पंजाब सरकार की दलीलें और आरोप
- प्रक्रिया (Memorandum of Procedure – MoP) का उल्लंघन: पंजाब कैबिनेट के अनुसार, ‘मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर’ के तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश से सिफारिश मिलने के बाद केंद्रीय कानून मंत्री को संबंधित राज्य सरकार से विचार (Views) प्राप्त करने होते हैं।
- जल्दबाजी में अधिसूचना: राज्य सरकार ने बताया कि केंद्रीय कानून राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 12 अगस्त को पंजाब सरकार से राय मांगी थी, लेकिन राज्य का जवाब आए बिना ही केंद्र ने अधिसूचना जारी कर दी।
- भेदभाव का आरोप: पंजाब सरकार ने उदाहरण देते हुए कहा कि जब 2024 में जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश हुई थी, तब मध्य प्रदेश सरकार की सहमति न मिलने पर 2 महीने से अधिक समय तक अधिसूचना रोकी गई थी। पंजाब सरकार का आरोप है कि केंद्र पंजाब के साथ दोहरा रवैया अपना रहा है।
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार और पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया है।
राज्य सरकार ने राज्यपाल से अनुरोध किया है कि जब तक पंजाब सरकार का दृष्टिकोण प्राप्त और विचारित नहीं किया जाता, तब तक जस्टिस मिश्रा को पद एवं गोपनीयता की शपथ न दिलाई जाए। पंजाब कैबिनेट ने 06 सितंबर 2026 को आपातकालीन बैठक बुलाकर केंद्र द्वारा जस्टिस मिश्रा को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की अधिसूचना के खिलाफ सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया।
पंजाब कैबिनेट के विरोध का मुख्य आधार: ‘MoP का उल्लंघन’
पंजाब सरकार ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने ‘मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर’ (Memorandum of Procedure – MoP) और संवैधानिक मानदंडों का सीधा उल्लंघन किया है:
- परामर्श प्रक्रिया की अनदेखी: MoP के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश मिलने के बाद केंद्रीय कानून मंत्री को संबंधित राज्य सरकार के विचार जानने अनिवार्य होते हैं, जिसके बाद ही फाइल प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भेजी जाती है।
- जल्दबाजी में अधिसूचना: राज्य सरकार ने बताया कि केंद्रीय कानून राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 12 अगस्त को पंजाब सरकार से विचार मांगे थे। राज्य की सिफारिश या जवाब का इंतजार किए बिना ही केंद्र ने शनिवार रात अचानक नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी।
मध्य प्रदेश के पूर्व मामले से तुलना: ‘पंजाब के साथ भेदभाव का आरोप’
पंजाब सरकार ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया के मामले का हवाला देते हुए केंद्र पर चुनिंदा और भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया:
- वर्ष 2024 में जस्टिस संधावालिया को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की गई थी।
- मध्य प्रदेश सरकार की ओर से सहमति/सिफारिश न मिलने के कारण केंद्रीय कानून मंत्रालय ने दो महीने से अधिक समय तक अधिसूचना रोके रखी थी और बाद में उन्हें हिमाचल प्रदेश भेजा गया।
- पंजाब सरकार का कहना है कि जब पंजाब के किसी जज का मामला आता है तो अलग नियम अपनाए जाते हैं और जब किसी अन्य जज को पंजाब में नियुक्त किया जाता है तो राज्य की सहमति की अनदेखी कर दी जाती है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान का बयान
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा: “पंजाब कैबिनेट ने केंद्र सरकार द्वारा पंजाब के अधिकारों पर लगातार किए जा रहे हमलों और संवैधानिक मानदंडों के उल्लंघन के खिलाफ एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है। राज्य सरकार की सहमति लिए बिना पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करना प्रक्रिया (MoP) और संवैधानिक गरिमा का खुला उल्लंघन है।”
बार एसोसिएशन ने कैबिनेट के कदम की निंदा की
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने पंजाब कैबिनेट द्वारा आपात बैठक बुलाकर नियुक्ति का विरोध करने पर कड़ी आपत्ति जताई है:
- बार एसोसिएशन ने इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता में कार्यपालिका का अनुचित हस्तक्षेप (Executive Overreach) करार दिया।
- एसोसिएशन का कहना है कि ऐसा कोई भी कदम जो न्यायपालिका पर राजनीतिक या कार्यकारी दबाव का आभास कराता हो, वह न्यायिक प्रशासन और जनता के विश्वास को कमजोर करता है।
जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा का न्यायिक सफर और हालिया आदेश
- पृष्ठभूमि: दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर (CLC) से वकालत की डिग्री लेने वाले जस्टिस मिश्रा 3 फरवरी 2014 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश बने और 1 फरवरी 2016 को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए।
- पंजाब स्थानांतरण: 21 जुलाई 2025 को वे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट स्थानांतरित हुए और तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश शील नागू के सुप्रीम कोर्ट पदोन्नत होने के बाद 1 जून से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting Chief Justice) का दायित्व संभाल रहे हैं।
- पंजाब सरकार के विज्ञापनों पर रोक का आदेश: हाल ही में अगस्त माह में जस्टिस मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने पंजाब सरकार को कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का बकाया महंगाई भत्ता (DA/DR) जारी करने का कड़ा निर्देश दिया था। अदालत ने सख्त टिप्पणी की थी कि राज्य सरकार विज्ञापनों और मुफ्त रेवड़ियों (Freebies) पर भारी खर्च कर रही है, लेकिन कर्मचारियों के वैध बकाए को वित्तीय संकट बताकर रोक रही है। पीठ ने बकाए का भुगतान होने तक बड़े विज्ञापनों पर रोक लगाने का आदेश दिया था।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का कड़ा रुख
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने पंजाब कैबिनेट के आपातकालीन प्रस्ताव की निंदा की है। बार संघ का कहना है कि न्यायिक नियुक्तियों में राजनीतिक या कार्यपालिका का दबाव बनाने का प्रयास न्यायपालिका की स्वतंत्रता को प्रभावित करता है और जनता के विश्वास को कमजोर करता है।
Justice’s Appointment Row: घटनाक्रम और विवाद का सार (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| मुख्य न्यायाधीश पद पर नियुक्ति | न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा (कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश) |
| कॉलेजियम सिफारिश | 6 अगस्त 2026 (सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम) |
| केंद्र की अधिसूचना | 5 सितंबर 2026 (शनिवार रात जारी) |
| पंजाब सरकार का विरोध | MoP नियमों के तहत राज्य की सहमति/विचार मांगे बिना जल्दबाजी में निर्णय लेने का आरोप। |
| बार एसोसिएशन का रुख | हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने कैबिनेट के इस कदम को न्यायपालिका में कार्यपालिका का हस्तक्षेप बताया। |

