HomeBREAKING INDIASC News: राष्ट्रपति को लेकर भी समय-सीमा अपडेट… बिल पर हां या...

SC News: राष्ट्रपति को लेकर भी समय-सीमा अपडेट… बिल पर हां या ना 3 महीने में तय करने होंगे

SC News: सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार विधानसभा से पारित विधेयकों पर राष्ट्रपति स्तर पर कार्रवाई करने की समय-सीमा तय की है।

415 पृष्ठों का निर्णय किया अपलोड…

11 अप्रैल की रात 10:54 बजे कोर्ट की वेबसाइट पर 415 पृष्ठों का यह निर्णय अपलोड किया गया। इसमें शीर्ष कोर्ट ने कहा, राज्यपाल द्वारा विधेयकों द्वारा राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखे गए विधेयकों पर राष्ट्रपति को उस तारीख से तीन महीने की अवधि के भीतर निर्णय लेना होगा, जिस दिन यह संदर्भ प्राप्त होता है। तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि द्वारा राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखे गए 10 विधेयकों को मंजूरी देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के चार दिन बाद और सभी राज्यपालों के लिए विधानसभा से पारित विधेयकों पर कार्रवाई करने की समयसीमा तय करने के बाद यह निर्णय अपलोड किया गया।

गृह मंत्रालय द्वारा निर्धारित समयसीमा को उपयुक्त मानते हैं

कोर्ट ने कहा, हम गृह मंत्रालय द्वारा निर्धारित समयसीमा को उपयुक्त मानते हैं… और यह निर्देश देते हैं कि राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखे गए विधेयकों पर राष्ट्रपति को प्राप्ति की तारीख से तीन महीने के भीतर निर्णय लेना अनिवार्य है। यदि इस अवधि से अधिक विलंब होता है, तो इसके लिए उचित कारण दर्ज करना और संबंधित राज्य को सूचित करना आवश्यक होगा। राज्यों को भी सहयोगात्मक रुख अपनाना चाहिए और केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए प्रश्नों का उत्तर देना और सुझावों पर शीघ्रता से विचार करना चाहिए।

8 अप्रैल को पीठ ने जारी किया आदेश

8 अप्रैल को न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और आर. महादेवन की पीठ ने दूसरी बार राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखे गए 10 विधेयकों को असंवैधानिक और विधि में त्रुटिपूर्ण मानते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा, जहां राज्यपाल किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखते हैं और राष्ट्रपति उसे अस्वीकृत कर देते हैं, तब राज्य सरकार को इस प्रकार की कार्रवाई को इस न्यायालय में चुनौती देने का अधिकार प्राप्त है।

अत्यधिक लंबे समय तक विधेयक लंबित रखने की दुर्भावना…

संविधान का अनुच्छेद 200 राज्यपाल को विधेयकों को स्वीकृति देने, अस्वीकृति करने या राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखने का अधिकार देता है। कोर्ट ने कहा, “विधेयकों को अत्यधिक लंबे समय तक राज्यपाल के पास लंबित रखने और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पंजाब राज्य मामले में निर्णय के तुरंत बाद उन्हें राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखने की दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई को देखते हुए, माना जाता है कि राज्यपाल ने उन्हें उसी दिन स्वीकृत कर दिया था जिस दिन वे पुनर्विचार के बाद उनके समक्ष प्रस्तुत किए गए थे।

राज्यपाल अनुच्छेद 200 के तहत समयसीमा का पालन नहीं करते, तो न्यायिक समीक्षा संभव

संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल की जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए कोई स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित नहीं है। फिर भी, अनुच्छेद 200 को इस तरह नहीं पढ़ा जा सकता, जिससे राज्यपाल विधेयकों पर कार्रवाई न करें और इस प्रकार राज्य में कानून बनाने की प्रक्रिया को बाधित करें। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्यपाल को मंत्रिपरिषद की सलाह का पालन करना अनिवार्य है और यदि कोई विधेयक दूसरी बार पुनः प्रस्तुत किया गया हो, तो उसे राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि राज्यपाल अनुच्छेद 200 के तहत समयसीमा का पालन नहीं करते, तो उनके निष्क्रिय व्यवहार की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।

तीन महीने के भीतर एक संदेश के साथ विधेयक वापस करे

शीर्ष कोर्ट ने बताया, यदि राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह पर किसी विधेयक को अस्वीकृत करते हैं या राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखते हैं, तो यह कार्रवाई तुरंत, अधिकतम एक महीने की अवधि में करनी होगी। यदि राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह के विपरीत विधेयक को अस्वीकृत करते हैं, तो उन्हें तीन महीने के भीतर एक संदेश के साथ विधेयक वापस करना होगा। राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखने के मामले में भी यही अधिकतम तीन महीने की सीमा लागू होगी। पुनर्विचार के बाद प्रस्तुत विधेयक पर राज्यपाल को तुरंत, अधिकतम एक महीने के भीतर स्वीकृति प्रदान करनी होगी।

कोई संवैधानिक प्राधिकारी अपने अधिकारों का मनमाना उपयोग नहीं कर सकता

कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल पूर्ण वीटो या पॉकेट वीटो की अवधारणा नहीं अपना सकते। अनुच्छेद 201 के तहत राष्ट्रपति के पास पॉकेट वीटो या पूर्ण वीटो का कोई विकल्प नहीं है। घोषणा करेगा शब्द का प्रयोग इसे अनिवार्य बनाता है कि राष्ट्रपति दो विकल्पों स्वीकृति देना या अस्वीकृति देना में से एक का चयन करें। संविधान की व्यवस्था यह नहीं कहती कि कोई संवैधानिक प्राधिकारी अपने अधिकारों का मनमाना उपयोग कर सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 142 के तहत अपने पूर्णाधिकार का प्रयोग करते हुए तमिलनाडु राज्यपाल को पुनः प्रस्तुत विधेयकों को पारित माने जाने का आदेश दिया।

राज्यपाल की समय-सीमा पहले शीर्ष कोर्ट ने तय की थी

इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार और राज्यपाल के बीच विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर स्वीकृति में देरी के विवाद में सवाल तय किए थे। राज्यपाल द्वारा विधेयकों की स्वीकृति में देरी के कारण, राज्य सरकार ने 2023 में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसमें कहा गया कि 12 विधेयक, जिनमें एक 2020 का था, उनके पास लंबित थे। 13 नवंबर 2023 को राज्यपाल ने 10 विधेयकों को अस्वीकृत करने की घोषणा की, जिसके बाद विधानसभा ने 18 नवंबर को एक विशेष सत्र बुलाकर उन्हीं विधेयकों को फिर से पारित किया। बाद में इनमें से कुछ विधेयकों को राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखा गया।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
haze
29 ° C
29 °
29 °
65 %
3.6kmh
75 %
Tue
35 °
Wed
38 °
Thu
39 °
Fri
40 °
Sat
34 °

Recent Comments