Sunday, September 20, 2026
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Rape Case: समाज में झूठे रेप केस के बाद शिकायत वापसी का ट्रेंड समाज में बढ़ा, क्यूं की हाईकोर्ट ने टिप्पणी

Rape Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक रेप केस को शादी के आधार पर रद्द करने से इनकार कर दिया है।

एफआईआर रद्द करना आपराधिक न्याय व्यवस्था के दुरुपयोग को बढ़ावा

29 अप्रैल को दिए फैसले में जस्टिस गिरीश कठपालिया ने कहा, अगर शिकायत सही है, तो पीड़िता को आरोपी से शादी करने के लिए मजबूर करने की बजाय राज्य को उसे सम्मानजनक जीवन देने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इसमें भोजन, आश्रय और कपड़े जैसी मूलभूत जरूरतें शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि झूठे रेप केस दर्ज कराकर बाद में शिकायत वापस लेने का ट्रेंड समाज में बढ़ रहा है, जिससे असली पीड़ितों को गंभीर अन्याय होता है। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर यह शिकायत झूठी साबित होती है, तो इस स्टेज पर एफआईआर रद्द करना आपराधिक न्याय व्यवस्था के दुरुपयोग को बढ़ावा देगा।

अप्राकृतिक यौन संबंध के लिए मजबूर करता था आरोपी

एक महिला की शिकायत ने आरोप लगाया कि उसका पड़ोसी पहले उसे रेप और अप्राकृतिक यौन संबंध के लिए मजबूर करता रहा और आपत्तिजनक तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल करता रहा। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी का जीजा, जो इस केस में दूसरा याचिकाकर्ता है, उसने भी उसका यौन शोषण किया।

शादी के बाद एफआईआर रद्द करने की मांग

दोनों आरोपियों ने कोर्ट से एफआईआर रद्द करने की मांग की। उनका तर्क था कि मुख्य आरोपी ने शिकायतकर्ता महिला से शादी कर ली है। लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया और कहा कि यह मामला कोर्ट की प्रक्रिया के दुरुपयोग जैसा नहीं लगता और न ही इसे रद्द करना न्याय के हित में होगा।

गवाही में पलटी तो भी होगी जांच

कोर्ट ने कहा कि अगर ट्रायल के दौरान महिला अपने बयान से पलटती है, तो अभियोजन पक्ष उसकी गवाही की जांच करेगा और अगर शिकायत झूठी पाई गई, तो उसके अनुसार कार्रवाई होगी।

झूठे केसों से असली पीड़ितों को नुकसान

कोर्ट ने कहा कि झूठे केसों से न सिर्फ न्याय व्यवस्था पर अनावश्यक बोझ पड़ता है, बल्कि इससे यह धारणा बनती है कि असली शिकायतें भी झूठी हैं। इससे असली रेप पीड़ितों को गंभीर नुकसान होता है।

सामान्य प्रेम प्रसंग का मामला नहीं

कोर्ट ने यह भी कहा कि यह कोई सामान्य प्रेम प्रसंग का मामला नहीं है, जिसमें शादी का झांसा देकर संबंध बनाए गए हों। सच्चाई का पता ट्रायल के दौरान ही चलेगा।

चार्जशीट से 10 दिन पहले हुई थी शादी

रिकॉर्ड में सामने आया कि चार्जशीट दाखिल होने से करीब 10 दिन पहले दोनों पक्षों की शादी हुई थी। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या पीड़िता को उसके ही उत्पीड़न-कर्ता के साथ शादी के रिश्ते में धकेलना उचित है?

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