Granting bail: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, केस की मेरिट काे जमानत देने का आधार बनाया जाए, न की पैसे जमा करने के वादे हाेने पर जमानत दें।
हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट काे साफ निर्देश दिए
हाल ही में एक अहम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अब किसी भी आरोपी को सिर्फ इस आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती कि वह कोई रकम जमा करने का वादा करता है। कोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं कि हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट अब नियमित या अग्रिम जमानत की याचिकाओं पर फैसला सिर्फ केस की मेरिट के आधार पर ही करें, न कि आरोपी या उसके परिवार द्वारा रकम जमा करने के आश्वासन पर।
₹25 लाख जमा करने का हलफनामा देकर जमानत ली थी
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने यह आदेश उस अपील पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें गजानन दत्तात्रय गोरे नाम के आरोपी ने ₹1.6 करोड़ की गबन के मामले में ₹25 लाख जमा करने का हलफनामा देकर जमानत ली थी। लेकिन जमानत मिलने के बाद उसने रकम जमा नहीं की, जिसके चलते हाईकोर्ट ने उसकी जमानत रद्द कर दी थी।
अब सिर्फ मेरिट पर ही मिलेगी जमानत
कोर्ट ने दोहराया कि अब से कोई भी जमानत सिर्फ केस की मेरिट के आधार पर ही दी जाएगी। अगर केस में मेरिट है, तो कोर्ट अपने विवेक से जमानत दे सकता है। लेकिन अगर मेरिट नहीं है, तो जमानत याचिका खारिज कर दी जाएगी। किसी भी स्थिति में अब रकम जमा करने की शर्त पर जमानत नहीं दी जाएगी। यह आदेश देशभर की अदालतों के लिए एक मिसाल बन सकता है, जिससे जमानत की प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्यायिक सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित होगा।
पैसे जमा करने के वादे पर जमानत देना गलत परंपरा
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि सिर्फ पैसे जमा करने के वादे पर जमानत देना गलत परंपरा है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा, “इस तरह की शर्तें लगाकर जमानत देना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे न्यायपालिका की गरिमा को भी ठेस पहुंचती है।”कोर्ट ने यह भी कहा कि अब से कोई भी ट्रायल कोर्ट या हाईकोर्ट किसी आरोपी या उसके परिवार के सदस्य द्वारा रकम जमा करने के आश्वासन पर जमानत नहीं दे सकेगा। कोर्ट ने यह आदेश देश के सभी हाईकोर्ट्स को भेजने के लिए रजिस्ट्री को निर्देश भी दिया।
जमानत की शर्त पूरी न करने पर ₹50 हजार का जुर्माना
कोर्ट ने आरोपी गजानन गोरे के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उसने पहले रकम जमा करने का वादा किया और फिर उसे “भारी शर्त” बताकर पीछे हट गया। कोर्ट ने इसे न्याय की प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया और उस पर ₹50 हजार का जुर्माना लगाया।
तय समय में रकम जमा करवानी चाहिए, बाद ही जमानत देते
कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देते समय यह क्यों नहीं सुनिश्चित किया कि वह रकम जमा कर चुका है या नहीं। कोर्ट ने कहा, “अगर हाईकोर्ट को जमानत देनी ही थी, तो पहले आरोपी से तय समय में रकम जमा करवानी चाहिए थी, उसके बाद ही जमानत दी जाती।”
CRIMINAL APPEAL NO.3219/2025(@Petition for Special Leave to Appeal (Crl.) No.10749/2025)
GAJANAN DATTATRAY GORE V/S THE STATE OF MAHARASHTRA & ANR. Respondent(s)

