषीभोला नाथ सिंह (महासचिव, हॉकी इंडिया)।
याचिकाकर्तासईद आसिमा अली (उपाध्यक्ष, हॉकी इंडिया)।
मुख्य कारणकार्यकारी बोर्ड की मीटिंग के लिंक न देना (Wilful Disobedience)।
सजा की तारीख4 मई, 2026

खेल प्रशासन में जवाबदेही

दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला खेल संघों के पदाधिकारियों के लिए एक बड़ा संदेश है। यह स्पष्ट करता है कि कोई भी पदाधिकारी, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं है। खेल संस्थाओं को ‘स्पोर्ट्स कोड’ और अदालती आदेशों का अक्षरशः पालन करना होगा, अन्यथा उन्हें गंभीर कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

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