मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- एनओसी (NOC) और बोर्ड संबद्धता की शर्त: हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि राज्य के भीतर काम करने वाले सीबीएसई या सीआईएससीई स्कूलों को राज्य सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होता है। इसलिए किसी अन्य बोर्ड से संबद्ध होना उन्हें राज्य द्वारा थोपी गई कानूनी और सामाजिक जिम्मेदारियों से छूट प्रदान नहीं करता।
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) का अधिकार: कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों को कक्षा 1 (या प्री-स्कूल) में आसपास के कमजोर और वंचित वर्गों के बच्चों को अनिवार्य रूप से प्रवेश देना होगा और उनकी प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक मुफ्त शिक्षा प्रदान करनी होगी।
- 5 वर्षों का विस्तृत डेटा तलब: उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह पिछले 5 शैक्षणिक सत्रों का जिला-वार और स्कूल-वार संपूर्ण डेटा प्रस्तुत करे।
- जांच के मुख्य बिंदु: राज्य को यह विवरण देना होगा कि:
- वास्तव में कितने बच्चों को RTE के तहत प्रवेश दिया गया।
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा आवंटित कितने बच्चों को स्कूलों ने प्रवेश देने से मना किया और उसके दर्ज कारण क्या थे।
- डोनेशन/कैपिटेशन फीस मांगने या अवैध स्क्रीनिंग प्रक्रिया अपनाने से जुड़ी कितनी शिकायतें दर्ज हुईं और उन पर क्या कार्रवाई की गई।
- BSA और DIOS को डेटा संकलन का जिम्मा: बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को सभी मान्यता प्राप्त प्राथमिक, हाई स्कूल और इंटरमीडिएट स्कूलों से डेटा एकत्र करने का निर्देश दिया गया है। सभी निजी बोर्डों के स्कूलों को इसमें सहयोग करने के आदेश दिए गए हैं।
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश में सीबीएसई (CBSE) या सीआईएससीई (CISCE) से संबद्ध निजी स्कूल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) के अनिवार्य प्रावधानों से मुक्त नहीं हैं।
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने ‘सेंट जॉन्स स्कूल, बभनौटी, पचवल’ से जुड़ी एक रिट याचिका की सुनवाई के दौरान 25 अगस्त को यह महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया। अदालत ने राज्य सरकार को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूहों के बच्चों के प्रवेश से संबंधित पिछले 5 वर्षों का स्कूलवार डेटा हलफनामे के रूप में प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत 6 से 14 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है।
उच्च न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियां
अदालत ने गैर-राज्य बोर्डों से संबद्धता के आधार पर छूट के दावे को खारिज करते हुए कहा: “उत्तर प्रदेश राज्य के भीतर प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने वाले और सीबीएसई या सीआईएससीई से संबद्ध स्कूल राज्य सरकार द्वारा लगाए गए दायित्वों के उसी प्रकार अधीन हैं जैसे कोई अन्य स्कूल। राज्य बोर्ड के अलावा किसी अन्य बोर्ड से संबद्धता उन्हें इन कानूनी दायित्वों से कोई छूट प्रदान नहीं करती है।”
अदालत ने रेखांकित किया कि ऐसे निजी स्कूलों को राज्य में स्थापना, संचालन और संबंधित केंद्रीय बोर्ड से संबद्धता के लिए राज्य सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होता है, इसलिए वे राज्य के विनियामक नियमों से बंधे हैं।
कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के अधिकारों पर जोर
- कक्षा 1 में 25% आरक्षण का दायित्व: अदालत ने गैर-सहायता प्राप्त (Unaided) निजी प्राथमिक स्कूलों में पड़ोस के वंचित व कमजोर वर्ग और दिव्यांग बच्चों को कक्षा 1 में प्रवेश देने तथा प्राथमिक शिक्षा पूरी होने तक मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराने के वैधानिक दायित्व को रेखांकित किया।
- निजी स्कूलों की अनिच्छा पर संज्ञान: अदालत के संज्ञान में लाया गया था कि कुछ निजी स्कूल इन बच्चों को प्रवेश देने और अपनी नियमित फीस छोड़ने में ‘अनिच्छा’ (Reluctance) दिखाते हैं। अदालत ने कहा कि वास्तविक स्थिति जानने के लिए ही राज्यव्यापी डेटा तलब किया गया है।
Private School Admission: राज्य सरकार को दिए गए 5-वर्षीय डेटा के कड़े निर्देश
उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को राज्य के सभी सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों (चाहे वे किसी भी बोर्ड से संबद्ध हों) का जिलावार और स्कूलवार ब्योरा पेश करने का निर्देश दिया है:
- कुल छात्र संख्या: जूनियर बेसिक स्कूल, जूनियर हाई स्कूल, हाई स्कूल और इंटरमीडिएट स्तर पर अलग-अलग नामांकित छात्रों की संख्या।
- RTE के तहत वास्तविक प्रवेश: पिछले 5 शैक्षणिक सत्रों में प्रत्येक स्कूल में RTE कोटे के तहत वास्तव में प्रवेश पाने वाले बच्चों की संख्या।
- प्रवेश से इनकार के मामले: सक्षम प्राधिकारी द्वारा आवंटित किए गए उन बच्चों की संख्या जिन्हें स्कूलों ने प्रवेश देने से मना कर दिया या जिनका प्रवेश नहीं हो सका, और इसके दर्ज कारण।
- कैपिटेशन फीस व स्क्रीनिंग की शिकायतें: गैर-कानूनी कैपिटेशन फीस वसूलने या स्क्रीनिंग टेस्ट आयोजित करने के खिलाफ मिली शिकायतों की संख्या और उन पर की गई प्रशासनिक कार्रवाई का ब्योरा।
डेटा संकलन और बोर्डों को सहयोग का आदेश
- अधिकारियों की जिम्मेदारी: बेसिक स्तर के स्कूलों की जानकारी बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और माध्यमिक/इंटरमीडिएट कॉलेजों की जानकारी जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) के माध्यम से संकलित की जाएगी।
- निजी स्कूलों को निर्देश: सीबीएसई, सीआईएससीई और अन्य बोर्डों से मान्यता प्राप्त सभी निजी स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे बीएसए और डीआईओएस को आवश्यक डेटा उपलब्ध कराने में पूरा सहयोग करें।
- निष्पक्षता का भरोसा: अदालत ने स्पष्ट किया कि यह जानकारी केवल वास्तविक जमीनी हकीकत को समझने के लिए मांगी जा रही है और किसी भी स्कूल के खिलाफ कोई भी प्रतिकूल कार्रवाई बिना विधिक नोटिस दिए नहीं की जाएगी।
अगली सुनवाई
रजिस्ट्रार (अनुपालन) को यह आदेश प्रमुख सचिव (बेसिक शिक्षा), महानिदेशक (बेसिक शिक्षा), माध्यमिक शिक्षा निदेशक के साथ-साथ सीबीएसई और सीआईएससीई को अनुपालन हेतु भेजने का निर्देश दिया गया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने अपने आदेश में कहा: “यह स्पष्ट रूप से निष्कर्ष निकलता है कि राज्य के भीतर प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करने वाला सीबीएसई या सीआईएससीई से संबद्ध स्कूल भी राज्य सरकार द्वारा लगाए गए दायित्वों के अधीन उसी पैमाने पर है जैसा कि कोई अन्य स्कूल। राज्य बोर्ड के अलावा किसी अन्य बोर्ड से उसकी संबद्धता उसे इस कानूनी दायित्व से कोई छूट प्रदान नहीं करती है।” कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह जानकारी राज्य में RTE के क्रियान्वयन की संपूर्ण स्थिति को समझने के लिए मांगी जा रही है और फिलहाल किसी संस्थान के खिलाफ बिना सुनवाई के कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं की जाएगी। आदेश की प्रति सीबीएसई, सीआईएससीई और उत्तर प्रदेश के प्रमुख शिक्षा सचिवों को भेज दी गई है।
Private School Admission: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Order)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर (Justice Vinod Diwakar) |
| संबंधित कानून/संविधान | RTE अधिनियम 2009 एवं भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21A |
| मुख्य आदेश | CBSE/CISCE स्कूलों पर भी RTE लागू; राज्य से पिछले 5 वर्षों का जिला-वार और स्कूल-वार डेटा तलब |
| अगली सुनवाई | 15 सितंबर 2026 |

