Railway Employee: केंद्रीय कर्मचारियों की पारिवारिक पेंशन और ‘परिवार’ की कानूनी व्याख्या को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और स्पष्ट विधिक निर्णय सुनाया है।
केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के पुराने आदेश को रद्द करने की यह है वजह
हाईकोर्ट के जस्टिस एस. एम. सुब्रमण्यम और जस्टिस एन. सेंथिलकुमार की खंडपीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के उस पुराने आदेश को पूरी तरह से रद्द (Set Aside) कर दिया है, जिसमें एक मृतक रेलवे कर्मचारी के सौतेले बेटे को पेंशन देने का निर्देश दिया गया था। रेलवे सेवा (पेंशन) नियम, 1993 के तहत कोई भी सरकारी कर्मचारी अपनी ग्रेच्युटी (Gratuity) प्राप्त करने के लिए किसी भी व्यक्ति को नामांकित (Nominate) कर सकता है। लेकिन जब बात ‘पारिवारिक पेंशन’ (Family Pension) की आती है, तो यह कड़ाई से केवल उसी व्यक्ति को दी जा सकती है जो पेंशन नियमों के तहत ‘परिवार’ (Family) की वैधानिक परिभाषा में फिट बैठता हो। चूंकि रेलवे पेंशन नियमों के तहत परिवार की परिभाषा में सौतेले बेटे (Stepson) को शामिल नहीं किया गया है, इसलिए वह फैमिली पेंशन का दावा नहीं कर सकता।
मामला क्या है?: ग्रेच्युटी मिली तो पेंशन पर भी ठोक दिया दावा
यह पूरा विवाद दक्षिण रेलवे (Southern Railway) के एक मृत कर्मचारी के आश्रित को मिलने वाले वित्तीय लाभों की कानूनी पात्रता से जुड़ा है।
कर्मचारी की मृत्यु: जी. कलैसेल्वी नामक महिला दक्षिण रेलवे में ‘पॉइंट्समैन’ के पद पर कार्यरत थीं और 24 सितंबर, 2008 को सेवाकाल के दौरान उनका निधन हो गया था।
सौतेले बेटे का दावा: उनकी मृत्यु के बाद उनके सौतेले बेटे जी. चेंगलन ने रेलवे से पारिवारिक पेंशन और ग्रेच्युटी की मांग की। रेलवे ने चेंगलन को ग्रेच्युटी की राशि तो दे दी, लेकिन सौतेला बेटा होने के कारण फैमिली पेंशन देने से इनकार कर दिया।
CAT का आदेश (2023): रेलवे द्वारा पेंशन न दिए जाने के खिलाफ चेंगलन ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) का दरवाजा खटखटाया। कैट (CAT) ने 7 जून, 2023 को मानवीय आधार और परिस्थितियों को देखते हुए सौतेले बेटे के पक्ष में फैसला सुनाया और रेलवे को उसे पेंशन देने का आदेश दे दिया।
रेलवे की दलील: “नियम 70 और नियम 75 में जमीन-आसमान का अंतर”
कैट (CAT) के इस आदेश के खिलाफ दक्षिण रेलवे ने मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दायर की। रेलवे की ओर से वरिष्ठ पैनल वकील ए. आर. शक्तिवेल ने अदालत के सामने रेलवे पेंशन नियमों का तकनीकी और विधिक ढांचा स्पष्ट किया।
ग्रेच्युटी और पेंशन के नियम अलग: रेलवे ने दलील दी कि मृतक कलैसेल्वी की ग्रेच्युटी का निपटारा ‘रेलवे सेवा (पेंशन) नियम, 1993’ के नियम 70 के तहत किया गया था। नियम 70 कर्मचारी को यह पूरी छूट देता है कि वह अपनी ग्रेच्युटी के लिए किसी भी व्यक्ति (चाहे वह परिवार का हिस्सा हो या न हो) को नॉमिनी बना सकता है। चेंगलन नॉमिनी था, इसलिए उसे ग्रेच्युटी दे दी गई।
नियम 75 की बंदिशें: लेकिन पारिवारिक पेंशन नियम 75 के तहत शासित होती है। नियम 75 के तहत ‘परिवार’ की एक अत्यंत सीमित और स्पष्ट कानूनी परिभाषा दी गई है, जिसमें किसी भी रूप में ‘सौतेले बेटे’ (Stepson) का कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए ग्रेच्युटी मिलने का मतलब यह कतई नहीं है कि पेंशन पर भी हक बन गया।
हाई कोर्ट का फैसला: कानून भावनाओं से नहीं, नियमों से चलता है
मद्रास हाई कोर्ट की खंडपीठ ने दक्षिण रेलवे के कानूनी तर्कों को पूरी तरह सही माना। जजों ने साफ किया कि कोर्ट अपनी मर्जी से नियमों की परिभाषा को खींचकर बड़ा नहीं कर सकता। अदालत ने अपने फैसले में नोट किया कि रेलवे पेंशन नियम के नियम 75 के अनुसार, ‘परिवार’ शब्द के दायरे में केवल ये लोग ही आते हैं, इनमें कानूनी रूप से विवाहित पति या पत्नी (Spouse), कुछ विशेष परिस्थितियों में न्यायिक रूप से अलग रह रहे पति/पत्नी (Judicially Separated Spouse) और सगे या कानूनी रूप से गोद लिए बच्चे (Children) जो नियमों में निर्धारित आयु और पात्रता की शर्तों को पूरा करते हों। चूंकि इस पूरी सूची में कहीं भी ‘सौतेला बेटा’ शब्द शामिल नहीं है, इसलिए चेंगलन को पेंशन नहीं दी जा सकती। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने दक्षिण रेलवे की याचिका को स्वीकार करते हुए कैट (CAT) के आदेश को पूरी तरह से खारिज (Quash) कर दिया।
केस शीट: मद्रास उच्च न्यायालय निर्णय (2026)
| कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियां | उच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और निर्णय |
| संबंधित अदालत | मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस एस. एम. सुब्रमण्यम और जस्टिस एन. सेंथिलकुमार |
| मामले का शीर्षक | यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रजिस्ट्रार (Union of India Vs Registrar) |
| याचिकाकर्ता संस्थान | दक्षिण रेलवे (Southern Railway) |
| लागू विधिक नियम | रेलवे सेवा (पेंशन) नियम, 1993 का नियम 70 (ग्रेच्युटी) और नियम 75 (फैमिली पेंशन) |
| अदालत का अंतिम आदेश | कैट (CAT) का आदेश रद्द; सौतेला बेटा रेलवे नियमों के तहत फैमिली पेंशन पाने का हकदार नहीं है। |

