Patna HC: पटना हाईकोर्ट की सिंगल बेंच जस्टिस जितेंद्र कुमार ने 27 अगस्त 2025 को कोडीन युक्त 40 बोतल कफ सिरप के पकड़े जाने पर NDPS एक्ट लागू करने का निर्देश दिया।
आरोपी की जमानत याचिका किया खारिज
हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने ऐसे ही एक मामले में पकड़े गए आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि जब्ती की गई दवा व्यावसायिक मात्रा (Commercial Quantity) में आती है और इस पर NDPS एक्ट, 1985 सख्ती से लागू होता है।
क्या है मामला?
एसएसबी को सूचना मिली थी कि एक चारपहिया वाहन नेपाल में नशीली दवाइयां ले जा रहा है। तलाशी में टाटा इंडिगो मैनजा (नंबर BaE 2295) से 100-100 मिली की 40 बोतलें बरामद हुईं, जिनमें कोडीन फॉस्फेट और ट्रिप्रोलिडिन हाइड्रोक्लोराइड मिला। आरोपी निलेंद्र कुमार करन उर्फ निलेंद्र और सह-आरोपी गिबन पटल को मौके से गिरफ्तार किया गया। मोबाइल व सिम कार्ड भी जब्त हुए।
आरोपी का पक्ष
झूठा फंसाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कफ सिरप में 2.5% से कम कोडीन है, इसलिए NDPS नहीं बल्कि Drugs & Cosmetics Act लागू होगा। तर्क दिया गया कि न्यूट्रल सब्सटेंस निकालकर देखें तो कोडीन की मात्रा व्यावसायिक नहीं है। कोई आपराधिक इतिहास नहीं और मार्च 2025 से जेल में बंद।
राज्य का तर्क
सरकार ने कहा कि- कोडीन एक Essential Narcotic Drug है और NDPS के दायरे में आता है। बिना अनुमति इसका कब्ज़ा अपराध है। दिल्ली हाईकोर्ट और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देकर कहा कि कफ सिरप में भी NDPS लागू होगा।
कोर्ट की दलीलें
NDPS की धारा 80 के अनुसार, यह कानून Drugs & Cosmetics Act से अलग और अतिरिक्त है। कोडीन आधारित दवाएं भी NDPS में नियंत्रित हैं, अनुमति के बिना रखने पर सज़ा तय है।
हीरा सिंह बनाम भारत सरकार (SC) के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मिश्रित पदार्थ में न्यूट्रल सब्सटेंस घटाकर नहीं, बल्कि पूरा वज़न गिना जाएगा। इसलिए 40 बोतलें व्यावसायिक मात्रा हैं।कोर्ट ने दोहराया: “NDPS मामलों में बेल का न मिलना नियम है और बेल मिलना अपवाद।”
Case Title: Nilendra Kumar Karan @ Nilendra v. The State of Bihar
Case Number: Criminal Miscellaneous No. 54100 of 2025
Bench: Justice Jitendra Kumar

