Monday, August 17, 2026
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COUPLE Case: खुशहाल शादीशुदा जोड़े को ट्रायल झेलने पर मजबूर करना ‘भाग्य का विडंबन’…यह रही कोर्ट की टिप्पणी

COUPLE Case: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने POCSO एक्ट के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

आरोपी युवक ने कथित पीड़िता से विवाह कर लिया

अदालत ने कहा, एक खुशहाल शादीशुदा जोड़े को सिर्फ शत्रु ( hostile ) गवाही दर्ज कराने के लिए ट्रायल फेस करने को मजबूर करना ‘भाग्य का विडंबन’ और ‘उत्पीड़न का साधन’ होगा। इस मामले में आरोपी युवक ने कथित पीड़िता से विवाह कर लिया था और स्वयं महिला ने भी FIR रद्द करने का समर्थन किया तथा अपने पिता द्वारा लगाए गए आरोपों से इनकार किया।

हर आंख से आंसू पोंछे जाएं, यही कोर्ट का कर्तव्य

जस्टिस क्षितिज शैलेन्द्र ने अश्विनी आनंद की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि जब न्यायहित तत्काल हस्तक्षेप की मांग करता है, तब अदालत “मूक दर्शक” या “सिर्फ बाईस्टैंडर” नहीं बनी रह सकती। 21 नवंबर 2025 के आदेश में अदालत ने कहा कि जज का “पावन कर्तव्य” है कि “हर आंख से आंसू पोंछे जाएं” और कानून का उद्देश्य समाज के लिए समस्याएं खड़ी करना नहीं, बल्कि समाधान ढूंढना है।

महिला के पिता ने FIR दर्ज कराई थी

कोर्ट ने कहा, “ऐसे मामलों में किसी महिला को महीनों और वर्षों तक अदालत आने पर मजबूर करना, केवल अपने पति को बरी कराने के लिए, जबकि वह खुद किसी भी गलत काम को नहीं मानती — यह उत्पीड़न का साधन बन जाएगा।”महिला के पिता ने FIR दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप था कि अप्रैल 2024 में याचिकाकर्ता ने उसकी बेटी का अपहरण किया। जांच के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी, जबकि “पीड़िता” ने पुलिस को दिए बयान में आरोपों से इनकार किया और कहा कि वह अपनी इच्छा से माता-पिता का घर छोड़कर गई थी। उसने यह भी बताया कि उस समय आरोपी के साथ कोई शारीरिक संबंध नहीं था।

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