Monday, August 17, 2026
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Judge’s Row 18: जस्टिस वर्मा की आखिरी उम्मीद टूटी… सुप्रीम अदालत ने कहा- उनका आचरण भरोसा नहीं जगाता

Judge’s Row 18: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा की इन-हाउस जांच रिपोर्ट को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश की जांच प्रक्रिया असंवैधानिक नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार हुई और जस्टिस वर्मा का आचरण भरोसा नहीं जगाता। सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच में शामिल जस्टिस दीपांकर दत्ता व जस्टिस अगस्टीन जॉर्ज मसीह ने कहा कि जस्टिस वर्मा ने जांच के दौरान फोटो और वीडियो अपलोड होने पर कोई आपत्ति नहीं जताई और बिना विरोध जांच में शामिल हुए। 6 मई को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना को भेजे गए अपने पत्र में भी उन्होंने जांच प्रक्रिया को असंवैधानिक नहीं बताया। बेंच ने कहा कि वर्मा का आचरण ऐसा नहीं है कि उनकी याचिका पर विचार किया जाए। उन्होंने 8 मई को तत्कालीन CJI द्वारा संसद को भेजी गई महाभियोग की सिफारिश को रद्द करने की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कपिल सिब्बल की दलीलें भी खारिज कीं

वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने वर्मा की ओर से दलील दी थी कि इन-हाउस जांच और रिपोर्ट एक समानांतर और असंवैधानिक प्रक्रिया है। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत तय कानून पर आधारित है और पूरी तरह वैध है।

कोर्ट ने कहा- संसद को कार्रवाई करने से नहीं रोका जा सकता

57 पेज के फैसले में कोर्ट ने कहा कि अगर किसी जज के खिलाफ गंभीर आरोप हैं और संसद कार्रवाई नहीं करती, तो न्यायपालिका उसे बाध्य नहीं कर सकती। संसद को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि देशहित में क्या जरूरी है।

CJI को नैतिक, कानूनी और संस्थागत जिम्मेदारी

कोर्ट ने कहा कि CJI को न्यायपालिका की साख बनाए रखने की नैतिक, कानूनी और संस्थागत जिम्मेदारी है। अगर किसी जज के खिलाफ गंभीर आरोप हैं, तो CJI को संसद की कार्रवाई का इंतजार करना जरूरी नहीं है।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को रिपोर्ट भेजना पूरी तरह वैध

फैसले में कहा गया कि राष्ट्रपति ही जजों की नियुक्ति के अंतिम प्राधिकारी हैं और प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति कार्य करते हैं। ऐसे में CJI द्वारा जांच रिपोर्ट राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजना पूरी तरह वैध और उचित है।

CJI की भूमिका सिर्फ रिपोर्ट भेजने तक सीमित नहीं

कोर्ट ने कहा कि CJI की भूमिका सिर्फ रिपोर्ट को आगे बढ़ाने तक सीमित नहीं है। उन्हें रिपोर्ट पर अपनी राय देने का अधिकार है। CJI को ‘पोस्ट ऑफिस’ की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि जस्टिस वर्मा के मौलिक अधिकारों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। हालांकि, अगर उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होती है, तो वे उसमें अपनी बात रख सकते हैं।

14 मार्च को जज के स्टोर रूम में मिले थे नकदी राशि

14 मार्च को राजधानी स्थित उनके सरकारी आवास के स्टोररूम में आग लगने के बाद वहां से जली हुई नकदी के बंडल मिले थे। इसके बाद उनके खिलाफ इन-हाउस जांच शुरू हुई थी।

WRIT PETITION (CIVIL) No. 699 OF 2025
XXX … PETITIONER
VS.
THE UNION OF INDIA & OTHERS … RESPONDENTS

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