MANUAL SCAVENGING: सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही परिसर में मैनुअल स्कैवेंजिंग और खतरनाक सफाई कराए जाने पर सख्त नाराजगी जताई है।
जनहित याचिका में दिखाई गई तस्वीर
कोर्ट को कुछ तस्वीरें दिखाई गईं, जिनमें गेट F पर सफाईकर्मियों से बिना सुरक्षा उपकरणों के खतरनाक सफाई कराई जा रही है। इस पर कोर्ट ने पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) के संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा है। यह मामला एक जनहित याचिका के तहत सामने आया, जिसमें मैनुअल स्कैवेंजिंग की समस्या को उठाया गया है। जस्टिस सुधांशु धूलिया (जो 9 अगस्त को रिटायर हो गए) और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच ने 6 अगस्त को यह आदेश दिया।
ईस्ट दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को पक्षकार बनाया गया
कोर्ट ने इस मामले में ईस्ट दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को भी पक्षकार बनाया है और निर्देश दिया है कि वह यह स्पष्ट करे कि आज भी मैनुअल स्कैवेंजिंग और खतरनाक सफाई क्यों कराई जा रही है, वह भी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के। कोर्ट ने कहा कि अगर अगली सुनवाई तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया जाएगा।
पिछले साल भी कोर्ट ने जताई थी चिंता
अक्टूबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा था कि मैनुअल स्कैवेंजर्स को लंबे समय से अमानवीय हालात में जीने को मजबूर किया गया है। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को देशभर से मैनुअल स्कैवेंजिंग पूरी तरह खत्म करने का निर्देश दिया था।
मृतकों के परिजनों को 30 लाख मुआवजा देने का आदेश
कोर्ट ने यह भी कहा था कि सीवर की सफाई के दौरान जिन लोगों की मौत होती है, उनके परिजनों को केंद्र और राज्य सरकारें 30 लाख रुपए का मुआवजा दें।

