सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश
- राज्य सरकार की सहमति: पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को सूचित किया कि राज्य सरकार को जांच आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करने और पुनः चुनाव कराने में कोई आपत्ति नहीं है।
- निगरानी समिति का गठन: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश 1 सप्ताह के भीतर एक निगरानी समिति का गठन करेंगे और 2-3 वरिष्ठ वकीलों को चुनाव पर्यवेक्षक (Observers) नियुक्त करेंगे।
- अनिवार्य वीडियोग्राफी: नामांकन पत्र दाखिल करने, चुनाव चिह्न आवंटन और मतदान के पूरे चरण की वीडियोग्राफी कराना अनिवार्य होगा।
- परिणामों पर रोक: चुनाव परिणाम तब तक घोषित नहीं किए जाएंगे जब तक कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, निगरानी समिति की रिपोर्ट के आधार पर संतुष्ट न हो जाएं कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष हुए हैं।
नई दिल्ली/चंडीगढ़: स्थानीय निकाय चुनावों (Local Body / Municipal Elections) में नामांकन प्रक्रिया की शुचिता, निष्पक्ष एवं स्वतंत्र चुनाव (Free and Fair Elections) के संवैधानिक सिद्धांत, सत्तापक्ष द्वारा प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग कर विपक्षी प्रत्याशियों को पर्चा दाखिल करने से रोकने की विकृति, तथा अनुच्छेद 142 के तहत न्यायिक निगरानी में पुनर्मतदान कराने पर सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
50 नगर पालिका वार्डों के चुनाव पूरी तरह रद्द (Set aside) कर दिए
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन-सदस्यीय विशेष पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति निर्मलजीत कौर आयोग (Justice Nirmaljit Kaur Commission) की जांच रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए यह सख्त आदेश पारित किया। शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा गठित एक न्यायिक निगरानी समिति और वरिष्ठ वकीलों की बतौर पर्यवेक्षक निगरानी में छह सप्ताह के भीतर इन सभी 50 वार्डों में नए सिरे से निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं। शीर्ष अदालत ने न्यायिक जांच में बड़े पैमाने पर धांधली, हिंसा और नामांकन पत्रों की छीना-झपटी सिद्ध होने के बाद पंजाब के 50 नगर पालिका वार्डों के चुनाव पूरी तरह रद्द (Set aside) कर दिए हैं।
न्यायिक जांच आयोग (जस्टिस निर्मलजीत कौर) के चौंकाने वाले खुलासे
मार्च 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाओं में लगाए गए गंभीर आरोपों की जमीनी हकीकत जानने के लिए पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति निर्मलजीत कौर को एक-सदस्यीय जांच आयोग नियुक्त किया था। आयोग की जांच रिपोर्ट में चुनावी प्रक्रिया को दूषित करने वाले गंभीर तथ्य दर्ज किए गए:
- नामांकन पत्रों की छीना-झपटी और विनाश: विपक्षी उम्मीदवारों के नामांकन फार्म जबरन छीने गए, फाड़े गए और नष्ट कर दिए गए ताकि वे चुनाव मैदान में उतर ही न सकें।
- शारीरिक हमले, धमकी और अवैध हिरासत: प्रत्याशियों और उनके प्रस्तावकों के साथ मारपीट की गई, उन्हें डराया-धमकाया गया और कई जगहों पर नामांकन दाखिल करने से रोकने के लिए अवैध रूप से रोका या हिरासत में रखा गया।
- हाईकोर्ट के आदेशों की खुली अवहेलना: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा पूरी नामांकन प्रक्रिया की अनिवार्य वीडियोग्राफी कराने के स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद अधिकारियों ने जानबूझकर वीडियोग्राफी नहीं कराई ताकि हिंसा और छीना-झपटी रिकॉर्ड न हो सके।
जिन 50 वार्डों के चुनाव रद्द किए गए: पटियाला और मोगा का ब्योरा
| जिला / निकाय क्षेत्र | प्रभावित वार्ड | धांधली का स्वरूप एवं आयोग के निष्कर्ष |
| पटियाला (Patiala) | 28 वार्ड | विपक्षी प्रत्याशियों को नामांकन पत्र दाखिल करने और चुनाव लड़ने से पूरी तरह रोका गया। दो अन्य वार्डों में फर्जी व एकाधिक मतदान (Bogus Voting) और मतदाताओं को डराने-धमकाने के साक्ष्य भी दर्ज किए गए। |
| मोगा — धर्मकोट (Dharamkot) | 07 वार्ड | नामांकन प्रक्रिया में खुला व्यवधान, उम्मीदवारों पर दबाव बनाकर जबरन नाम वापस (Coerced Withdrawals) कराना तथा वैध नामांकनों को अनुचित ढंग से खारिज करना। |
| मोगा — बाघापुराना (Baghapurana) | 15 वार्ड (सभी वार्ड) | सभी 15 वार्डों में विपक्षी दलों के उम्मीदवारों को सुनियोजित और व्यवस्थित तरीके से पर्चा भरने से रोका गया। |
| कुल योग | 50 वार्ड | चुनाव पूर्णतः निरस्त घोषित; नए सिरे से पुनर्मतदान का आदेश। |
राज्य सरकार का रुख और कपिल सिब्बल का बयान
सुनवाई के दौरान पंजाब राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आयोग के निष्कर्षों पर कोई विवाद न करते हुए अदालत को अवगत कराया:
- राज्य सरकार को न्यायमूर्ति निर्मलजीत कौर जांच आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करने और प्रभावित वार्डों में नए सिरे से निष्पक्ष चुनाव कराने पर कोई आपत्ति नहीं है।
- राज्य के इस रुख के बाद पीठ ने चुनाव रद्द करने और पुनर्मतदान के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की प्रक्रिया पूरी की।
निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने हेतु सुप्रीम कोर्ट के 5 कड़े निर्देश
- हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी समिति:
- पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एक सप्ताह के भीतर एक निगरानी समिति (Monitoring Committee) का गठन करेंगे, जिसकी अध्यक्षता उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे।
- वरिष्ठ अधिवक्ताओं की पर्यवेक्षक (Observers) के रूप में नियुक्ति:
- हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दो से तीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं को स्वतंत्र चुनाव पर्यवेक्षक नामित करेंगे जो मौके पर रहकर पूरी प्रक्रिया का निष्पक्ष संचालन सुनिश्चित करेंगे।
- पूरी प्रक्रिया की अनिवार्य वीडियोग्राफी:
- नए सिरे से होने वाले चुनावों में नामांकन पत्र दाखिल करने, चुनाव चिह्नों के आवंटन तथा मतदान (Polling) के दिन की संपूर्ण कार्यवाही की अनिवार्य वीडियोग्राफी कराई जाएगी।
- हस्तक्षेप की शिकायतों का तत्काल न्यायिक निपटारा:
- यदि किसी भी प्रत्याशी को रोकने या धमकी देने की कोई शिकायत आती है, तो निगरानी समिति तुरंत उसकी जांच करेगी और आवश्यक न्यायिक कार्रवाई हेतु मामला हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संदर्भित करेगी।
- हाईकोर्ट सीजे की संतुष्टि के बाद ही घोषित होंगे परिणाम:
- निगरानी समिति की रिपोर्ट के आधार पर जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पूरी तरह आश्वस्त हो जाएंगे कि चुनाव बिना किसी दबाव या कदाचार के स्वतंत्र व निष्पक्ष रूप से संपन्न हुए हैं, तभी अंतिम चुनाव परिणाम घोषित किए जा सकेंगे।
नजीर का स्पष्टीकरण: शीर्ष अदालत ने आदेश में यह स्पष्ट रेखांकित किया कि ये असाधारण दिशा-निर्देश इस मामले के विशिष्ट और अभूतपूर्व तथ्यों (Peculiar Facts) तक ही सीमित हैं और इन्हें भविष्य के सामान्य उपचुनावों के लिए नजीर (Precedent) नहीं माना जाएगा।
विधिक एवं संवैधानिक विश्लेषण: क्या कहता है कानून?
- स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव—संविधान का आधारभूत ढांचा (Basic Structure):
- इंदिरा नेहरू गांधी बनाम राज नारायण (1975) और टी.एन. शेषन (1995) मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने स्थापित किया है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की आत्मा और संविधान के मूल ढांचे का अभिन्न अंग हैं।
- जहां नागरिकों या प्रत्याशियों को नामांकन करने की बुनियादी स्वतंत्रता से ही वंचित कर दिया जाए, वहां का चुनाव कानून की नजर में चुनाव नहीं बल्कि छलावा बन जाता है।
- संविधान का भाग IX-A (अनुच्छेद 243ZA – नगर पालिकाओं के चुनाव):
- नगर पालिकाओं के चुनाव कराने की जिम्मेदारी राज्य चुनाव आयोग की होती है। यदि चुनावी तंत्र में गंभीर व्यवस्थागत विफलता आती है और हिंसा के जरिए पूरी प्रक्रिया दूषित हो जाती है, तो उच्च न्यायपालिका अनुच्छेद 142 के तहत पूर्ण न्याय प्रदान करने हेतु चुनाव रद्द करने का असाधारण अधिकार रखती है।
- मोहिंदर सिंह गिल बनाम मुख्य चुनाव आयुक्त (1978, संविधान पीठ):
- सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी थी कि चुनावी लोकतंत्र में हर उस विकृति को दूर करने का न्यायिक कर्तव्य है जो मतदाताओं की वास्तविक इच्छा को विकृत करती हो।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: सीमा शर्मा बनाम पंजाब राज्य व अन्य [सिविल अपील / रिट याचिकाएं – सर्वोच्च न्यायालय]
- पीठ: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना (3-जज विशेष पीठ)
- आदेश की तिथि: 28 सितंबर 2026 (सूचीबद्ध/अपलोड: अक्टूबर 2026)
- विधिक प्रतिनिधित्व:
- पंजाब राज्य की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल
- याचिकाकर्ताओं (विपक्षी प्रत्याशियों) की ओर से: वरिष्ठ व कनिष्ठ अधिवक्तागण
- जांच आयोग: न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) निर्मलजीत कौर (पूर्व न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट)
- प्रासंगिक कानून एवं संवैधानिक प्रावधान:
- भारत का संविधान – अनुच्छेद 243ZA, अनुच्छेद 142 एवं अनुच्छेद 32
- पंजाब राज्य चुनाव आयोग अधिनियम, 1994 एवं नगर पालिका चुनाव नियम
- अंतिम परिणाम: 50 वार्डों (पटियाला के 28 तथा मोगा के 22 वार्ड) के चुनाव पूर्णतः निरस्त; हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की निगरानी समिति के अधीन 6 सप्ताह के भीतर वीडियोग्राफी के साथ नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश।
Municipal Elections: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | सर्वोच्च न्यायालय (CJI सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्या बागची, जस्टिस वी. मोहना) |
| जांच आयोग प्रमुख | न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) निर्मलाजीत कौर (पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट) |
| प्रभावित वार्ड | कुल 50 वार्ड (पटियाला जिले के 28 वार्ड और मोगा जिले के 22 वार्ड – धर्मकोट के 7 तथा बाघापुराना के 15) |
| मुख्य निष्कर्ष | नामांकन पत्रों को छीनना/फाड़ना, उम्मीदवारों को जबरन रोकना और अवैध अस्वीकृति |
| कोर्ट का आदेश | 6 सप्ताह में नए सिरे से चुनाव; हाईकोर्ट चीफ जस्टिस द्वारा निगरानी समिति और पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएंगे। |

