Tuesday, September 15, 2026
HomeHigh CourtCase Transfer: वैवाहिक या घरेलू हिंसा मामलों में ऐसा कोई कठोर नियम...

Case Transfer: वैवाहिक या घरेलू हिंसा मामलों में ऐसा कोई कठोर नियम नहीं…हर कार्यवाही पत्नी की पसंद के स्थान पर ही ट्रांसफर की जाए; पढ़ें केस

हाईकोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और कानूनी तर्क

  • ‘पक्षकारों की सुविधा’ का तुलनात्मक मूल्यांकन (Comparative Convenience): अदालत ने कहा कि हालांकि पत्नी की सुविधा को उचित वजन दिया जाना चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पत्नी की हर मांग पर केस ट्रांसफर कर दिया जाए:“पक्षकारों की सुविधा निस्संदेह विचार किए जाने वाले कारकों में से एक है। हालांकि, ‘पक्षकारों की सुविधा’ का अर्थ केवल याचिकाकर्ता या पत्नी की सुविधा नहीं हो सकता। अदालत को दोनों पक्षों की तुलनात्मक सुविधा और कठिनाई का आकलन करना होता है और यह तय करना होता है कि न्याय के हित में स्थानांतरण आवश्यक है या नहीं।”केरल हाईकोर्ट
  • पुराने मेडिकल रिकॉर्ड और केवल उम्र का आधार अपर्याप्त: हाईकोर्ट ने ससुर की बीमारी के दावे को खारिज कर दिया क्योंकि उन्होंने 2012 का मेडिकल रिकॉर्ड पेश किया था। अदालत ने कहा कि हालिया चिकित्सा साक्ष्य के बिना केवल बढ़ती उम्र या पुरानी बीमारी की बात कहकर केस ट्रांसफर नहीं कराया जा सकता।
  • अन्य मामलों का लंबित होना ट्रांसफर की अनिवार्य वजह नहीं: अदालत ने माना कि कोल्लम में अन्य मुकदमों का लंबित होना घरेलू हिंसा के मामले को स्थानांतरित करने का कोई बाध्यकारी आधार नहीं बनता, खासकर तब जब इससे पीड़ित महिला की असुविधा बढ़ेगी।

कोच्चि: केरल हाईकोर्ट ने वैवाहिक एवं घरेलू विवादों से संबंधित मामलों के स्थानांतरण (Transfer Petitions) पर एक संतुलित और महत्वपूर्ण विधिक सिद्धांत प्रतिपादित किया है।

न्यायमूर्ति जोबिन सेबेस्टियन की एकल पीठ ने 70 वर्षीय ससुर और सास द्वारा नेदुमंगड की अदालत में चल रहे घरेलू हिंसा (DV Act) के मामले को कोल्लम स्थानांतरित करने की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता कोई ऐसा असाधारण आधार साबित नहीं कर सके जो पत्नी की असुविधा पर भारी पड़े [ट्रांसफर पिटीशन (क्रिमिनल)]। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यद्यपि वैवाहिक विवादों में पत्नी की सुविधा पर विचार किया जाता है, किंतु ऐसा कोई पूर्ण या कठोर नियम (Inflexible Rule) नहीं है कि प्रत्येक कार्यवाही अनिवार्य रूप से पत्नी की पसंद या मांग के अनुसार ही स्थानांतरित की जाए। अदालत का दायित्व दोनों पक्षों की “तुलनात्मक सुविधा और कठिनाई” (Comparative Convenience and Hardship) का निष्पक्ष मूल्यांकन कर न्यायहित में निर्णय लेना है।

उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक टिप्पणियां

1. ‘पक्षकारों की सुविधा’ केवल एक पक्ष तक सीमित नहीं केस ट्रांसफर के कानूनी मानदंडों का विश्लेषण करते हुए न्यायमूर्ति जोबिन सेबेस्टियन ने कहा: “पक्षकारों की सुविधा निस्संदेह विचार किए जाने वाले महत्वपूर्ण कारकों में से एक है। हालांकि, ‘पक्षकारों की सुविधा’ (Convenience of the Parties) की अभिव्यक्ति को केवल याचिकाकर्ता की सुविधा के रूप में नहीं समझा जा सकता। अदालत को दोनों पक्षों की तुलनात्मक सुविधा और कठिनाई का आकलन करना आवश्यक है और यह निर्धारित करना होता है कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में न्याय के हित में कार्यवाही का स्थानांतरण आवश्यक है या नहीं।”

2. कोई अनम्य या कठोर नियम नहीं (No Inflexible Rule)

  • पीठ ने पत्नी-केंद्रित दृष्टिकोण (Victim-centric Approach) के सिद्धांतों को स्पष्ट करते हुए कहा:“न्यायालय से पत्नी की सुविधा पर उचित विचार करने की अपेक्षा की जाती है, विशेष रूप से तब जब वह कथित वैवाहिक हिंसा से उत्पन्न कार्यवाहियों को आगे बढ़ा रही पीड़ित महिला हो। हालांकि, इस सिद्धांत को ऐसा कोई कठोर नियम निर्धारित करने के रूप में नहीं समझा जा सकता कि पत्नी द्वारा शुरू की गई प्रत्येक कार्यवाही आवश्यक रूप से उसकी पसंद के स्थान पर ही स्थानांतरित की जाए।”

3. पुरानी मेडिकल रिपोर्ट ट्रांसफर का ठोस आधार नहीं

  • याचिकाकर्ताओं (ससुर) ने अपने हृदय रोग और 70 वर्ष की आयु का हवाला दिया था।
  • अदालत ने नोट किया कि रिकॉर्ड पर प्रस्तुत मेडिकल दस्तावेज 15 नवंबर 2012 का था। वर्तमान शारीरिक असमर्थता या यात्रा करने में पूर्ण अक्षमता साबित करने के लिए कोई हालिया मेडिकल रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया गया था। केवल आयु-संबंधी बीमारियों का सामान्य दावा ट्रांसफर के लिए पर्याप्त आधार नहीं बन सकता।

Read The article; Maintenance To Wife: कानूनन तलाकशुदा महिला भी भरण-पोषण की हकदार है जब तक वह पुनर्विवाह न कर ले; तलाक से पूर्व पत्नी के भरण-पोषण का दायित्व समाप्त नहीं होता

मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि (घरेलू हिंसा अधिनियम का मामला)

  • मूल मामला: बहू (प्रतिवादी) ने अपने ससुर (70 वर्ष) और सास के खिलाफ घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 (PWDV Act) के तहत विभिन्न कानूनी अनुतोषों की मांग करते हुए न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट, नेदुमंगड (तिरुवनंतपुरम) के समक्ष परिवाद दायर किया था।
  • ट्रांसफर की मांग: ससुर और सास ने केरल हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की कि नेदुमंगड की अदालत उनके निवास कोल्लम से 70 किलोमीटर से अधिक (आने-जाने में 140 किमी) दूर है। उन्होंने वृद्धावस्था, बीमारी और कोल्लम में अन्य संबंधित मुकदमों के लंबित होने के आधार पर केस को जेएफसीएम-I, कोल्लम स्थानांतरित करने की प्रार्थना की।
  • पत्नी का विरोध: पत्नी ने ट्रांसफर का विरोध करते हुए दलील दी कि केस कोल्लम स्थानांतरित करने से उस पर भारी आर्थिक व शारीरिक बोझ पड़ेगा और उसके लिए पैरवी करना अत्यधिक कठिन हो जाएगा।

हाईकोर्ट का अंतिम निष्कर्ष

  1. अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप से इनकार: हाईकोर्ट ने माना कि कोल्लम में अन्य मामलों का लंबित होना घरेलू हिंसा के मामले को स्थानांतरित करने का कोई बाध्यकारी आधार नहीं है।
  2. समान अवसर का अधिकार मौजूद: नेदुमंगड अदालत की निष्पक्षता पर कोई पक्षपात (Bias) का आरोप नहीं था और याचिकाकर्ताओं को वहां अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर उपलब्ध है।
  3. याचिका खारिज: अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा बताई गई असुविधा पीड़ित महिला की कठिनाई से अधिक नहीं है, इसलिए ट्रांसफर याचिका खारिज कर दी गई।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: ट्रांसफर पिटीशन (क्रिमिनल) – घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत कार्यवाही का स्थानांतरण
  • प्रासंगिक कानून: घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 (PWDV Act); नागरिक प्रक्रिया संहिता की धारा 24 / CrPC की धारा 407 (केस ट्रांसफर शक्तियां)
  • विधिक प्रतिनिधित्व:
    • याचिकाकर्ताओं (सास-ससुर) की ओर से: अधिवक्ता प्रतीश पी.
    • प्रतिवादी (पत्नी) की ओर से: अधिवक्ता राहुल कृष्णन यू.एस.
  • पीठ: न्यायमूर्ति जोबिन सेबेस्टियन (केरल उच्च न्यायालय)

Case Transfer: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतकेरल उच्च न्यायालय
पीठासीन न्यायाधीशन्यायमूर्ति जोबिन सेबेस्टियन (Justice Jobin Sebastian)
संबंधित कानूनमहिला घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005 (DV Act)
याचिकाकर्ता70 वर्षीय ससुर और सास
मुख्य मुद्दाक्या मामलों के ट्रांसफर में ‘पक्षकारों की सुविधा’ का अर्थ केवल पत्नी की सुविधा है?
अदालत का फैसलाट्रांसफर याचिका खारिज; दोनों पक्षों की तुलनात्मक कठिनाई (Comparative Hardship) देखी जाएगी।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
scattered clouds
30 ° C
30 °
30 °
74 %
2.1kmh
42 %
Tue
35 °
Wed
35 °
Thu
35 °
Fri
35 °
Sat
34 °

Recent Comments