हाईकोर्ट का कड़ा आदेश और कानूनी प्रावधान
- सहमति की प्रक्रिया में देरी:अदालत को सूचित किया गया था कि यद्यपि कुछ प्रतिवादियों के साथ समझौता हो चुका है, लेकिन अभिनेता की ओर से रसद संबंधी कारणों (Logistical Issues) से इस पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर नहीं किए जा सके हैं।
- CPC और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की शक्तियों का प्रयोग:पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश जारी किया:“यदि समझौता नहीं होता है या अधूरा रहता है, और वादी (Plaintiff) किसी भी दावे या मुद्दे पर मुकदमे को आगे बढ़ाना चाहता है, तो वादी अगली सुनवाई की तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेगा। इससे अदालत को सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC), 1908 के आदेश X नियम 2 सहपठित आदेश V नियम 3 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA) की धारा 168 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करने में आसानी होगी।”
नई दिल्ली: किसी प्रख्यात हस्ती के व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights), नाम, छवि, आवाज और अद्वितीय विशेषताओं के व्यावसायिक दुरुपयोग के विरुद्ध दायर दीवानी मुकदमों (Civil Suits), मध्यस्थता के जरिए हो रहे समझौतों के औपचारिक निष्पादन में देरी, तथा सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) के तहत अदालत द्वारा वादी की व्यक्तिगत उपस्थिति तलब करने की शक्तियों पर दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है।
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की एकल पीठ ने यह आदेश पारित करते हुए वादी को कुछ प्रतिवादियों के साथ हुए समझौते की औपचारिक कागजी कार्रवाई पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय प्रदान किया। अदालत ने दो-टूक व्यवस्था दी कि यदि समझौता अधूरा रहता है या नहीं हो पाता है, तो अदालत द्वारा पक्षों से सीधे मौखिक प्रश्न पूछने के लिए अभिनेता की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य होगी। उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि यदि दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन शेष प्रतिवादियों के साथ विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान नहीं कर पाते हैं और मुकदमे को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें अगली सुनवाई पर अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित (Personally Present) होना पड़ेगा।
उच्च न्यायालय के प्रमुख विधिक निष्कर्ष एवं औपचारिक निर्देश
1. CPC के आदेश X नियम 2 और BSA 2023 की धारा 168 के तहत उपस्थिति अनिवार्य
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने अपने आदेश में दर्ज किया: “समझौता न होने या अपूर्ण समझौता रहने की स्थिति में, यदि वादी (अमिताभ बच्चन) किसी भी दावे या मुद्दे पर वाद को आगे बढ़ाना चाहता है, तो वादी सुनवाई की अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेगा। ताकि अदालत सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) के आदेश V नियम 3 के साथ पठित आदेश X नियम 2, तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA) की धारा 168 के तहत प्रदत्त अपनी शक्तियों का प्रभावी प्रयोग कर सके।”
2. रसद संबंधी (Logistical) अड़चनों के कारण समझौते पर हस्ताक्षर में देरी:
- सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया गया कि कुछ प्रतिवादियों के साथ समझौता (Settlement) तय हो चुका है, परंतु अभिनेता की ओर से कुछ व्यावहारिक/रसद संबंधी कारणों (Logistical Issues) से औपचारिक समझौता पत्र पर अभी तक हस्ताक्षर नहीं किए जा सके हैं।
- अदालत ने पक्षों को औपचारिक विलेख निष्पादित करने का समय देते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि यदि वे मुकदमे को अदालत में खींचना चाहते हैं, तो वादी केवल वकीलों के जरिए पेश होने की बजाय स्वयं अदालत के सवालों का सामना करे।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि: 2022 का व्यक्तित्व अधिकार वाद
- मुकदमे का आधार (वर्ष 2022):
- अमिताभ बच्चन ने वर्ष 2022 में कई व्यक्तियों और इंटरनेट संस्थाओं के खिलाफ अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा और स्थायी व्यादेश (Permanent Injunction) की मांग करते हुए वाद दायर किया था।
- आरोप था कि प्रतिवादी अभिनेता की आवाज (Voice), नाम (Amitabh Bachchan / AB / Big B), फोटो और ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) से जुड़े उनके ट्रेडमार्क विशेषताओं का उपयोग लॉटरी, टी-शर्ट, मोबाइल ऐप्स और भ्रामक विज्ञापनों में बिना अनुमति व्यावसायिक लाभ के लिए कर रहे थे।
- 25 नवंबर 2022 का एकतरफा अंतरिम आदेश (Ex-Parte Ad Interim Injunction):
- दिल्ली हाईकोर्ट ने 25 नवंबर 2022 को अभिनेता के पक्ष में एक व्यापक अंतरिम व्यादेश जारी किया था, जिसमें अज्ञात संस्थाओं (John Doe / Ashok Kumar) सहित प्रतिवादियों को उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, छवि या आवाज का किसी भी व्यावसायिक उपयोग से रोक दिया गया था।
- इसके अलावा दूरसंचार विभाग (DoT) और इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी मंत्रालय (MeitY) को ऐसे उल्लंघनकारी लिंक और डोमेन हटाने के निर्देश दिए गए थे।
- वर्तमान स्थिति:
- लंबे समय से चल रही कार्यवाही के दौरान पक्षकारों ने मध्यस्थता (Mediation) के जरिए विवाद को सुलझाने का विकल्प चुना। अधिकांश प्रतिवादियों के साथ समझौता वार्ता अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, लेकिन औपचारिक निष्पादन शेष है।
विधिक एवं प्रक्रियात्मक विश्लेषण: क्या कहता है कानून?
- सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) का आदेश X नियम 2 (पक्षकारों की मौखिक परीक्षा):
- आदेश X नियम 2 अदालत को यह शक्ति देता है कि वह मुकदमे के विवादित प्रश्नों (Issues) को स्पष्ट करने के लिए वाद के किसी भी पक्षकार (या उनके साथ उपस्थित ऐसे व्यक्ति जो सामग्री सवालों का जवाब देने में सक्षम हों) से व्यक्तिगत रूप से मौखिक पूछताछ कर सकती है। इसका उद्देश्य अनावश्यक कानूनी विवादों को खत्म करना या समझौते की वास्तविक संभावना तलाशना होता है।
- CPC का आदेश V नियम 3 (वादी या प्रतिवादी की व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश):
- अदालत यदि आवश्यक समझे तो वादी या प्रतिवादी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने का निर्देश दे सकती है, भले ही उनके अधिवक्ता रिकॉर्ड पर मौजूद हों।
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA) की धारा 168 (पूर्ववर्ती IEA धारा 165):
- यह प्रावधान न्यायाधीश को प्रासंगिक तथ्य खोजने या उनका उचित प्रमाण प्राप्त करने के लिए किसी भी पक्षकार या गवाह से कोई भी प्रश्न पूछने की व्यापक शक्ति प्रदान करता है।
- व्यक्तित्व अधिकार (Personality Rights / Right to Publicity):
- भारत में यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 (निजता का अधिकार) और सामान्य विधि (Common Law) के तहत संरक्षित है, जैसा कि डी.एल.एफ. यूनिवर्सल, सोनू निगम, और स्वयं अमिताभ बच्चन के पूर्ववर्ती अंतरिम आदेश में स्थापित किया गया है।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: अमिताभ बच्चन बनाम रजत नेगी व अन्य [CS(COMM) 819/2022 – वाणिज्यिक दीवानी वाद, दिल्ली उच्च न्यायालय]
- पीठ: न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव (एकल पीठ)
- आदेश की तिथि: 9 अक्टूबर 2026
- विधिक प्रतिनिधित्व:
- वादी (अमिताभ बच्चन) की ओर से: अधिवक्ता ध्रुव आनंद, धनंजय खन्ना एवं नव्या वर्मा
- संबद्ध मूल अंतरिम व्यादेश: 25 नवंबर 2022 (न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ द्वारा पारित)
- प्रासंगिक कानून एवं प्रक्रियात्मक धाराएं:
- सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) का आदेश X नियम 2 एवं आदेश V नियम 3
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA) की धारा 168 (न्यायाधीश की प्रश्न पूछने की शक्ति)
- व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 (ट्रेडमार्क उल्लंघन एवं व्यक्तित्व अधिकारों का हनन)
- वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम, 2015
- वर्तमान स्थिति: अदालत ने समझौते की औपचारिकताएं पूरी करने हेतु समय दिया; यदि समझौता नहीं होता है और वाद गुण-दोष पर चलाया जाता है, तो अमिताभ बच्चन को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष पेश होना अनिवार्य होगा।
Personality Right: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव) |
| याचिकाकर्ता | अमिताभ बच्चन (वरिष्ठ वकीलों की टीम द्वारा प्रतिनिधित्व) |
| संबंधित कानून | CPC 1908 का आदेश X नियम 2 व आदेश V नियम 3; BSA 2023 की धारा 168 |
| मूल विवाद | नाम, आवाज, चेहरा और व्यक्तित्व अधिकारों के अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग पर रोक |
| ताज़ा आदेश | यदि समझौता निष्पादित नहीं होता है, तो अगली सुनवाई पर अमिताभ बच्चन को स्वयं कोर्ट में उपस्थित होना होगा। |

