Saturday, October 31, 2026
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Just Lovers: जब दोनों पक्षों ने अपने-अपने जीवनसाथी से तलाक नहीं लिया था; तो शादी के झूठे वादे का प्रश्न ही नहीं उठता, धारा 69 BNS में हुई जमानत

हाईकोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और कानूनी तर्क

  • शादी की कानूनी असंभवता: पीठ ने पाया कि पीड़िता और आरोपी दोनों के पूर्व विवाह अस्तित्व में थे और किसी ने भी तलाक नहीं लिया था:“जब पीड़िता और याचिकाकर्ता दोनों ने अपने-अपने जीवनसाथी से तलाक नहीं लिया था, तो वे वैसे भी शादी नहीं कर सकते थे। शिकायत से ही पता चलता है कि शादी का वादा पीड़िता द्वारा तलाक लेने की शर्त पर निर्भर था। ऐसी स्थिति में याचिकाकर्ता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 का मामला प्रथम दृष्टया नहीं बनता है।” — हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
  • सहमति से साथ रहना (Consensual Relationship): अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 183 के तहत दर्ज पीड़िता के बयानों का अवलोकन करते हुए कहा कि पीड़िता बिना किसी बाहरी दबाव के अपनी स्वेच्छा से आरोपी के साथ रह रही थी।
  • अनुच्छेद 21 और व्यक्तिगत स्वतंत्रता: अदालत ने स्पष्ट किया कि मुकदमे के दौरान आरोपी को अनिश्चित काल के लिए जेल में रखना संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन है। आरोपी का दोष साबित होना मुकदमे की सुनवाई (Trial) का विषय है।

शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 (शादी के धोखेबाज वादे पर यौन संबंध) और बलात्कार के आरोपों पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधिक व्यवस्था दी है।

न्यायमूर्ति संदीप शर्मा की एकल पीठ ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 (बलात्कार), धारा 69 (धोखे से यौन संबंध) और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में याचिकाकर्ता को ₹2 लाख के निजी मुचलके और दो स्थानीय जमानतदारों की शर्त पर नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब पीड़िता और अभियुक्त दोनों पहले से विवाहित हों और उन्होंने अपने-अपने जीवनसाथी से कानूनी रूप से तलाक न लिया हो, तो वे विधि अनुसार विवाह करने में पूरी तरह असमर्थ (Legally Incompetent to Marry) थे। ऐसी स्थिति में शादी के झूठे वादे पर सहमति प्राप्त करने का अपराध प्रथम दृष्टया (Prima Facie) नहीं बनता।

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उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक टिप्पणियां

1. पहले से विवाहित पक्षों के बीच विवाह के वादे का कोई विधिक आधार नहीं धारा 69 BNS के अवयवों का विश्लेषण करते हुए न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने कहा: “इस न्यायालय का मानना है कि शादी के वादे का कोई प्रश्न ही नहीं उठता, विशेष रूप से तब जब अभियुक्त और पीड़िता दोनों की पूर्व शादी का तथ्य दोनों की पूरी जानकारी में था। जब तक पीड़िता और याचिकाकर्ता ने अपने-अपने जीवनसाथी से तलाक नहीं लिया था, वे कानूनी रूप से शादी नहीं कर सकते थे। शिकायत से ही स्पष्ट होता है कि याचिकाकर्ता ने पीड़िता द्वारा तलाक लिए जाने की शर्त पर शादी का वादा किया था। इन तथ्यों के आलोक में, प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 के तहत कोई मामला नहीं बनता है।”

2. स्वैच्छिक सहमति और वयस्कता (Consensual Relationship)

  • अदालत ने नोट किया कि 31 वर्षीय पीड़िता ने BNSS की धारा 183 (पूर्ववर्ती धारा 164 CrPC) के तहत दर्ज अपने बयान में स्पष्ट किया था कि वह बिना किसी बाहरी दबाव के अपनी मर्जी से याचिकाकर्ता के साथ रह रही थी।
  • अदालत ने अभियोजन पक्ष के इस तर्क को खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता ने पीड़िता की लाचारी या भोलेपन का अनुचित लाभ उठाया था।

3. अनिश्चितकालीन जेल व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन (अनुच्छेद 21)

  • पीठ ने रेखांकित किया कि मामले में पहली बार एफआईआर 22 जून 2026 को दर्ज कराई गई, जबकि दोनों लंबे समय से साथ रह रहे थे।
  • अभियुक्त का दोष ट्रायल के दौरान ठोस साक्ष्यों से सिद्ध होना है, और ट्रायल पूरा होने से पहले उसे अनिश्चितकाल तक जेल में रखना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है।

मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि

  • संबंधों की शुरुआत: 31 वर्षीय पीड़िता का विवाह 2017 में हुआ था, लेकिन वैवाहिक विवाद के कारण वह अलग रह रही थी। वर्ष 2022 में वह याचिकाकर्ता (जो पेशे से एक ज्योतिषी / Astrologer है) के संपर्क में आई।
  • पीड़िता के आरोप:
    • पीड़िता का आरोप था कि ज्योतिषी ने उसकी कुंडली देखकर कहा कि उसके वैवाहिक जीवन में सुख नहीं है और उसे पति से तलाक लेने की सलाह दी।
    • आरोप लगाया गया कि शादी का झांसा देकर याचिकाकर्ता ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।
    • जब पीड़िता को पता चला कि आरोपी के अन्य महिलाओं के साथ भी संबंध हैं, तो विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई, जिसके बाद 22 जून 2026 को एफआईआर दर्ज कराई गई।
  • दर्ज धाराएं: पुलिस ने BNS की धारा 64 (बलात्कार), 69 (शादी के झूठे वादे पर संबंध) और SC/ST Act की धारा 3(1)(r) व 3(1)(s) के तहत केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था।

हाईकोर्ट का अंतिम आदेश

  1. नियमित जमानत मंजूर: उच्च न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए अभियुक्त को नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
  2. जमानत की शर्तें: याचिकाकर्ता को ₹2 लाख का पर्सनल बॉन्ड और समान राशि के दो स्थानीय मुचलके ट्रायल कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: आपराधिक नियमित जमानत याचिका (BNS की धारा 64, 69 और SC/ST Act)
  • प्रासंगिक कानून: भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 69 एवं 64; भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 183 एवं 483; संविधान का अनुच्छेद 21
  • विधिक प्रतिनिधित्व:
    • याचिकाकर्ता (अभियुक्त) की ओर से: अधिवक्ता इमरान खान
    • राज्य (अभियोजन) की ओर से: अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) राजन कहोल
  • पीठ: न्यायमूर्ति संदीप शर्मा (हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय)

Just Lovers: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतहिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय
पीठासीन न्यायाधीशन्यायमूर्ति संदीप शर्मा (Justice Sandeep Sharma)
संबंधित कानूनBNS की धारा 64, धारा 69 और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम
मुख्य विधिक मुद्दाक्या शादीशुदा व्यक्तियों के बीच तलाक के बिना ‘शादी के झूठे वादे’ (Section 69 BNS) का मामला बनता है?
अदालत का फैसलाजमानत मंजूर; प्रथम दृष्टया धारा 69 BNS का अपराध नहीं बनता।
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