अध्ययन के मुख्य बिंदु और निष्कर्ष (Key Highlights)
- अध्ययन का दायरा:यह शोध पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन की अध्यक्षता वाले सेंटर द्वारा तैयार किया गया है। इसमें 3,688 मुकदमों का अध्ययन किया गया, जिनमें मध्यस्थता अधिनियम की धारा 11 के तहत मामले दर्ज किए गए थे।
- मामलों का निपटारा (Disposal Pattern):धारा 11 के तहत दायर मुकदमों में मध्यस्थ की नियुक्ति सबसे प्रमुख परिणाम रहा—बॉम्बे हाईकोर्ट में 82.61%, दिल्ली हाईकोर्ट में 78.02% और सुप्रीम कोर्ट में 70.59% मामलों में कोर्ट ने मध्यस्थ नियुक्त किए।
- उच्च न्यायपालिका में महिलाओं का सीमित प्रतिनिधित्व:नालसार सेंटर की एसोसिएट डायरेक्टर चांद चोपड़ा के अनुसार, ये आंकड़े कानूनी पेशे और न्यायपालिका में महिलाओं की सीमित संख्या का सीधा प्रतिबिंब हैं:
- सुप्रीम कोर्ट: केवल ~5% महिला न्यायाधीश।
- उच्च न्यायालय (High Courts): केवल ~15% महिला न्यायाधीश।
- जिला अदालतें (District Courts): लगभग 37% महिला न्यायाधीश।
- AIBE XXI (2026): ऑल इंडिया बार परीक्षा पास करने वाले 1.16 लाख वकीलों में से 37% (42,757) महिलाएं थीं।
- पूल की कमी (Limited Pool of Eligible Female Arbitrators):व्यावसायिक विवादों में पक्षकार (Parties) आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त (Retired) न्यायाधीशों को मध्यस्थ नियुक्त करना पसंद करते हैं। चूंकि उच्च न्यायपालिका में महिला जजों का कैडर ऐतिहासिक रूप से छोटा रहा है, इसलिए पात्र महिला मध्यस्थों का कुल पूल (Pool) ही सीमित रह जाता है।
हैदराबाद / नई दिल्ली: वैकल्पिक विवाद समाधान (Alternative Dispute Resolution – ADR), मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 (Arbitration and Conciliation Act, 1996) की धारा 11 के तहत अदालतों द्वारा मध्यस्थों की नियुक्ति, कानूनी पेशे और उच्च न्यायपालिका में लैंगिक विविधता (Gender Diversity in Higher Judiciary & Legal Practice), तथा वाणिज्यिक विवादों के निपटारे में महिला वकीलों व सेवानिवृत्त महिला न्यायाधीशों के सीमित प्रतिनिधित्व पर एक व्यापक और आंखें खोलने वाला अनुभवजन्य अध्ययन (Empirical Study) सामने आया है।
नालसार विधि विश्वविद्यालय (NALSAR University of Law, Hyderabad) के ‘मिलन के. बनर्जी सेंटर फॉर आर्बिट्रेशन लॉ’ द्वारा तैयार की गई एक हालिया शोध रिपोर्ट—‘Arbitrator Appointments in Numbers’—के अनुसार, वर्ष 2025 के दौरान भारत के सर्वोच्च न्यायालय, बॉम्बे उच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा की गई कुल मध्यस्थ नियुक्तियों में से 70% से अधिक पदों पर पुरुषों का कब्जा रहा, जबकि महिला मध्यस्थों की हिस्सेदारी 30% से भी कम रही।
अध्ययन के प्रमुख सांख्यिकीय आंकड़े एवं अदालत-वार असमानता
अध्ययन में कुल 3,688 मुकदमों और 2,283 ऐसी नियुक्तियों का गहराई से विश्लेषण किया गया जहां मध्यस्थों का लैंगिक डेटा दर्ज था:
| न्यायिक मंच (Court) | कुल दर्ज नियुक्तियां | पुरुष मध्यस्थ (%) | महिला मध्यस्थ (%) | प्रमुख अवलोकन |
| सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) | दर्ज मामले | 79.17% | 20.83% | पुरुष वर्चस्व सबसे अधिक (लगभग 8 में से 1 नियुक्ति)। |
| बॉम्बे उच्च न्यायालय (BHC) | दर्ज मामले | 71.30% | 28.70% | 70% से अधिक नियुक्तियां पुरुष मध्यस्थों को मिलीं। |
| दिल्ली उच्च न्यायालय (DHC) | दर्ज मामले | 68.88% | 31.12% | तीनों में तुलनात्मक रूप से महिलाओं का प्रतिशत थोड़ा बेहतर। |
| कुल समग्र औसत (Total) | 2,283 नियुक्तियां | 70.03% (1,598) | 29.97% (685) | प्रत्येक 10 नियुक्तियों में से 7 नियुक्तियां पुरुषों को मिलीं। |
धारा 11 के तहत मामलों के निपटारे का स्वरूप
मध्यस्थता अधिनियम की धारा 11 के तहत जब कोई पक्षकार अदालत का दरवाजा खटखटाता है, तो मामला चार तरीकों से निस्तारित होता है:
- अदालत द्वारा मध्यस्थ की नियुक्ति करना,
- याचिकाकर्ता द्वारा मामला वापस लेना,
- अदालत द्वारा याचिका खारिज करना, या
- दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो जाना।
रिपोर्ट के अनुसार, तीनों ही मंचों पर मध्यस्थ की नियुक्ति होना ही सबसे प्रमुख परिणाम (Dominant Outcome) रहा:
- बॉम्बे हाईकोर्ट: 82.61% मामलों में मध्यस्थ नियुक्त हुए।
- दिल्ली हाईकोर्ट: 78.02% मामलों में मध्यस्थ नियुक्त हुए।
- सुप्रीम कोर्ट: 70.59% मामलों में मध्यस्थ नियुक्त हुए।
खारिज होने की दर में अंतर: सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं के खारिज होने की दर 17.65% रही, जबकि बॉम्बे हाईकोर्ट में केवल 4.02% और दिल्ली हाईकोर्ट में 5.09% याचिकाएं ही खारिज हुईं।
असमानता का मूल कारण: उच्च न्यायपालिका और कानूनी पेशे का पिरामिड
शोध दल की एसोसिएट डायरेक्टर (रिसर्च) अधिवक्ता चांद चोपड़ा और रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, मध्यस्थों की नियुक्ति में यह लैंगिक अंतर सीधे तौर पर कानूनी पेशे और भारतीय न्यायपालिका में महिलाओं के घटते प्रतिनिधित्व का प्रतिबिंब है:
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भारतीय न्यायपालिका और बार में महिलाओं का प्रतिनिधित्व │
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【अखिल भारतीय बार परीक्षा (AIBE)】 【जिला न्यायपालिका (District Courts)】 【उच्च न्यायपालिका (HC & SC)】
• 2026 में 1.16 लाख पास हुए • जिला अदालतों में महिला जजों का • उच्च न्यायालयों में महिलाएं: ~15%
• महिला उम्मीदवार: ~37% (42,757) प्रतिनिधित्व: **लगभग 37%** • **सर्वोच्च न्यायालय में महिलाएं: मात्र ~5%**
- ‘पूल’ की भारी कमी: जब वाणिज्यिक विवादों में पक्षकार या अदालतें किसी सेवानिवृत्त हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जज को मध्यस्थ चुनना चाहते हैं, तो महिला जजों का उपलब्ध पूल ही अत्यंत सीमित होता है।
- अध्ययन का दायरा: यह रिपोर्ट उन तीन प्रमुख अदालतों (SC, बॉम्बे HC और दिल्ली HC) के रिकॉर्ड पर आधारित है जिन्हें आम तौर पर कानूनी पेशे में महिलाओं की प्रगति के मामले में अपेक्षाकृत अधिक प्रगतिशील माना जाता है। अन्य पारंपरिक उच्च न्यायालयों में यह आंकड़ा और भी अधिक विषम होने की संभावना है।
शोध केंद्र और विधिक संदर्भ
- शोध संस्थान: मिलन के. बनर्जी सेंटर फॉर आर्बिट्रेशन लॉ (Milon K Banerji Centre for Arbitration Law), नालसार विधि विश्वविद्यालय, हैदराबाद।
- शोध समिति का नेतृत्व:
- अध्यक्ष: न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन (पूर्व न्यायाधीश, भारत का सर्वोच्च न्यायालय)
- सह-अध्यक्ष: वरिष्ठ अधिवक्ता रितिन राय
- निदेशक (अनुसंधान): अधिवक्ता अमित जॉर्ज
- एसोसिएट डायरेक्टर (अनुसंधान): अधिवक्ता चांद चोपड़ा
- प्रासंगिक कानून: मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 11 (न्यायालयों द्वारा मध्यस्थों की नियुक्ति के नियम)
- प्रमुख निष्कर्ष: वाणिज्यिक मध्यस्थता में निष्पक्षता और व्यापकता सुनिश्चित करने के लिए केवल संस्थागत नियमों में सुधार पर्याप्त नहीं है, बल्कि बार और बेंच दोनों में वरिष्ठ स्तर पर महिलाओं की उपस्थिति बढ़ाना अनिवार्य है ताकि योग्य मध्यस्थों का पूल व्यापक और संतुलित हो सके।
NALSAR Report:न्यायालय-वार लैंगिक विभाजन (Court-Wise Gender Disparity)
| न्यायालय / फोरम | पुरुषों की हिस्सेदारी (%) | महिलाओं की हिस्सेदारी (%) |
| सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) | 79.17% | 20.83% |
| बॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court) | 71.30% | 28.70% |
| दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) | 68.88% | 31.12% |
| कुल औसत (Overall Average) | 70.03% | 29.97% |

