Sunday, August 23, 2026
HomeLaw Firms & Assoc.Supreme Strike: तारीख मिलेगी या नहीं, यह हम तय करेंगे आप (अधिवक्तागण)...

Supreme Strike: तारीख मिलेगी या नहीं, यह हम तय करेंगे आप (अधिवक्तागण) नहीं…दो टूक-एडजर्नमेंट स्लिप का मतलब ऑटोमैटिक पास नहीं

Supreme Strike: देश की अदालतों में ‘तारीख पर तारीख’ की संस्कृति और मुकदमों के बेवजह लटकने की प्रवृत्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है।

हमेशा मामले में बहस करने के लिए पूरी तैयारी के साथ ही अदालत आएं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने वकीलों को एक कड़ा और स्पष्ट संदेश देते हुए साफ किया कि अदालत की कार्यवाही वकीलों की आपसी सहमति या सहूलियत से नहीं, बल्कि न्यायिक विवेक और कानून के शासन से चलती है। अदालत में किसी मामले को स्थगित (Adjourn) करना है या नहीं, इसका अंतिम और एकमात्र फैसला सिर्फ कोर्ट ही कर सकता है। वकील ‘एडजर्नमेंट स्लिप’ (स्थगन पर्ची) को मामले को आगे बढ़ाने का कोई ‘ऑटोमैटिक पास’ (Automatic Pass) समझने की भूल न करें। भले ही विपक्षी दल की ओर से स्थगन की अर्जी दी गई हो, वकीलों को हमेशा मामले में बहस करने के लिए पूरी तैयारी के साथ ही अदालत आना होगा।

मामला क्या है?: ‘विपक्षी ने पर्ची दी है, इसलिए तैयारी नहीं की’

सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान यह स्थिति तब पैदा हुई जब एक वकील ने अदालत के सामने दलील दी कि चूंकि इस मामले में प्रतिवादी (Respondent) पक्ष की ओर से पहले ही एक ‘एडजर्नमेंट स्लिप’ (सुनवाई टालने की लिखित अर्जी) सर्कुलेट की जा चुकी है, इसलिए इस मामले को आज आगे नहीं बढ़ाया जा सकता या इस पर विचार नहीं किया जाना चाहिए। इस दलील पर जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने बेहद कड़ा ऐतराज जताया और पूरी बार (वकीलों के समुदाय) के लिए एक बड़ा विधिक सिद्धांत और संदेश जारी किया।

सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणियां: “वकीलों को संदेश”

जस्टिस अमानुल्लाह ने वकील को टोकते हुए बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा, कृपया ध्यान दें काउंसिल। यह पूरी तरह से हमारे (अदालत के) ऊपर निर्भर करता है कि हम स्थगन (Adjournment) की अनुमति देते हैं या नहीं। आपको हमेशा पूरी तैयारी के साथ आना होगा और बहस करनी होगी। अगर हम अनुमति देंगे, केवल तभी मामला स्थगित माना जाएगा। यह बार (Bar) के लिए हमारा एक सीधा संदेश है।

“आज भी तो एक दिन है”

जब सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख को देखकर याचिकाकर्ता के वकील ने हड़बड़ाहट में अदालत से मामले को किसी और दिन के लिए सूचीबद्ध (List) करने का अनुरोध किया, तो खंडपीठ ने शुरुआत में संकेत दिया कि वे इस मामले को छोड़ेंगे नहीं, बल्कि आज के बोर्ड (दैनिक कार्यसूची) के अंत में दोबारा सुनेंगे। हालांकि, जब वकील ने दोबारा विनती की कि इसे आज के बजाय किसी अन्य दिन ही टाल दिया जाए, तो जस्टिस अमानुल्लाह ने वकीलों के टालमटोल वाले रवैये पर एक गहरी टिप्पणी करते हुए कहा, आज भी तो एक दिन है।” (Today also is a day.)।

अदालत का अंतिम निर्देश

हालांकि, वकीलों के बार-बार किए गए अनुरोध और परिस्थितियों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच अंततः मामले को टालने पर सहमत हो गई। लेकिन कोर्ट ने अपनी नाराजगी और संदेश को रिकॉर्ड पर लाते हुए निर्देश दिया कि इस मामले को अगले सप्ताह (Next Week) सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने वकीलों को अगली बार बिना तैयारी के न आने की सख्त हिदायत दी।

केस शीट: सुप्रीम कोर्ट विधिक रुख (2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांसर्वोच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और संदेश
संबंधित अदालतसुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया (Supreme Court)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन
मुख्य विषयमुकदमों को टालने के लिए ‘एडजर्नमेंट स्लिप’ का वकीलों द्वारा किया जाने वाला दुरुपयोग।
अदालत का सिद्धांतस्थगन कोई अधिकार नहीं बल्कि कोर्ट का विशेषाधिकार है; वकीलों को हमेशा बहस के लिए तैयार रहना होगा।
अंतिम आदेशमामले को केवल एक सप्ताह के लिए टाला गया; बार को कड़ा संदेश जारी।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
29 ° C
29 °
29 °
89 %
2.1kmh
100 %
Sun
36 °
Mon
36 °
Tue
36 °
Wed
33 °
Thu
32 °

Recent Comments