Recruitment Row: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश में ड्रग इंस्पेक्टर (Drug Inspector) की भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक व्यवस्था दी है।
अनुभव (Experience) की अतिरिक्त शर्तें अनिवार्यता का मामला
हाईकोर्ट के जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मनजीब शुक्ला की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार के ‘भर्ती नियमावली 2015’ के उस हिस्से को असंवैधानिक करार दिया है, जिसमें ड्रग इंस्पेक्टर के पद के लिए अनुभव (Experience) की अतिरिक्त शर्तें अनिवार्य की गई थीं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब किसी विषय पर केंद्र सरकार ने पहले ही कानून बना दिया हो, तो राज्य सरकार उसमें अपनी ओर से अतिरिक्त योग्यताएं या शर्तें नहीं जोड़ सकती।
मामला क्या था? (The Legal Conflict)
- राज्य का नियम: यूपी खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने 2015 के संशोधनों (नियम 8) के तहत ड्रग इंस्पेक्टर पद के लिए केंद्र द्वारा निर्धारित योग्यताओं के अलावा कुछ अतिरिक्त अनुभव की शर्तें जोड़ दी थीं।
- चुनौती: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की एक विशेष अपील और उम्मीदवारों की रिट याचिकाओं के माध्यम से इन नियमों को चुनौती दी गई थी। उम्मीदवारों का तर्क था कि वे केंद्र के नियमों के अनुसार योग्य हैं, लेकिन राज्य की अतिरिक्त शर्तों के कारण बाहर हो रहे हैं।
कोर्ट का फैसला: ‘Doctrine of Occupied Field’ का हवाला
- अदालत ने अपने फैसले में केंद्र और राज्य के कानूनी अधिकारों के बीच संतुलन को स्पष्ट किया।
- केंद्रीय कानून सर्वोपरि: ड्रग इंस्पेक्टर की योग्यताएं पहले से ही Drugs and Cosmetics Act, 1940 और Rules, 1945 के तहत केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित हैं।
- कब्जे वाले क्षेत्र का सिद्धांत (Occupied Field): कोर्ट ने कहा कि चूंकि इस विषय पर केंद्र ने व्यापक कानून बनाया है, इसलिए राज्य सरकार का इसमें हस्तक्षेप करना “असंवैधानिक” है। राज्य ऐसे नियम नहीं बना सकता जो केंद्रीय कानून के विपरीत हों या उसमें अतिरिक्त बोझ बढ़ाते हों।
- भविष्य के लिए निर्देश: कोर्ट ने आदेश दिया कि भविष्य में होने वाली सभी भर्तियाँ केवल केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित योग्यताओं के आधार पर ही की जाएं।
पुरानी भर्तियों और नए उम्मीदवारों पर असर
- कोर्ट ने एक बीच का रास्ता अपनाते हुए मानवीय दृष्टिकोण भी रखा।
- पुरानी भर्तियाँ बरकरार: अदालत ने पिछली भर्तियों को रद्द करने से इनकार कर दिया। तर्क दिया गया कि जो लोग पहले चुने जा चुके हैं, उनके पास केंद्र द्वारा निर्धारित बुनियादी योग्यताएं हैं और वे कई वर्षों से सेवा में हैं, इसलिए उन्हें हटाना उचित नहीं होगा।
- 2025 की भर्ती में मौका: कोर्ट ने राहत देते हुए कहा कि जो उम्मीदवार पहले राज्य की इन अतिरिक्त शर्तों के कारण अयोग्य हो गए थे, उन्हें 2025 की वर्तमान चयन प्रक्रिया में आवेदन करने का मौका दिया जाए।
फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| बिंदु | विवरण |
| रद्द किया गया नियम | यूपी ड्रग सर्विस (तीसरा संशोधन) नियम, 2015 का नियम 8। |
| संवैधानिक तर्क | केंद्र का कानून राज्य के नियमों पर भारी पड़ेगा (Article 254)। |
| राहत | 2025 की भर्ती प्रक्रिया में नए उम्मीदवारों को आवेदन का अवसर। |
| संदेश | तकनीकी और पेशेवर पदों पर योग्यता के मानक पूरे देश में एक समान होने चाहिए। |
संघीय ढांचे की जीत
यह फैसला न केवल ड्रग इंस्पेक्टर के उम्मीदवारों के लिए बड़ी जीत है, बल्कि यह केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के बंटवारे को भी स्पष्ट करता है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि उत्तर प्रदेश में अब ड्रग इंस्पेक्टर की भर्ती के मानक वही होंगे जो पूरे भारत में लागू हैं, जिससे चयन प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता आएगी।

