NHAI LAND ACQUISITION: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण के मामलों में उचित मुआवजे की संवैधानिक गारंटी को कम नहीं किया जा सकता।
शीर्ष कोर्ट ने कहा कि किसानों को दिया जाने वाला तुलना (Solatium) और ब्याज इस आधार पर नहीं रोका जा सकता कि इससे सरकार या NHAI पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भूयान की पीठ ने NHAI की उस समीक्षा याचिका (Review Petition) को निपटाते हुए यह आदेश दिया, जिसमें ₹29,000 करोड़ के वित्तीय भार का हवाला देकर पुराने फैसले को बदलने की मांग की गई थी। NHAI ने दलील दी थी कि 2019 के फैसले को पिछली तारीख (Retrospectively) से लागू करने पर उन पर ₹100 करोड़ नहीं, बल्कि लगभग ₹29,000 करोड़ का बोझ पड़ेगा।
अदालत की मुख्य टिप्पणियां: वित्तीय अनुमान आधार नहीं
- संवैधानिक अधिकार: “मुआवजे और ब्याज को वित्तीय बोझ की मात्रा पर निर्भर नहीं बनाया जा सकता। इसके आधार पर ‘उचित मुआवजे’ की संवैधानिक गारंटी को कम नहीं किया जा सकता।”
- ब्याज दर: अदालत ने स्पष्ट किया कि भूस्वामियों को ‘भूमि अधिग्रहण अधिनियम’ के तहत 9 प्रतिशत ब्याज मिलेगा, न कि NHAI अधिनियम के तहत मिलने वाला मात्र 5 प्रतिशत।
संतुलन: बंद हो चुके मामलों को दोबारा नहीं खोला जाएगा
- अदालत ने किसानों के अधिकारों और कानूनी निश्चितता के बीच संतुलन बनाते हुए एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी दिया।
- अंतिम फैसला: जिन मामलों में मुआवजा तय हो चुका है और कानूनी प्रक्रिया पूरी (Finality) हो चुकी है, उन्हें फिर से नहीं खोला जा सकता।
- लंबित मामले: केवल वे मामले जहां दावे अभी भी जीवित (Alive) हैं या कानूनी प्रक्रिया के विभिन्न चरणों (जैसे मध्यस्थता या कोर्ट) में लंबित हैं, वे ही इस बढ़े हुए मुआवजे के हकदार होंगे।
मामले की पृष्ठभूमि: अनुच्छेद 14 का उल्लंघन
- 2019 का फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि NHAI अधिनियम की धारा 3J, जो भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 के लाभों (ब्याज और सोलेशियम) को रोकती थी, संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है।
- रिट्रोस्पेक्टिव असर: कोर्ट ने पहले ही तय कर दिया था कि यह लाभ पुरानी तारीखों से लागू होगा क्योंकि समान परिस्थितियों वाले किसानों के बीच भेदभाव नहीं किया जा सकता।
विवरण NHAI एक्ट (पुराना प्रावधान) भूमि अधिग्रहण एक्ट (SC का आदेश)
ब्याज दर 5% (कैप) 9%
सोलेशियम (तुलना) देय नहीं था देय है
संवैधानिक आधार भेदभावपूर्ण माना गया अनुच्छेद 14 और 300A के अनुरूप
यह रहा निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से उन हजारों किसानों को राहत मिलेगी जिनकी जमीनें राजमार्ग निर्माण के लिए ली गई थीं और जो लंबे समय से उचित ब्याज की प्रतीक्षा कर रहे थे। अदालत ने साफ कर दिया है कि बुनियादी ढांचे के विकास की कीमत किसानों के संवैधानिक अधिकारों की कटौती करके नहीं चुकाई जा सकती।

