Thursday, September 17, 2026
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Witnesses To Will: वसीयत के गवाहों के मुकरने पर संपत्ति का कानूनी बंटवारा; कानून का वैधानिक ढांचा ही तय करेगा संपत्ति का बंटवारा, विश्लेषण पढ़ें

वसीयत खारिज होने पर कैसे बंटती है संपत्ति?

1.1. धारा 8 एवं 10 लागू होगी:हिंदू पुरुष (Hindu Male) की मृत्यु पर.

संपत्ति सबसे पहले क्लास-1 वारिसों (Class-I Heirs) जैसे— पत्नी, बेटे, बेटी और मां में बराबर हिस्सों में बांटी जाती है।

2.2. धारा 15 एवं 16 लागू होगी:हिंदू महिला (Hindu Female) की मृत्यु पर.

संपत्ति का हस्तांतरण कानून द्वारा निर्धारित 5 प्राथमिकता श्रेणियों (Priority Order) के आधार पर होता है।

हिंदू महिला की संपत्ति के उत्तराधिकार का क्रम (धारा 15(1))

यदि किसी हिंदू महिला की वसीयत खारिज हो जाती है, तो उनकी संपत्ति प्राथमिकता के अनुसार निम्नलिखित क्रम में बंटती है:

  1. प्रथम श्रेणी (First Priority): बेटे, बेटियां (मृत बच्चों के बच्चे भी शामिल) और पति।
  2. द्वितीय श्रेणी (Second Priority): पति के कानूनी वारिस।
  3. तृतीय श्रेणी (Third Priority): माता-पिता।
  4. चतुर्थ श्रेणी (Fourth Priority): पिता के वारिस।
  5. पंचम श्रेणी (Fifth Priority): माता के वारिस।

मुख्य निष्कर्ष: अदालत केवल दस्तावेज मौजूद होने से वसीयत को वैध नहीं मानती; गवाहों द्वारा सही निष्पादन साबित न कर पाने पर विधायिका द्वारा बनाए गए उत्तराधिकार कानून ही सर्वोपरि लागू होते हैं।

नई दिल्ली: भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 (Indian Succession Act, 1925) की धारा 63(c) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA) की धारा 67 के तहत वसीयत को अदालत में साबित करने के लिए कम से कम एक अनुप्रमाणक साक्षी (Attesting Witness) का परीक्षण अनिवार्य है।

ऐसी स्थिति में वसीयतकर्ता की व्यक्तिगत इच्छा निष्फल हो जाती है और मृतक की संपत्ति का वितरण हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 (Hindu Succession Act, 1956) के तहत निर्वसीयती उत्तराधिकार (Intestate Succession) के नियमों के अनुसार ही होता है। यदि वसीयत के सभी गवाह अदालत में पक्षद्रोही (Hostile) हो जाते हैं—अर्थात वे वसीयत के निष्पादन से मुकर जाते हैं या उसकी जानकारी होने से इनकार कर देते हैं—तो कानून की दृष्टि में वह वसीयत ‘अस्तित्वहीन’ (Non-est) मान ली जाती है।

गवाहों के मुकरने पर साक्ष्य के विधिक परिणाम

  • अनिवार्य निष्पादन का अभाव: धारा 63(c) के तहत दो गवाहों का होना और उनका वसीयतकर्ता को हस्ताक्षर करते देखना अनिवार्य है। यदि गवाह अदालत में निष्पादन को नकार देते हैं, तो केवल हस्ताक्षरित या पंजीकृत दस्तावेज होने मात्र से वसीयत मान्य नहीं हो सकती।
  • BSA की धारा 70 की सीमाएं: भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 70 (पूर्ववर्ती साक्ष्य अधिनियम की धारा 71) अन्य साक्ष्यों से निष्पादन साबित करने की अनुमति देती है, लेकिन यह केवल एक समर्थकारी प्रावधान है। यदि सभी गवाह निष्पादन से पूरी तरह इनकार कर दें, तो निष्पादन के प्रमाण के अभाव में वसीयत स्वतः विफल हो जाती है।
  • वसीयत विफल होने का कानूनी प्रभाव: वसीयत के अप्रमाणित होते ही कानून यह मानता है कि वसीयतकर्ता की मृत्यु बिना वसीयत (Intestate) हुई है।

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गवाह मुकरने के बाद हिंदू उत्तराधिकार का निर्धारण

वसीयत निरस्त होने पर मृतक (पुरुष या महिला) के आधार पर संपत्ति का बंटवारा निम्नलिखित वैधानिक श्रेणियों के तहत होता है:

उत्तराधिकार का प्रकारशासी वैधानिक प्रावधानवारिसों की प्राथमिकता व वितरण क्रम
हिंदू महिला की मृत्यु परधारा 15 एवं 16 (HSA, 1956)1. प्रथम वरीयता: पुत्र, पुत्री (मृत पुत्र/पुत्री के बच्चे शामिल) और पति।
2. द्वितीय: पति के वारिस।
3. तृतीय: माता और पिता।
4. चतुर्थ: पिता के वारिस।
5. पंचम: माता के वारिस।
हिंदू पुरुष की मृत्यु परधारा 8 एवं 10 (HSA, 1956)1. प्रथम वर्ग (Class-I): पुत्र, पुत्री, विधवा, मां, मृत बच्चों के वंशज (सभी में बराबर हिस्सा)।
2. द्वितीय वर्ग (Class-II): यदि क्लास-1 वारिस न हों (पिता, भाई, बहन आदि)।
3. गोत्रज (Agnates) व बंधु (Cognates): यदि क्लास-2 भी न हों।

मुख्य विधिक निष्कर्ष

  • कानून की प्राथमिकता: गवाहों के मुकरने की स्थिति में अदालतें वसीयत में व्यक्त की गई व्यक्तिगत इच्छा के बजाय संसद द्वारा निर्धारित वैधानिक उत्तराधिकार ढांचे को लागू करने के लिए बाध्य हैं।
  • विशेष सुरक्षा उपाय: वसीयत को अदालत में विफल होने से बचाने के लिए विश्वसनीय व युवा गवाहों का चयन, समकालीन मेडिकल प्रमाण पत्र, निष्पादन की वीडियो रिकॉर्डिंग और पंजीयन कराना कानूनी रूप से आवश्यक माना जाता है।

Witnesses To Will: गवाहों के मुकरने पर क्या कहता है कानून?

कानूनी बिंदुमुख्य नियम / धारा
अनिवार्य शर्तISA, 1925 (धारा 63c): वसीयत पर कम से कम 2 गवाहों के हस्ताक्षर होने चाहिए।
कोर्ट में साबित करनाBSA, 2023 (धारा 67) / IEA (धारा 68): कम से कम एक अटेस्टिंग गवाह को कोर्ट में आकर निष्पादन साबित करना अनिवार्य है।
गवाह के मुकरने का असरयदि सभी गवाह इनकार कर दें, तो वसीयत साबित न होने के कारण स्वतः खारिज हो जाती है।
परिणामसंपत्ति का बंटवारा बिना-वसीयत यानी बिना वसीयत उत्तराधिकार (Intestate Succession) के तहत होता है।
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