Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी किया कि NDPS एक्ट के तहत दर्ज मामलों में अग्रिम जमानत नहीं दी जाती।
आरोपी ट्रायल कोर्ट में सरेंडर कर सकता है
कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें एक आरोपी को अग्रिम जमानत देने से मना किया गया था। यह मामला DINESH CHANDER बनाम STATE OF HARYANA (SLP(Crl) No. 9540/2025) के तहत सुप्रीम कोर्ट में आया था। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा, “हमें हाईकोर्ट के फैसले में कोई गलती नजर नहीं आती। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी ट्रायल कोर्ट में सरेंडर कर सकता है और नियमित जमानत की अर्जी दे सकता है, जिसे कानून के अनुसार देखा जाएगा।
60 किलो डोडा पोस्त और 1.8 किलो अफीम की बरामदगी
प्रॉसिक्यूशन के मुताबिक, आरोपी का नाम सह-आरोपियों के बयान में सामने आया था। इन सह-आरोपियों के पास से 60 किलो डोडा पोस्त और 1 किलो 800 ग्राम अफीम बरामद हुई थी। सह-आरोपियों ने आरोपी को नशे की सप्लाई करने वाला बताया था।
कॉमर्शियल मात्रा की बरामदगी, कस्टडी में पूछताछ जरूरी: राज्य
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि बरामद माल कमर्शियल मात्रा में आता है, इसलिए NDPS एक्ट की धारा 37 लागू होती है। साथ ही आरोपी से कस्टडी में पूछताछ जरूरी है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।
FIR में नाम नहीं, लेकिन कॉल रिकॉर्ड और बैंक ट्रांजैक्शन मौजूद
आरोपी ने दावा किया कि उसे झूठा फंसाया गया है और उसका नाम FIR में नहीं है। लेकिन हाईकोर्ट ने पाया कि सह-आरोपियों ने उसे सप्लायर बताया है। इसके अलावा आरोपी और सह-आरोपियों के बीच कॉल रिकॉर्ड और बैंक ट्रांजैक्शन भी मौजूद हैं। इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
NDPS मामलों में अग्रिम जमानत पर पहले भी जताई थी चिंता
पिछले साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने NDPS केस में अग्रिम जमानत दिए जाने पर हैरानी जताई थी। जस्टिस बीआर गवई (अब CJI), अरविंद कुमार और केवी विश्वनाथन की बेंच ने पश्चिम बंगाल सरकार से कहा था कि वह अग्रिम जमानत रद्द करने की अर्जी पर विचार करे। कोर्ट ने कहा था—”NDPS मामलों में अग्रिम जमानत देना गंभीर मामला है।
टैपेंटाडोल केस में मिली थी राहत
हालांकि इस साल अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य NDPS केस में अग्रिम जमानत दी थी। आरोपी के पास टैपेंटाडोल हाइड्रोक्लोराइड की गोलियां मिली थीं, जो एक दर्द निवारक दवा है। कोर्ट ने कहा कि यह NDPS एक्ट की अनुसूची में शामिल नहीं है, इसलिए इसे साइकोट्रॉपिक पदार्थ नहीं माना जा सकता।

