Wednesday, September 30, 2026
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NALSAR Student Vs BCI-IV: नालसार स्टूडेंट बार काउंसिल का हमला.. कोई भी संस्थान जांच के दायरे से परे नहीं, BCI अध्यक्ष से माफी की मांग, जानिए

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
संस्थाननालसार (NALSAR) यूनिवर्सीटी ऑफ लॉ, हैदराबाद
निकायस्टूडेंट बार काउंसिल (SBC)
मुख्य मांगBCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा द्वारा लगाए गए आरोपों पर औपचारिक माफी।
कानूनी आधारएडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 7 और 24A के तहत BCI को एकतरफा नामांकन रोकने या अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार नहीं है।
वर्तमान स्थितिBCI ने सर्कुलर वापस ले लिया है, लेकिन SBC ने अपने अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया।

NALSAR Student Vs BCI-IV: नालसार (NALSAR) यूनिवर्सीटी ऑफ लॉ की ‘स्टूडेंट बार काउंसिल’ (SBC) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के परिपत्रों (Circulars) की कड़े शब्दों में निंदा की है।

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SBC ने स्पष्ट किया कि संविधान में कोई भी सार्वजनिक पद या संस्थान यहां तक कि सर्वोच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) भी वैध जांच और आलोचना से परे नहीं है। इसके साथ ही, NALSAR SBC ने छात्रों और शिक्षकों पर “बाहरी तत्वों से गुमराह” होने का आरोप लगाने के लिए BCI अध्यक्ष से औपचारिक माफी की मांग की है।

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स्टूडेंट बार काउंसिल (SBC) के मुख्य तर्क और बिंदु

  1. न्यायिक जवाबदेही और अभिव्यक्ति का अधिकार:“संवैधानिक लोकतंत्र में असहमति, विरोध, सार्वजनिक संस्थानों की आलोचना और सत्ता में बैठे लोगों से जवाबदेही मांगने का अधिकार लोकतंत्र की आत्मा है। CJI और सुप्रीम कोर्ट सहित कोई भी संस्थान वैध समीक्षा से परे नहीं है। न्यायिक जवाबदेही, न्यायिक स्वतंत्रता की विरोधी नहीं बल्कि उसका एक अनिवार्य सुरक्षा कवच है।”
  2. BCI के क्षेत्राधिकार पर कानूनी सवाल
    • एडवोकेट्स एक्ट की धारा 7: SBC ने कहा कि इस धारा के तहत BCI के पास विश्वविद्यालयों पर केवल कानूनी शिक्षा के मानक तय करने का अधिकार है, न कि छात्रों का नामांकन रोकने का।
    • धारा 24A: यह धारा केवल आपराधिक सजा की स्थिति में ही नामांकन (Enrolment) से अयोग्य घोषित करती है, जो इस मामले में लागू ही नहीं होती। 2026 बैच के नामांकन पर रोक लगाना BCI के वैधानिक अधिकारों से बाहर था।
  3. ‘हरीश उप्पल’ फैसले का गलत हवाला
    • BCI द्वारा सुप्रीम कोर्ट के Harish Uppal v. Union of India फैसले का हवाला देने को “पूरी तरह अनुचित” बताया गया। SBC ने कहा कि वह फैसला वकीलों की हड़ताल से संबंधित था और BCI इसका इस्तेमाल मनमाना अधिकार जताने के लिए नहीं कर सकता।
  4. राजनीतिक संदर्भ पर टिप्पणी
    • SBC ने नोट किया कि BCI अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी (BJP) से मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं। विरोध प्रदर्शनों को “बाहरी तत्वों की साजिश” का रूप देने की कोशिश एक जाने-पहचाने पैटर्न को दर्शाती है।

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विवाद का घटनाक्रम (Sequence of Events)

  • शुरुआती विरोध: NALSAR के पासिंग आउट बैच के छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से CJI सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह (Convocation) में मुख्य अतिथि के रूप में बुलाने पर पुनर्विचार का अनुरोध किया था।
  • BCI का पहला सर्कुलर: BCI ने कार्रवाई करते हुए NALSAR के 2026 बैच के सभी छात्रों के वकालत नामांकन पर तत्काल रोक लगा दी।
  • BCI का दूसरा सर्कुलर: विरोध के बाद BCI ने कुछ ही घंटों में नामांकन पर रोक का फैसला वापस ले लिया, लेकिन विरोध का नेतृत्व करने वाले छात्रों और शिक्षकों की पहचान के लिए जांच का आदेश दिया।
  • मामला बंद: NALSAR के कुलपति श्रीकृष्ण देव राव द्वारा जांच की संवैधानिकता की समीक्षा की बात कहने के तुरंत बाद, BCI अध्यक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर घोषणा की कि कोई जांच नहीं होगी और इस मुद्दे को बंद माना जाए।

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