MARTYR Case: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए सैनिक की विधवा की दयनीय स्थिति पर गुरुवार को गहरी चिंता व्यक्त की।
याचिकाकर्ताओं का दावा
महिला ने याचिका में कहा है कि उसे 5 बीघा जमीन का अधिकार होने के बावजूद सिर्फ 2.5 बीघा जमीन ही आवंटित की गई और वह 1974 से अपना हक पाने के लिए संघर्ष कर रही है। हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार 8 दिसंबर तक सभी आवश्यक कदम उठाए ताकि महिला के दावे का निस्तारण जल्द से जल्द किया जा सके।
याचिका की हकीकत चौंकानेवाला: कोर्ट
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की बेंच ने कहा कि यदि याचिका में किए गए दावे सही हैं, तो यह “समाज की व्यवस्था की चौंकाने वाली तस्वीर” पेश करता है। कोर्ट ने कहा, “यह मामला उस शहीद की विधवा का है, जिसे 5 बीघा जमीन मिलनी चाहिए थी लेकिन केवल 2.5 बीघा दी गई, और वह 1974 से संघर्ष कर रही है। यदि यह बातें सही हैं, तो यह हमारे पूरे समाज की स्थिति का बेहद चौंकाने वाला प्रमाण है।”अदालत ने यूपी सरकार को निर्देश दिया कि विधवा के दावे का अत्यंत शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए सभी “आवश्यक” कदम उठाए जाएं। कोर्ट ने अधिकारियों को 8 दिसंबर 2025 को अगली सुनवाई तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का भी आदेश दिया।

