State Anthem Row: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Judgment)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठासीन पीठ | न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना एवं न्यायमूर्ति आर. महादेवन |
| याचिकाकर्ता | गायक किक्केरी कृष्णमूर्ति (Kikkeri Krishnamurthy) |
| विवादित सरकारी आदेश | कर्नाटक सरकार का 25 सितंबर 2022 का आदेश (राज्यगान का समय व धुन तय करना) |
| अदालत का फैसला | SLP खारिज; मैसूर अनंतस्वामी द्वारा कंपोज की गई धुन और ढाई मिनट का समय बरकरार। |
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के राज्य गान (नाड़ा गीते – ‘जय भारत जननीय तनुजाते’) को गाने के लिए निर्धारित की गई धुन (राग) और अवधि को चुनौती देने वाली याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें राज्य सरकार द्वारा तय की गई धुन को सही ठहराया गया था।
न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने गायक किक्केरी कृष्णमूर्ति की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य गान के गायन में राग और समय-सीमा दोनों के संबंध में एकरूपता होना अनिवार्य है।
सर्वोच्च न्यायालय की प्रमुख टिप्पणी
याचिका को खारिज करते हुए खंडपीठ ने कहा: “हम रेखांकित करते हैं कि राज्य गान के गायन में राग (Raga) और गीत की अवधि (Duration) दोनों के संबंध में एकरूपता (Uniformity) होनी चाहिए। ऐसी परिस्थितियों में हमें आक्षेपित आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता। अतः विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है।”
मामले की पृष्ठभूमि और विवाद
- सरकार का आदेश (2022): कर्नाटक सरकार ने 25 सितंबर 2022 को एक आदेश जारी कर प्रसिद्ध संगीतकार स्वर्गीय मैसूर अनंतस्वामी द्वारा रचित धुन में राज्य गान को गाने और इसकी कुल अवधि ढाई मिनट (2 मिनट 30 सेकंड) निर्धारित की थी।
- हाईकोर्ट में चुनौती: गायक किक्केरी कृष्णमूर्ति ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर कर तर्क दिया था कि सरकार राज्य गान गाने के लिए कोई विशिष्ट राग या धुन अनिवार्य रूप से तय नहीं कर सकती।
- कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख: उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि यह धुन एक विशेषज्ञ द्वारा तैयार की गई है और सरकार द्वारा राग निर्धारित करने से याचिकाकर्ता के किसी भी मौलिक या विधिक अधिकार का हनन नहीं होता है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. Mahadevan की पीठ ने अपना आदेश सुनाते हुए स्पष्ट किया: “हम मानते हैं कि राज्यगान के गायन में राग के साथ-साथ गाने की समय-सीमा के संबंध में भी एकरूपता होना आवश्यक है। ऐसी परिस्थितियों में, हमें हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नजर नहीं आता। इसलिए विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है।”
अंतिम आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले में किसी भी तरह की कानूनी त्रुटि न पाते हुए याचिकाकर्ता की अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया। इसके साथ ही मैसूर अनंतस्वामी द्वारा संगीतबद्ध धुन और 2.5 मिनट की तय अवधि में कर्नाटक राज्य गान गाए जाने की सरकारी व्यवस्था कानूनी रूप से यथावत बनी रहेगी।

