Wednesday, November 4, 2026
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PIL news: दिल्ली सरकार में मंत्रियों की संख्या बढ़ाएं…हाईकोर्ट बोला-क्या आपको अधिक लोगों की जरूरत है या अधिक कुशल लोगों की?

PIL news: दिल्ली हाईकोर्ट में दिल्ली सरकार में मंत्रियों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है।

दिल्ली में मंत्रियों की संख्या अभी भी सात तक सीमित है…

न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की और पूछा कि क्या याचिका में भेदभाव का आरोप है, यह पूछते हुए, क्या आपको अधिक लोगों की जरूरत है या अधिक कुशल लोगों की? याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि दिल्ली में मंत्रियों की संख्या अभी भी सात तक सीमित है, जबकि सरकार 38 मंत्रालयों और 40 विभागों का संचालन कर रही है। विधानसभा में 70 निर्वाचित विधायक हैं। इसके अलावा, पिछले 35 वर्षों में दिल्ली की जनसंख्या चार गुना बढ़ गई है, फिर भी मंत्रियों की संख्या जस की तस बनी हुई है, जिससे प्रशासनिक दक्षता को लेकर चिंता जताई गई है।

दिल्ली का शासन ढांचा शक्तियों के बंटवारे पर आधारित है

मुख्य न्यायाधीश ने दिल्ली की विशिष्ट संवैधानिक स्थिति पर विचार करते हुए कहा कि चूंकि दिल्ली का शासन ढांचा शक्तियों के बंटवारे पर आधारित है, इसलिए इसकी तुलना अन्य राज्यों से करना उचित नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी सवाल किया कि अनुच्छेद 14, जो समानता की गारंटी देता है, इस मामले में कैसे लागू होगा। न्यायालय ने यह भी कहा कि संवैधानिक प्रावधानों को केवल सीमित आधारों पर ही चुनौती दी जा सकती है, और मात्र उनका अस्तित्व ही उन्हें संवैधानिक नहीं बनाता। GNCTD की ओर से स्थायी अधिवक्ता समीर वशिष्ठ ने प्रस्तुत किया कि दिल्ली सरकार इस मुद्दे की जांच करेगी। न्यायालय ने इस मामले की गंभीरता को स्वीकारते हुए फिलहाल कोई नोटिस जारी नहीं किया, लेकिन आगे की सुनवाई आवश्यक बताई और इस मामले की अगली तारीख 28 जुलाई तय की।

सामाजिक कार्यकर्ता आकाश गोयल ने दायर की जनहित याचिका

यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता आकाश गोयल द्वारा दायर की गई है, जिसमें 1991 के उनहत्तरवें संशोधन अधिनियम की धारा 2(4) और परिणामस्वरूप बने अनुच्छेद 239AA की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि विधान सभा के सदस्यों के 10% तक मंत्रिपरिषद को सीमित करना मनमाना, भेदभावपूर्ण और संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन है, जो विशेष रूप से संघवाद, लोकतांत्रिक शासन और प्रशासनिक दक्षता को प्रभावित करता है।

अनुच्छेद 239AA में संशोधन की मांग की गई

याचिका में अनुच्छेद 239AA में संशोधन की मांग की गई है, जिससे दिल्ली और अन्य राज्यों के बीच मंत्री प्रतिनिधित्व में समानता सुनिश्चित की जा सके, जैसा कि अनुच्छेद 164(1A) में निहित है। याचिकाकर्ता का कहना है कि मंत्रियों की संख्या बढ़ाना प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने, उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने और दिल्ली की जनता के लिए लोकतंत्र, संघवाद और सुशासन के सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

मंत्रिमंडल की संख्या पर 10% की सीमा मनमानी और अनुचित

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कुमार उत्कर्ष और राहुल सागर सहाय ने पैरवी की। उन्होंने तर्क दिया कि मंत्रिमंडल की संख्या पर 10% की सीमा मनमानी और अनुचित है। अनुच्छेद 239AA, जिसे 1991 के उनहत्तरवें संविधान संशोधन अधिनियम के तहत जोड़ा गया था, मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की संख्या को विधानसभा के कुल सदस्यों के 10% तक सीमित करता है। इससे पहले भी सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली में शासन को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया है।

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