NALSAR SBC के मुख्य बिंदु और टिप्पणियां
- छात्रों के रुख की सराहना: NALSAR SBC ने 2026 बैच के छात्रों के उस रुख का सम्मान किया, जिन्होंने दबाव के बावजूद अपनी असहमति (Dissent) के अधिकार से समझौता करने से इनकार कर दिया।
- अधिकार छीनना क्रूरता: SBC ने कहा कि दीक्षांत समारोह छात्रों के वर्षों की कड़ी मेहनत, सीखने और परिवार के साथ जश्न मनाने का भावुक पल होता है। अंतिम समय में इसे रद्द करना और उनके परिवारों के लिए की गई व्यवस्थाओं को व्यर्थ करना बेहद निष्ठुर कदम है।
- पारदर्शिता का अभाव: SBC ने NLSIU प्रशासन की भी आलोचना की कि उसने “अपरिहार्य परिस्थितियों” का बहाना बनाकर मामले को टाल दिया, जो एक प्रमुख कानूनी संस्थान से अपेक्षित पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत है।
हैदराबाद: नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU), बेंगलुरु के दीक्षांत समारोह (Convocation) के रद्द होने के बाद नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR), हैदराबाद की स्टूडेंट बार काउंसिल (SBC) ने NLSIU के ग्रैजुएटिंग बैच के समर्थन में एक विस्तृत बयान जारी किया है।
नालसार SBC ने कहा कि यदि यह मांग सीधे CJI कार्यालय की ओर से रखी गई थी, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि ऐसे में छात्रों के हितों के मुकाबले सार्वजनिक छवि को प्राथमिकता दी गई। नालसार SBC ने दावा किया है कि NLSIU प्रशासन ने छात्रों पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को दीक्षांत समारोह के लिए सार्वजनिक रूप से “पुनः आमंत्रित” (Re-inviting) करने का पत्र जारी करने का दबाव नहीं डाला था।
NALSAR स्टूडेंट बार काउंसिल के बयान के मुख्य बिंदु
1. सार्वजनिक आमंत्रण पत्र की नई शर्त पर आपत्ति नालसार SBC ने रेखांकित किया:
- NLSIU के सांविधिक ढांचे के तहत CJI विश्वविद्यालय के पदेन कुलाधिपति (Ex-officio Chancellor) होते हैं और दीक्षांत समारोह आयोजित करते हैं।
- छात्रों ने समारोह को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए बिना किसी विरोध प्रदर्शन के CJI की उपस्थिति पर सहमति जता दी थी।
- इसके बावजूद 25 अगस्त को अचानक एक नई शर्त जोड़ दी गई कि छात्रों को CJI को सार्वजनिक रूप से पुनः आमंत्रित करने का पत्र जारी करना होगा। जब छात्रों ने इस मांग को खारिज कर दिया, तो दीक्षांत समारोह को रद्द कर दिया गया।
2. CJI कार्यालय की भूमिका पर सवाल बयान में कहा गया: “यदि ‘सार्वजनिक पत्र’ की ऐसी मांग CJI के कार्यालय द्वारा की गई थी, तो यह अविश्वसनीय रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि सीजेआई के कार्यालय ने छात्रों के हितों पर अपने कार्यालय की अनुकूल सार्वजनिक छवि और विमर्श को तरजीह दी। हम 2026 बैच के छात्रों के उस सैद्धांतिक रुख को सलाम करते हैं, जिन्होंने इस मांग को खारिज कर दिया और अपनी असहमति पर कायम रहे।”
3. दीक्षांत समारोह रद्द करने को बताया क्रूर कदम नालसार SBC ने कहा कि दीक्षांत समारोह वर्षों की मेहनत और परिवार के साथ जश्न मनाने का एक ऐतिहासिक पल होता है। ऐसे में छात्रों से यह अवसर छीनना, विशेषकर तब जब उनके परिवारों ने यात्रा की पूरी व्यवस्था कर ली थी, बेहद क्रूर कदम है।
विवाद का घटनाक्रम (Timeline of Events)
- NALSAR से शुरू हुआ विवाद: नालसार के छात्रों ने अपने दीक्षांत समारोह में CJI की उपस्थिति का विरोध किया था। इसके जवाब में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने नालसार के छात्रों के इनरोलमेंट पर रोक लगाने का सर्कुलर जारी किया था, जिसे कानूनी बिरादरी के विरोध के बाद वापस ले लिया गया।
- NLSIU छात्रों का नालसार को समर्थन: NLSIU के 700 से अधिक पूर्व व वर्तमान छात्रों ने नालसार के समर्थन में बयान जारी कर BCI अध्यक्ष और CJI के NLSIU दीक्षांत समारोह में शामिल होने पर आपत्ति जताई थी।
- 23 अगस्त को सहमति और मतदान: CJI के साथ बैठक के बाद NLSIU छात्रों ने 23 अगस्त को मतदान किया और इस बात पर सहमति जताई कि बिना किसी व्यवधान के CJI की उपस्थिति में समारोह हो और BCI अध्यक्ष इसमें शामिल न हों। NLSIU के कुलाधिपति (Chancellor) के रूप में CJI सूर्य कांत ने छात्रों से मुलाकात की। 23 अगस्त को हुए मतदान में अधिकांश छात्रों ने बिना किसी विरोध या व्यवधान के CJI की उपस्थिति में समारोह में शामिल होने पर सहमति जताई।
- 25 अगस्त की नई शर्त और रद्दीकरण: 25 अगस्त को छात्रों के सामने सार्वजनिक पत्र जारी करने की नई शर्त रखी गई। सहमति न बनने पर NLSIU प्रशासन ने “अपरिहार्य परिस्थितियों” का हवाला देते हुए 2026 बैच का दीक्षांत समारोह पूरी तरह रद्द कर दिया।
- अचानक बदली शर्त (25 अगस्त): दो दिन बाद छात्रों के सामने एक नई शर्त रखी गई कि उन्हें CJI को “सार्वजनिक रूप से आमंत्रित” करने वाला पत्र जारी करना होगा। जब छात्रों ने इस शर्त को मानने से इनकार कर दिया, तो दीक्षांत समारोह को “अपरिहार्य परिस्थितियों” का हवाला देकर रद्द कर दिया गया।
प्रशासन की पारदर्शिता पर सवाल
NALSAR की स्टूडेंट बार काउंसिल ने NLSIU प्रशासन द्वारा दीक्षांत समारोह रद्द करने के लिए केवल “अपरिहार्य परिस्थितियों” (Unavoidable Circumstances) का हवाला देने की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि एक प्रमुख कानूनी संस्थान से जिस पारदर्शिता की उम्मीद की जाती है, यह फैसला उस कसौटी पर खरा नहीं उतरता।
NALSAR SBC की प्रमुख टिप्पणी
NALSAR स्टूडेंट बार काउंसिल ने अपने बयान में कहा: “यदि ‘सार्वजनिक पत्र’ जारी करने का यह अनुरोध CJI कार्यालय की ओर से आया था, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसा प्रतीत होता है कि CJI कार्यालय ने छात्रों के व्यापक हितों के ऊपर अपने कार्यालय के लिए अनुकूल सार्वजनिक माहौल बनाने को प्राथमिकता दी। हम NLSIU के 2026 बैच के छात्रों के सैद्धांतिक रुख को सलाम करते हैं।”
NALSAR Student Vs BCI-VII: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Issue)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित संस्थान | NLSIU (बेंगलुरु) और NALSAR (हैदराबाद) |
| मुख्य मुद्दा | NLSIU के दीक्षांत समारोह का रद्द होना और CJI को सार्वजनिक रूप से आमंत्रित करने की शर्त। |
| SBC का स्टैंड | NLSIU के छात्रों के सैद्धांतिक रुख का समर्थन; समारोह रद्द होने को “क्रूर” (Cruel) बताया। |
| विवाद की जड़ | BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा और CJI की दीक्षांत समारोह में उपस्थिति के खिलाफ छात्रों का विरोध। |

