Wednesday, October 28, 2026
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Codeine-based Cough Syrup: कोडीन कफ सिरप नशे के लिए डायवर्ट किए जाने पर लागू होगा NDPS एक्ट; सिर्फ निर्धारित मात्रा होने से छूट नहीं

मुख्य कानूनी निष्कर्ष

  1. केवल अनुमत मात्रा से NDPS से सुरक्षा नहीं: अदालत ने माना कि केवल कोडीन की अनुमत मात्रा होना ही NDPS एक्ट से स्वतः सुरक्षा नहीं देता। यह छूट केवल तभी लागू होती है जब दवा चिकित्सकीय अभ्यास (Therapeutic Practice) और वास्तविक इलाज के उपयोग के लिए रखी या बेची गई हो।
  2. व्यावसायिक मात्रा और संपूर्ण मिश्रण का नियम (Entire Mixture Rule): हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब कफ सिरप का उपयोग नशे या तस्करी के लिए किया जाता है, तो NDPS एक्ट के तहत मात्रा तय करते समय केवल कोडीन का प्रतिशत नहीं, बल्कि पूरे सिरप/मिश्रण (Entire Mixture) के कुल वजन को गिना जाएगा।
  3. फैसले का मुख्य निष्कर्ष:“जब कोडीन-आधारित कफ सिरप का भंडारण, बिक्री या परिवहन नशे जैसे गैर-चिकित्सकीय उद्देश्यों के लिए किया जाता है, तो इसे NDPS अधिनियम के तहत ‘निर्मित दवा’ (Manufactured Drug) की श्रेणी में आने वाली कोडीन तैयारी माना जाएगा।”

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोडीन-युक्त कफ सिरप (Codeine-based Cough Syrup) के गैर-चिकित्सीय और अवैध व्यापार को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधिक व्याख्या दी है।

न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने ‘न्यू फेंसेडिल’ (New Phensedyl) कफ सिरप की 7.53 लाख बोतलों के अवैध डायवर्जन से जुड़े मामले में आरोपी भोला प्रसाद की जमानत याचिका खारिज करते हुए 1 सितंबर 2026 को यह निर्णय सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि भले ही कफ सिरप में कोडीन की मात्रा कानूनी रूप से अनुमेय (0.2%) सीमा के भीतर हो, लेकिन यदि इसका भंडारण, बिक्री या परिवहन चिकित्सा उद्देश्यों के बजाय नशे (Intoxication) के लिए किया जाता है, तो यह नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985 के तहत ‘निर्मित औषधि’ (Manufactured Drug) की श्रेणी में आएगा और इस पर कठोर NDPS प्रावधान लागू होंगे [भोला प्रसाद बनाम उत्तर प्रदेश राज्य]।

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उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक व्यवस्था

1. 1985 की अधिसूचना (एंट्री 35) की छूट की सीमाएं अदालत ने स्पष्ट किया कि 1985 की अधिसूचना की प्रविष्टि 35 के तहत मिलने वाली वैधानिक छूट स्वचालित (Automatic) नहीं है:

  • वैध चिकित्सीय उपयोग अनिवार्य: छूट केवल तभी मिलती है जब सिरप का निर्माण, परिवहन और बिक्री वास्तविक चिकित्सीय और चिकित्सीय अभ्यास (Therapeutic/Medicinal Practice) के लिए की गई हो।
  • नशे के लिए इस्तेमाल पर NDPS लागू: जब ऐसे सिरप का स्टॉक या बिक्री नशे के उद्देश्य से की जाती है, तो यह छूट स्वतः समाप्त हो जाती है और यह NDPS एक्ट के तहत एक प्रतिबंधित मादक पदार्थ बन जाता है।

2. कुल मिश्रण (Entire Mixture) का वजन माना जाएगा अदालत ने स्थापित सिद्धांत को दोहराया कि NDPS एक्ट के तहत वाणिज्यिक मात्रा (Commercial Quantity) का निर्धारण करते समय केवल शुद्ध कोडीन की मात्रा नहीं, बल्कि पूरे सिरप मिश्रण का कुल वजन गिना जाता है।

मामले की पृष्ठभूमि और अभियोजन के तथ्य

  • 7.53 लाख बोतलों का डायवर्जन: आरोपी भोला प्रसाद रांची स्थित ‘सैली ट्रेडर्स’ का प्रोप्राइटर व सुपर स्टॉकिस्ट था। रिकॉर्ड के अनुसार, उसकी फर्म ने सोनभद्र स्थित ‘मां कृपा मेडिकल’ को 3,66,000 बोतलें और ‘शिविच्छा फार्मा’ को 3,87,000 बोतलें (कुल 7,53,000 बोतलें) न्यू फेंसेडिल कफ सिरप बेची थीं।
  • फर्जी फर्में और अवैध तस्करी: जांच में सामने आया कि जिन फर्मों के नाम पर बिल काटे गए थे, वे कोई वास्तविक दवा कारोबार नहीं कर रही थीं। सोनभद्र में डिलीवरी दिखाने के बजाय माल को अन्य स्थानों पर नशे के कारोबार के लिए डायवर्ट कर दिया गया था और रास्ते से भारी मात्रा में सिरप बरामद किया गया था।
  • आरोपी का बचाव: बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि कफ सिरप में केवल 0.2% कोडीन थी और उसके पास वैध ड्रग लाइसेंस मौजूद था, इसलिए NDPS एक्ट के तहत अपराध नहीं बनता।

हाईकोर्ट द्वारा जमानत खारिज करने के मुख्य आधार

  1. व्यावसायिक पैमाने पर डायवर्जन के पुख्ता सबूत: केस डायरी, ट्रांसपोर्ट रिकॉर्ड्स, बैंक लेन-देन और गवाहों के बयानों से प्रथम दृष्टया स्पष्ट हुआ कि वैध लाइसेंस की आड़ में कफ सिरप की भारी खेप को नशे के अवैध बाजार में डायवर्ट किया गया था।
  2. लाइसेंस आपराधिक दायित्व से ढाल नहीं: अदालत ने माना कि वैध ड्रग लाइसेंस का होना अवैध डायवर्जन और तस्करी के मामलों में NDPS एक्ट की कठोरता से सुरक्षा प्रदान नहीं करता।

अंतिम आदेश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बरामद सामग्री की विशाल मात्रा, संगठित डायवर्जन और NDPS एक्ट की धारा 37 की कठोर शर्तों को देखते हुए आरोपी भोला प्रसाद की आपराधिक प्रकीर्ण जमानत अर्जी (Criminal Misc. Bail Application) को पूरी तरह खारिज कर दिया।

मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतइलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court)
पीठासीन न्यायाधीशन्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल
केस का शीर्षकBhola Prasad v. State of U.P.
मामला/सामग्री‘न्यू फेंसेडिल’ (New Phensedyl) कफ सिरप की 7.53 लाख बोतलों का डायवर्जन
मुख्य निर्णयजमानत अर्जी खारिज; गैर-चिकित्सकीय व नशे के उद्देश्य से कफ सिरप बेचना NDPS Act के तहत निर्मित दवा (Manufactured Drug) माना जाएगा।
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