मुख्य बिंदु (Key Indicators)
- “बस छूट गई तो छूट गई”: CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान सख्त लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा, “यदि आप बस में नहीं चढ़ते हैं, तो आपकी बस छूट जाती है। पोर्टल एक निश्चित अवधि के लिए सभी के लिए खुला था, अब इसे फिर से क्यों खोला जाए?”
- OSM प्रणाली पर आरोप: याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि वर्ष 2026 में पहली बार लागू की गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली के लिए शिक्षकों को उचित प्रशिक्षण नहीं दिया गया था। इसके कारण डिजिटल स्कैनिंग में पन्ने छूट गए, स्कैन धुंधले थे और कई उत्तरों का मूल्यांकन ही नहीं हुआ।
- वेबसाइट क्रैश होने का दावा खारिज: याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वेबसाइट क्रैश होने के कारण कई छात्र आवेदन नहीं कर सके, इसलिए केवल एक सप्ताह का समय बढ़ाया जाए। इसके जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि तय समय सीमा के भीतर 1.68 लाख छात्रों ने सफलतापूर्वक आवेदन दर्ज किया था।
- एडमिशन प्रक्रिया पूरी होना: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब इस चरण पर पोर्टल खोलने से दाखिले (Admissions) की प्रक्रिया प्रभावित होगी, जो कि पहले ही पूरी होने के कगार पर है या समाप्त हो चुकी है। दिल्ली हाईकोर्ट भी इससे जुड़ी ऐसी ही चुनौती को खारिज कर चुका है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई (CBSE) 12वीं कक्षा के उन छात्रों के लिए उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) पोर्टल को दोबारा खोलने का निर्देश देने से इनकार कर दिया है, जो ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) प्रणाली के तहत किए गए मूल्यांकन से असंतुष्ट थे।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने छात्रों की ओर से पोर्टल को एक सप्ताह के लिए दोबारा खोलने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने टिप्पणी की कि सभी छात्रों के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय की गई थी और अब पोर्टल को फिर से खोलने से लाखों नए दावों का अंबार लग जाएगा [CBSE OSM Row]।
शीर्ष अदालत की सख्त टिप्पणी: “मिस द बस”
सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता के वकील ने तकनीकी दिक्कतों और वेबसाइट क्रैश का हवाला देते हुए पोर्टल को एक सप्ताह के लिए खोलने का अनुरोध किया, तो सीजेआई सूर्य कांत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा: “हम आपके लिए इस विंडो को दोबारा खोलने का निर्देश क्यों दें? यदि आप समय पर बस में नहीं चढ़ते हैं, तो आपकी बस छूट जाती है (If you don’t use the bus, you miss the bus)। यह विंडो एक निश्चित अवधि के लिए सभी छात्रों के लिए खुली थी।”
अदालत ने आगे कहा: “आज आप इसे फिर से खोलने की मांग कर रहे हैं, लेकिन इससे हजारों और लाखों पुराने दावे दोबारा जीवित हो जाएंगे। सबसे बड़ी व्यावहारिक कठिनाई यह है कि विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है।”
CBSE OSM Row: याचिका में उठाए गए मुख्य आरोप
याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 2026 में पहली बार लागू की गई ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) प्रणाली में कई गंभीर प्रक्रियात्मक खामियों का आरोप लगाया था:
- शिक्षकों के प्रशिक्षण का अभाव: याचिका में कहा गया कि नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली लागू करने से पहले परीक्षकों/शिक्षकों को कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं दिया गया।
- स्कैनिंग में तकनीकी खामियां: आरोप लगाया गया कि डिजिटल स्कैनिंग के दौरान उत्तर पुस्तिकाओं के कई पन्ने स्कैन होने से छूट गए, कई स्कैन धुंधले (Illegible) थे और कई महत्वपूर्ण उत्तरों का मूल्यांकन ही नहीं किया गया।
- मनमाना मूल्यांकन: याचिकाकर्ता के अनुसार, इन तकनीकी और प्रक्रियात्मक गलतियों के कारण छात्रों को अप्रत्याशित रूप से कम अंक मिले, जिससे वे विभिन्न प्रवेश-आधारित दाखिलों में पिछड़ गए।
सीबीएसई (CBSE) और सॉलिसिटर जनरल की दलीलें
सीबीएसई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पोर्टल दोबारा खोलने की मांग का विरोध करते हुए अदालत को बताया:
- 1.68 लाख आवेदन प्राप्त: निर्धारित समय-सीमा के भीतर 1.68 लाख छात्रों ने ऑन-स्क्रीन सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए सफलतापूर्वक आवेदन किया था।
- दिल्ली हाईकोर्ट का पूर्व निर्णय: इसी तरह की चुनौतियों को दिल्ली उच्च न्यायालय पहले ही खारिज कर चुका है।
- अधिकांश छात्रों द्वारा तय समय में आवेदन किए जाने से यह स्पष्ट है कि पूरी प्रणाली सुचारू रूप से कार्य कर रही थी।
सुप्रीम कोर्ट की मौखिक टिप्पणी
CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा: “आज आप हमसे इसे फिर से खोलने के लिए कह रहे हैं। कल इसके कारण हजारों, यहां तक कि लाखों छात्रों के दावों का पुनरुत्थान होगा। मुख्य समस्या यह है कि कॉलेजों और उच्च शिक्षा में प्रवेश की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है।”
यह रहा अंतिम निष्कर्ष
सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि निर्धारित समय-सीमा बीत जाने और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया अंतिम चरण में होने के कारण इस स्तर पर हस्तक्षेप करना पूरी परीक्षा और प्रवेश चक्र को बाधित करेगा। तदनुसार, पीठ ने पुनर्मूल्यांकन पोर्टल दोबारा खोलने की याचिका को खारिज कर दिया।
एट ए ग्लान्स (At a Glance of Judgment)
| विवरण | विवरण जानकारी |
| संबंधित अदालत | भारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठ (Bench) | CJI सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना |
| मुख्य मुद्दा | ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में गड़बड़ी व पोर्टल री-ओपनिंग की मांग |
| CBSE का पक्ष | 1.68 लाख छात्रों ने तय समय सीमा में री-इवैल्यूएशन के लिए सफलतापूर्वक आवेदन किया |
| अदालत का निर्णय | याचिका खारिज; री-इवैल्यूएशन पोर्टल दोबारा खोलने का निर्देश देने से इनकार |

