केस मैट्रिक्स: Telangana Online RTI Portal PIL Data
| पहलू | विवरण |
| संबंधित अदालत | तेलंगाना उच्च न्यायालय (Telangana High Court) |
| माननीय पीठ | जस्टिस पी. सैम कोशी एवं जस्टिस नरसिंह राव नंदीकोंडा |
| याचिकाकर्ता | बैनप्पागारी विनय रेड्डी (लॉ छात्र, Party-in-Person) |
| RTI आवेदनों का निपटारा | 17,865 में से केवल 377 निस्तारित (2.1%) |
| प्रथम अपीलों का निपटारा | 2,502 में से 0 निस्तारित (0%) |
| सक्रिय प्राधिकरण | 3,323 में से केवल 17 पोर्टल का उपयोग कर रहे हैं (99.48% डिफ़ॉल्टर) |
| अगली सुनवाई | 3 अगस्त 2026 |
Online RTI Portal: तेलंगाना ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल (Telangana RTI Online Portal) की बेहद खराब कार्यप्रणाली और सूचना का अधिकार कानून के ढीले क्रियान्वयन को लेकर तेलंगाना हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
हाईकोर्ट के जस्टिस पी. सैम कोशी और जस्टिस नरसिंह राव नंदीकोंडा की पीठ ने मेदक निवासी लॉ छात्र बैनप्पागारी विनय रेड्डी (Banappagari Vinay Reddy) की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। एक कानून के छात्र द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।
याचिका में किए गए चौंकाने वाले खुलासे (RTI आंकड़ों के आधार पर)
याचिकाकर्ता (जो स्वयं कोर्ट में पेश हुए) ने राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार (ITE&C) विभाग से ही RTI के जरिए आंकड़े हासिल कर अदालत के समक्ष पेश किए:
- आवेदनों की स्थिति: पोर्टल के लॉन्च से लेकर अब तक दर्ज कुल 17,865 RTI आवेदनों में से केवल 377 (महज 2.1%) का ही निपटारा किया गया है।
- प्रथम अपीलों का निपटारा शून्य: पोर्टल के जरिए दर्ज कुल 2,502 प्रथम अपीलों (First Appeals) में से एक का भी निपटारा नहीं हुआ (0% निस्तारण)।
- अधिकारियों की अरुचि: पोर्टल पर 3,323 सार्वजनिक प्राधिकरणों (Public Authorities) को ऑनबोर्ड किया गया था, लेकिन केवल 17 प्राधिकरण ही वास्तव में इसका उपयोग कर रहे हैं। यानी 99.48% प्राधिकरण इस ऑनलाइन सिस्टम का पालन ही नहीं कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता की मुख्य मांगें
- पोर्टल का पूर्ण क्रियान्वयन: राज्य के सभी सार्वजनिक प्राधिकरणों, जन सूचना अधिकारियों (PIOs) और प्रथम अपीलीय प्राधिकारियों को ऑनलाइन पोर्टल का अनिवार्य रूप से उपयोग करने के निर्देश दिए जाएं।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन (Kishan Chand Jain v. UOI): सर्वोच्च न्यायालय ने देश के सभी राज्य सूचना आयोगों को 31 दिसंबर 2023 तक हाइब्रिड/ऑनलाइन सुनवाई (Hybrid Hearings) शुरू करने का निर्देश दिया था। तेलंगाना सूचना आयोग ने इस समय-सीमा का पालन नहीं किया है।
- दूरदराज के नागरिकों की परेशानी: ऑनलाइन/हाइब्रिड सुनवाई न होने के कारण आदिलाबाद और खम्मम जैसे दूरदराज के जिलों के नागरिकों को छोटी-छोटी सुनवाइयों के लिए हैदराबाद की यात्रा करनी पड़ती है।
- प्रवासी लीगल सेल नज़ीर: याचिका में सुप्रीम कोर्ट के Pravasi Legal Cell v. Union of India फैसले का हवाला दिया गया, जिसमें सभी राज्यों में प्रभावी आरटीआई पोर्टल चालू करने का आदेश दिया गया था।
हाई कोर्ट का रुख और अगली सुनवाई
अदालत में प्रतिनिधित्व: तेलंगाना राज्य सूचना आयोग और ITE&C विभाग की ओर से सरकारी वकील (Government Pleader) प्रदीप कुमार उपस्थित हुए।

