सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का संदर्भ
- 22 जुलाई 2026 के निर्देश: मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और संबंधित उच्च न्यायालयों को आपसी परामर्श से रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 61 वर्ष करने पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। यह अंतरिम व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से लागू करने का विकल्प दिया गया था।
- 62 वर्ष का मुद्दा: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि क्या जिला जजों की सेवानिवृत्ति आयु को पूरे देश में समान रूप से 62 वर्ष किया जाए, इस पर अंतिम फैसला स्वतंत्र रूप से लिया जाएगा।
- CJI की टिप्पणी: सुनवाई के दौरान CJI सूर्य कांत ने हाईकोर्ट जजों की मौजूदा रिटायरमेंट उम्र (62 वर्ष) का हवाला देते हुए टिप्पणी की थी, “यदि जिला जज भी 62 वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं, तो इसमें क्या समस्या है?”
पटना: पटना हाईकोर्ट की ‘फुल कोर्ट’ (Full Court) ने एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए बिहार के न्यायिक अधिकारियों (Judicial Officers) की सेवानिवृत्ति आयु (Retirement Age) 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने का प्रस्ताव पारित किया है।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट देशभर की जिला न्यायपालिका (District Judiciary) में सेवानिवृत्ति आयु को एक समान रूप से बढ़ाकर 62 वर्ष करने के बड़े विधिक मुद्दे पर विचार कर रहा है। हाईकोर्ट ने इस संबंध में बिहार सरकार को आधिकारिक पत्र भेजकर आवश्यक प्रशासनिक व विधायी कदम उठाने का अनुरोध किया है।
पटना हाईकोर्ट का आधिकारिक संचार
पटना उच्च न्यायालय के महानिबंधक (Registrar General) रूपेश देव ने बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव को 31 अगस्त 2026 को भेजे आधिकारिक पत्र में इस निर्णय की जानकारी दी।
पत्र में उल्लेख किया गया है: “माननीय उच्च न्यायालय ने 18 अगस्त 2026 को आयोजित फुल कोर्ट के संकल्प (Resolution) के माध्यम से बिहार राज्य के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने का सहर्ष निर्णय लिया है।”
महानिबंधक ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि फुल कोर्ट के इस प्रस्ताव के आलोक में संबंधित सेवा नियमों में संशोधन और आवश्यक कार्रवाई जल्द पूरी की जाए।
सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही और पृष्ठभूमि
- ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन मामला: 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन बनाम भारत संघ मामले की सुनवाई की थी।
- अंतरिम व्यवस्था (60 से 61 वर्ष): सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने-अपने उच्च न्यायालयों से परामर्श कर जिला न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 61 वर्ष करने पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। जिन राज्यों और हाईकोर्ट में सहमति बने, वहां यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी गई थी।
- 62 वर्ष पर CJI की टिप्पणी: सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट जजों की सेवानिवृत्ति आयु (62 वर्ष) के संदर्भ में सीजेआई सूर्यकांत ने मौखिक टिप्पणी की थी:“यदि जिला न्यायाधीश भी 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं, तो इसमें क्या समस्या है?”
अन्य राज्यों का रुख
- समर्थन करने वाले राज्य: बिहार से पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की फुल कोर्ट ने भी जिला जजों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने का प्रस्ताव पारित किया था। इसके अलावा तेलंगाना ने भी सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के पक्ष में निर्णय लिया है।
- विरोध करने वाले राज्य: पंजाब और हरियाणा जैसे कुछ राज्यों ने इस प्रस्ताव का यह कहते हुए विरोध किया है कि उनके यहां सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष या उससे कम है।
प्रभाव
पटना हाईकोर्ट के इस प्रस्ताव को राज्य सरकार की मंजूरी मिलने और सेवा नियमों में संशोधन के बाद बिहार के अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) में कार्यरत सभी न्यायाधीशों व न्यायिक अधिकारियों को दो अतिरिक्त वर्षों (62 वर्ष तक) की सेवा का लाभ मिलेगा। इससे अनुभवी न्यायिक अधिकारियों की सेवाएं लंबे समय तक मिल सकेंगी और अदालतों में मुकदमों के त्वरित निपटारे में मदद मिलेगी।
Retirement Age: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Development)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | पटना उच्च न्यायालय (Full Court) |
| प्रासंगिक पत्र तिथि | 31 अगस्त 2026 (रजिस्ट्रार जनरल द्वारा राज्य सरकार को प्रेषित) |
| फुल कोर्ट संकल्प तिथि | 18 अगस्त 2026 |
| मुख्य निर्णय | बिहार के जिला न्यायपालिका/न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करना। |
| सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ | ऑल इंडिया जज एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (All India Judges Association v. UOI) |

