त्वरित सार (Digital Quick Takeaways)
- मुख्य विचार: इंफोसिस के सह-संस्थापक और परीक्षा सुधार समिति के अध्यक्ष नंदन नीलेकणी के अनुसार, पारंपरिक प्रिंटेड प्रश्नपत्र ही पेपर लीक की मुख्य वजह हैं।
- सुझाया गया समाधान: एक पूर्व निर्धारित ‘एक’ प्रश्नपत्र के बजाय विशाल ‘क्वेश्चन बैंक’ (Question Bank) बनाया जाए और परीक्षा से ठीक कुछ समय पहले डिजिटल रूप से प्रश्नपत्र तैयार किया जाए।
- तकनीक और AI का उपयोग: परीक्षा के दिन ही AI और आधुनिक तकनीक की मदद से अंतिम समय में पेपर तैयार करने और पूरी तरह से कंप्यूटर-आधारित परीक्षा (Computer-Based Testing) अपनाने का सुझाव।
- अवसंरचना (Infrastructure): वर्तमान में उपलब्ध लगभग 1.5 लाख परीक्षा केंद्रों के नेटवर्क को और अधिक विस्तारित करने की आवश्यकता।
- पृष्ठभूमि: मई में नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक के बाद देश भर में हुए विरोध प्रदर्शनों और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री द्वारा इस उच्च स्तरीय कार्यबल (Task Force) का गठन किया गया था।
नई दिल्ली: देश में सभी परीक्षाएं कंप्यूटर पर कराने और परीक्षा के दिन ही एआई से पेपर बनाने का प्रस्ताव आया है। परीक्षा सुधार समिति के अध्यक्ष नंदन नीलेकणी ने मंगलवार को दिल्ली में कहा, “पेपर लीक रोकने के लिए पहले से प्रश्नपत्र रखने की जरूरत ही क्यों है? पेपर होगा तो उसे बेचकर पैसा कमाने का लालच रहेगा। इसकी जगह सवालों का विशाल बैंक बनाएं। परीक्षा से ठीक पहले उससे पेपर तैयार करें। इससे पेपर बेचने का लालच खत्म होगा।
एआई से उसी दिन पेपर बनाने के सवाल पर यह दिया जवाब
” एआई से उसी दिन पेपर बनाने के सवाल पर उन्होंने कहा, “हां, बिल्कुल।” नीलेकणी ने कहा, “देश में अभी 1.5 लाख स्थानों पर कंप्यूटर से परीक्षा देने की सुविधा है। सभी परीक्षाएं कंप्यूटर पर कराने के लिए यह नेटवर्क बढ़ाना होगा।” उनके मुताबिक, पेपर लीक की मूल वजहें पहचानकर तकनीक से समस्या सुलझाई जा सकती है। उन्होंने कहा, “पीएम नरेंद्र मोदी हमारे सुझाव लागू करने के इच्छुक हैं।”
नीलेकणी समिति: 58 बैठकें, 50 हजार सुझाव; 28 अक्टूबर को रिपोर्ट संभव
नीट पेपर लीक के बाद 26 जुलाई को गठित समिति 18 आंतरिक और 40 परामर्श बैठकें कर चुकी है। इसे 50 हजार से ज्यादा सुझाव मिले हैं। रिपोर्ट 28 अक्टूबर को आ सकती है। प्रस्तावित बदलावों का असर एनटीए की परीक्षाएं देने वाले सालाना करीब 1.2 करोड़ अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है। नीलेकणी समिति नीट-यूजी 2027 को जेईई की तरह कई दिनों में 12–14 शिफ्ट में कंप्यूटर पर कराने की संभावना देख रही है। हालांकि, अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
देश में प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में बार-बार सामने आने वाले पेपर लीक के मामलों को हमेशा के लिए समाप्त करने के लिए भारत को प्रिंटेड प्रश्नपत्रों की व्यवस्था को पूरी तरह छोड़ना होगा। सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय परीक्षा सुधार समिति के प्रमुख और इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी ने नई दिल्ली में आयोजित ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम’ में यह बात कही।
नीलेकणी ने स्पष्ट किया कि भौतिक या प्रिंटेड प्रश्नपत्र ही समस्या की जड़ है। उन्होंने कहा: “सवाल यह उठता है कि हमें ‘एक निश्चित प्रश्नपत्र’ की आवश्यकता ही क्यों है? जैसे ही आपके पास एक तय प्रश्नपत्र होता है, वैसे ही बाजार में उसे बेचने और खरीदने का एक आर्थिक प्रलोभन (Economic Incentive) पैदा हो जाता है।” उनका मानना है कि यदि प्रश्नपत्र की अवधारणा को ही बदल दिया जाए, तो इसके लीक होने का बाजार अपने आप समाप्त हो जाएगा।
नीलेकणी का प्रस्तावित मॉडल: यह कैसे काम करेगा?
नीलेकणी के प्रस्ताव के अनुसार परीक्षा प्रणाली में बुनियादी और संरचनात्मक (Structural) बदलाव की आवश्यकता है:
[विशाल डिजिटल क्वेश्चन बैंक] ──► [AI / तकनीक द्वारा अंतिम मिनट में असेंबलिंग] ──► [कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT)]
(लाखों प्रश्नों का डिपो) (परीक्षा से ठीक पहले पेपर जनरेशन) (1.5 लाख+ परीक्षा केंद्र)
- विशाल क्वेश्चन बैंक (Massive Question Bank): एक ही प्रश्नपत्र छापने के बजाय प्रश्नों का एक अत्यंत व्यापक और सुरक्षित डिजिटल संग्रह तैयार किया जाएगा।
- अंतिम समय में पेपर जनरेशन (Last-Minute Paper Generation): आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक एल्गोरिदम का उपयोग करके परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले प्रश्नों को चुनकर पेपर तैयार किया जाएगा।
- लीक की संभावना समाप्त: जब पहले से कोई निश्चित प्रश्नपत्र अस्तित्व में ही नहीं रहेगा, तो उसे समय से पहले चुराने या बेचने का अवसर पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
- कंप्यूटर-आधारित परीक्षा (CBT): देश भर में पेन-पेपर आधारित परीक्षाओं की जगह कंप्यूटर-आधारित ऑनलाइन परीक्षाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
पृष्ठभूमि एवं कानूनी/प्रशासनिक इतिहास (Back Legal & Administrative History)
इस उच्च स्तरीय समिति के गठन और परीक्षा प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन की मांग के पीछे देश का हालिया घटनाक्रम जिम्मेदार है:
[3 मई: NEET-UG परीक्षा] ──► [12 मई: परीक्षा रद्द व CBI जांच] ──► [5 जून-जुलाई: देशव्यापी छात्र आंदोलन] ──► [25 जुलाई: शिक्षा मंत्री का इस्तीफा] ──► [जुलाई: नीलेकणी टास्क फोर्स गठित]
1. मई NEET-UG विवाद
3 मई 2026 को देश भर के 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के लिए राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) आयोजित की गई थी। हालांकि, 12 मई को जांच एजेंसियों द्वारा यह पाए जाने के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई कि परीक्षा से पहले ही एक “अनुमानित प्रश्नपत्र” (Guess Paper) लीक हुआ था, जो वास्तविक प्रश्नों से काफी मेल खाता था।
2. CBI जांच और गिरफ्तारियां
मामला सामने आते ही जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई। जांच के दौरान राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की पेपर-सेटिंग कमेटी के एक बायोलाजी लेक्चरर सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 21 जून को पुनः परीक्षा (Re-test) आयोजित की गई।
3. छात्र आंदोलन और राजनीतिक हलचल
5 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन सोशल मीडिया और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ जैसे छात्र समूहों के नेतृत्व में तेजी से पूरे देश में फैल गया। महीनों चले इस ऐतिहासिक आंदोलन के दबाव में 25 जुलाई को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
4. टास्क फोर्स का गठन
इस अभूतपूर्व संकट के समाधान और परीक्षा प्रणाली के पुनर्गठन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई में आधार (Aadhaar) प्रणाली के सूत्रधार नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया।
प्रमुख संकेतक (Key Indicators & Metrics)
परीक्षा प्रणाली में बदलाव की आवश्यकता और प्रस्तावित सुधारों के प्रमुख संकेतकों का विवरण नीचे तालिका में दिया गया है:
| क्रम | संकेतक (Indicator) | वर्तमान स्थिति (Current Status) | प्रस्तावित सुधार / लक्ष्य (Proposed Reform) |
| 1 | प्रश्नपत्र का प्रारूप | एकल निश्चित प्रिंटेड पेपर (Fixed Printed Paper) | अंतिम समय में AI जनरेटेड पेपर (Dynamic Question Bank) |
| 2 | परीक्षा का माध्यम | पेन और पेपर (OMR आधारित) | 100% कंप्यूटर-आधारित परीक्षण (CBT) |
| 3 | परीक्षा केंद्रों का दायरा | लगभग 1.5 लाख उपलब्ध स्थान | 1.5 लाख से अधिक व्यापक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क |
| 4 | सुरक्षा जोखिम | प्रिंटिंग, परिवहन और भंडारण के दौरान लीक की आशंका | डिजिटल एन्क्रिप्शन और जीरो-एडवांस लीक मॉडल |
| 5 | नीतिगत प्रतिबद्धता | प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई (घटना के बाद) | संरचनात्मक तकनीकी समाधान (Root-cause Solution) |
नीलेकणी का तकनीकी ट्रैक रिकॉर्ड (The Tech Architect)
नंदन नीलेकणी को भारत की सबसे जटिल और बड़े पैमाने की सार्वजनिक चुनौतियों को तकनीक के माध्यम से हल करने के लिए जाना जाता है:
- इंफोसिस (Infosys): भारतीय आईटी क्रांति के सह-संस्थापक।
- आधार (Aadhaar): भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में विश्व के सबसे बड़े बायोमेट्रिक पहचान कार्यक्रम का नेतृत्व किया।
- डिजिटल भुगतान (UPI/Digital Payments): भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नीलेकणी के अनुसार, बड़े पैमाने पर तकनीक को लागू करते समय उनका ध्यान हमेशा इस बात पर रहता है कि वह आम नागरिकों के लिए “जीत-जीत” (Win-Win) की स्थिति का निर्माण करे।

