Appointing candidates: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरियों में फर्जीवाड़ा करने वाले उम्मीदवारों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है।
उम्मीदवार 5 साल की सेवा का हवाला देकर राहत नहीं मांग सकते
अदालत ने कहा है कि यदि कोई उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में अनुचित लाभ लेने के लिए जानबूझकर आवेदन फॉर्म में अपने अंक (Marks) बढ़ाकर लिखता है, तो उसकी नियुक्ति मौलिक रूप से अवैध (Fundamentally Illegal) मानी जाएगी। जस्टिस मंजू रानी चौहान ने अवधेश कुमार चौधरी और छह अन्य की याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी नियुक्तियां शुरू से ही दूषित होती हैं, इसलिए उम्मीदवार 5 साल की सेवा का हवाला देकर राहत नहीं मांग सकते।
‘यह मानवीय भूल नहीं, पारदर्शिता पर चोट है’
कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “ज्यादा नंबर भरना किसी भी तर्क से महज ‘मानवीय भूल’ या अनजाने में हुई गलती नहीं कही जा सकती। यह योग्य उम्मीदवारों के हक पर डाका डालने जैसा है। ऐसी हरकत पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता की जड़ पर प्रहार करती है।”
क्या था पूरा मामला?
-भर्ती: याचिकाकर्ताओं ने 2019 की सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा दी थी और वे सफल घोषित हुए थे। उन्हें कुशीनगर जिला आवंटित किया गया था।
-विवाद: नियुक्ति के समय कुछ आपत्तियां उठी थीं, जिस पर शपथ पत्र देने के बाद उन्हें नियुक्ति पत्र जारी कर दिए गए थे।
-कार्रवाई: 5 साल तक नौकरी करने के बाद, मई 2025 में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने पाया कि इन उम्मीदवारों ने फॉर्म भरते समय अपने अंक बढ़ाकर दिखाए थे। इसके बाद उनकी सेवा समाप्त कर दी गई।
याचिकाकर्ताओं की दलील और कोर्ट का रुख
उम्मीदवारों के वकील ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किलों ने शपथ पत्र के जरिए सही जानकारी दे दी थी और 5 साल के सेवा रिकॉर्ड में कोई शिकायत नहीं थी, इसलिए ‘बर्खास्तगी’ की सजा बहुत कठोर है।
कोर्ट ने रिकॉर्ड्स देखने के बाद यह पाया
- गलती बनाम धोखाधड़ी: कुछ उम्मीदवारों ने केवल फॉर्मेट अलग भरा था (जिसे कोर्ट ने बोनाफाइड मिस्टेक माना), लेकिन कुछ ने जानबूझकर नंबर बढ़ाकर लिखे थे।
- मेरिट पर असर: कोर्ट ने कहा कि नंबर बढ़ाने से मेरिट लिस्ट में उम्मीदवार की स्थिति बदल जाती है, जो पूरी तरह से गलत है।

