Hindi phrase in FIRs: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ही ‘खास शब्द’ के इस्तेमाल पर नाराजगी जताई। कहा- यह कानून का दुरुपयोग है।
पुलिस हर FIR में एक ही खास हिंदी मुहावरे का इस्तेमाल कर रही
दिल्ली हाईकोर्ट ने महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने (Outraging modesty) से संबंधित मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा ऐतराज जताया है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस हर FIR में एक ही खास हिंदी मुहावरे का इस्तेमाल कर रही है, जिसे अक्सर शिकायतकर्ता (पीड़ित महिला) ने कहा भी नहीं होता। अदालत ने इसे ‘कानून का घोर दुरुपयोग’ करार दिया है।
‘हाथ मारा’ शब्द पर कोर्ट सख्त
जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने एक मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि धारा 354 (छेड़छाड़) के तहत दर्ज लगभग हर FIR में पुलिस “हाथ मारा” जैसे शब्दों का प्रयोग कर रही है। अदालत ने 17 दिसंबर के अपने आदेश में कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि IPC की धारा 354 (अब BNS की धारा 74) के तहत दर्ज हर मामले में पुलिस अपनी तरफ से ‘हाथ मारा’ लिख रही है, जबकि शिकायतकर्ता ने ऐसा बयान नहीं दिया होता। यह कानून का गलत इस्तेमाल है और थाना स्तर पर इस पर आत्ममंथन (Introspection) की जरूरत है।”
DCP को दिए निर्देश: मनगढ़ंत आरोप न जोड़ें
अदालत ने संबंधित पुलिस उपायुक्त (DCP) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि पुलिस शिकायतों में अपनी मर्जी से कोई भी मनगढ़ंत या फर्जी आरोप न जोड़े। कोर्ट ने कहा कि FIR में केवल वही दर्ज होना चाहिए जो पीड़ित ने वास्तव में कहा हो।
क्या था मामला?
कोर्ट एक इवेंट मैनेजर महिला के साथ शराब के नशे में मारपीट और बदसलूकी के मामले में दर्ज FIR को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की और जबरन साथ नाचने के लिए दबाव बनाया। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि दोनों पक्षों ने आपस में समझौता कर लिया है। समझौते को देखते हुए कोर्ट ने दो आरोपियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया, लेकिन पुलिस के ढर्रे पर गंभीर टिप्पणी की।

