ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल और अब तक की कार्रवाई
- अधिकारियों का इस्तीफा: जून में दान चोरी का मामला सामने आने और एफआईआर (FIR) दर्ज होने के बाद आठ लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। इसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सहित तीन अधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।
- नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति: हाल ही में ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए भारतीय वायु सेना के पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा (जिन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व किया था) को ट्रस्ट का पहला सीईओ (CEO) नियुक्त किया गया है। वहीं, सेवानिवृत्त IFS अधिकारी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव बनाया गया है।
पारदर्शिता और दान प्रबंधन पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
याचिकाकर्ताओं की ओर से मंदिर ट्रस्ट को भंग करने और प्राप्त सभी दान का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की गई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:
- SIT ट्रस्ट के अधीन नहीं है, बल्कि यह सीधे अदालत द्वारा गठित की गई है और केवल अदालत के प्रति जवाबदेह है।
- सुप्रीम कोर्ट मंदिर में आने वाले दान के प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश और सुधार (Reforms) जारी करने पर विचार कर रहा है।
25 सितंबर की समय-सीमा और डिफ़ॉल्ट ज़मानत का कानूनी पहलू
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि मामले में पहली गिरफ्तारी से 90 दिनों की अवधि 25 सितंबर 2026 को समाप्त हो रही है। यदि इस तिथि तक अदालत में आरोप पत्र (Chargesheet) दाखिल नहीं किया जाता है, तो गिरफ्तार आरोपी दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 167(2) [वर्तमान में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 187] के तहत डिफ़ॉल्ट ज़मानत (Default Bail / Statutory Bail) पाने के हकदार हो जाएंगे। इसीलिए SIT 25 सितंबर से पहले चार्जशीट दाखिल करने की पूरी तैयारी कर चुकी है।
नई दिल्ली: अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले दान (Donations) के कथित गबन और चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार और विशेष जांच दल (SIT) ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय में एक सनसनीखेज स्थिति रिपोर्ट (Status Report) दाखिल की है।
SIT 25 सितंबर 2026 तक अपनी पहली चार्जशीट दाखिल कर देगी
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ दान चोरी की स्वतंत्र जांच और मंदिर के वित्तीय लेन-देन में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को अवगत कराया कि मंदिर परिसर में स्थापित सीसीटीवी कैमरों के फुटेज विश्लेषण से चोरी की कुल 105 घटनाएं सामने आई हैं। साथ ही अदालत को सूचित किया गया कि पहली गिरफ्तारी के बाद 90 दिनों की वैधानिक अवधि 25 सितंबर को समाप्त हो रही है, अतः अभियुक्तों को वैधानिक/डिफॉल्ट जमानत (Default Bail under Section 187 BNSS / 167(2) CrPC) मिलने से रोकने के लिए SIT 25 सितंबर 2026 तक अपनी पहली चार्जशीट दाखिल कर देगी।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत प्रमुख बिंदु एवं विधिक दलीलें
1. सीसीटीवी साक्ष्य और 90 दिनों की परिसीमा: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में एसआईटी की सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट पेश करते हुए कहा:“पहली गिरफ्तारी के आधार पर 90 दिनों की वैधानिक मियाद 25 सितंबर को पूरी हो रही है। यदि इस अवधि के भीतर आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया तो अभियुक्त कानूनन डिफॉल्ट जमानत (Statutory Bail) के हकदार हो जाएंगे। इसलिए एसआईटी 25 सितंबर से पहले ट्रायल कोर्ट में अपनी पहली चार्जशीट दाखिल कर देगी।”
- रिपोर्ट में बताया गया कि मंदिर के हाई-डेफिनिशन कैमरों की फुटेज खंगालने पर 105 बार दान राशि की चोरी पकड़ी गई है, जिसके आधार पर गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ अकाट्य तकनीकी व दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए गए हैं।
2. ‘एसआईटी ट्रस्ट के अधीन नहीं, सीधे सुप्रीम कोर्ट के प्रति जवाबदेह है’: CJI सूर्यकांत
- सुनवाई के दौरान कुछ याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि मौजूदा ट्रस्ट के पद पर रहते हुए जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती, इसलिए राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल भंग (Dissolve) किया जाए।
- मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मांग को खारिज करते हुए स्पष्ट किया:“एसआईटी ट्रस्ट के अधीन काम नहीं कर रही है। इसका गठन अदालत की निगरानी में हुआ है और यह सीधे सर्वोच्च न्यायालय के प्रति जवाबदेह व उत्तरदायी है।”
3. मंदिर के वित्तीय सुधारों और दान की पारदर्शिता पर सुप्रीम कोर्ट का रुख
- शीर्ष अदालत ने दोहराया कि वह मंदिर में प्राप्त होने वाले दान के रख-रखाव, ऑडिटिंग और सार्वजनिक पारदर्शिता को लेकर संस्थागत सुधारात्मक निर्देश जारी करने पर विचार कर रही है:“सुधारों के उद्देश्य से कुछ अन्य दिशा-निर्देश आवश्यक हैं, जिन्हें हम जारी करेंगे। हम इस पहलू पर भी विचार कर रहे हैं कि दान की राशि का प्रबंधन कैसे होना चाहिए और किस प्रकार की पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।”
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रशासनिक फेरबदल
- जून 2026 में एफआईआर और 8 गिरफ्तारियां: जून 2026 में राम मंदिर के दानपात्रों और दान प्रबंधन में चोरी का खुलासा होने पर प्राथमिकी दर्ज की गई और 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
- ट्रस्ट के पदाधिकारियों का इस्तीफा: विवाद सामने आने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सहित तीन प्रमुख पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद पूर्व आईएफएस (IFS) अधिकारी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया।
- पहला सीईओ नियुक्त: सितंबर 2026 के प्रारंभ में ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए भारतीय वायुसेना के पश्चिमी वायु कमान के पूर्व प्रमुख (ऑपरेशन सिंदूर फेम) एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा को ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया।
- दो स्तरीय एसआईटी जांच:
- शुरुआत में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक एसआईटी बनाई थी।
- जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद यूपी के आईजीपी किरण एस. की अध्यक्षता में दूसरी विशेष एसआईटी का पुनर्गठन किया गया और वित्तीय ट्रेल की जांच के लिए एक स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिटर (Forensic Auditor) को शामिल किया गया, जो वर्तमान में जांच की कमान संभाल रही है।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: दान चोरी एवं वित्तीय पारदर्शिता बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट व अन्य [रिट याचिकाएं (सिविल) – भारत का सर्वोच्च न्यायालय]
- प्रासंगिक कानून: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 187 / पूर्ववर्ती दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 167(2) (डिफॉल्ट/वैधानिक जमानत – 60 या 90 दिनों में चार्जशीट की अनिवार्यता); भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 303 (चोरी), 316 (आपराधिक विश्वासघात) एवं 61 (आपराधिक षड्यंत्र); भारत का संविधान – अनुच्छेद 32 एवं 142 (पूर्ण न्याय की असाधारण शक्ति)
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- संजय दत्त बनाम राज्य (सुप्रीम कोर्ट संविधान पीठ) एवं एम. रविंद्रन बनाम इंटेलिजेंस ऑफिसर, DRI (2020, सुप्रीम कोर्ट) — ‘यदि 90 दिनों की अवधि समाप्त होने से पूर्व विधिवत आरोप पत्र दाखिल नहीं होता है, तो अभियुक्त को डिफॉल्ट जमानत का अनडिफीटेबल (Undefeatable) मौलिक अधिकार प्राप्त हो जाता है।’
- गुरुवायुर देवस्वोम प्रबंध समिति बनाम सी.के. राजन (सुप्रीम कोर्ट) — ‘सार्वजनिक धार्मिक न्यासों और मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान की सुरक्षा और वित्तीय शुचिता सुनिश्चित करने के लिए संवैधानिक अदालतें पारदर्शी व्यवस्था व दिशा-निर्देश जारी करने की पूर्ण हकदार हैं।’
- पीठ: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना (सर्वोच्च न्यायालय)
- अभियोजन प्रतिनिधित्व: भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (उत्तर प्रदेश राज्य एवं एसआईटी की ओर से)
Ayodhya Ram Mandir:मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठ (Judges) | CJI सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना |
| राज्य सरकार का पक्ष | सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता |
| जांच एजेंसी | सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाली SIT (आईजीपी किरण एस. के नेतृत्व में) |
| मुख्य साक्ष्य | सीसीटीवी कैमरों में गबन/चोरी की 105 घटनाएं रिकॉर्ड |
| चार्जशीट की समय सीमा | 25 सितंबर (90 दिनों की वैधानिक अवधि समाप्त होने से पूर्व) |

