Wednesday, November 4, 2026
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Delhi HC: नवंबर 2024 में 70 वकीलों को वरिष्ठ अधिवक्ता पद देने को लेकर चुनौती…यह रही सुप्रीम सलाह

Delhi HC: सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि उन वकीलों की वरिष्ठ अधिवक्ता पद के लिए पुनः मूल्यांकन प्रक्रिया चलाई जाए जिनके आवेदन या तो अस्वीकार कर दिए गए थे या स्थगित कर दिए गए थे।

सीनियर एडवोकेट राजशेखर राव से इस संबंध में निर्देश प्राप्त करने को कहा…

न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुयान की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट राजशेखर राव से इस संबंध में निर्देश प्राप्त करने को कहा है। यह सुझाव शीर्ष कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट की एक समिति को दिया है। धारा 16 अधिवक्ता अधिनियम के तहत वकीलों को वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित करने की प्रक्रिया से संबंधित है।

70 वकीलों को वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने जिन 70 वकीलों को वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिया, उनमें 12 महिलाएं भी शामिल थीं। यह वरिष्ठ पद एक स्थायी समिति द्वारा मूल्यांकन के बाद प्रदान किया गया, जिसमें वकीलों की योग्यता, अदालत में प्रदर्शन और कानूनी ज्ञान को आधार बनाया गया था। करीब 300 से अधिक वकीलों ने वरिष्ठ अधिवक्ता बनने के लिए आवेदन किया था, जो एक प्रतिष्ठित उपाधि मानी जाती है और केवल सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट द्वारा ही दी जाती है।

अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है

सुप्रीम कोर्ट यह याचिका सुन रहा था, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा नवंबर 2024 में 70 वकीलों को वरिष्ठ अधिवक्ता पद दिए जाने को चुनौती दी गई थी, जिसमें अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। राजशेखर राव ने कहा कि हाईकोर्ट शेष आवेदनों को पूर्ण पीठ में विचारार्थ ले सकता है, जबकि याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि पूरी अंक निर्धारण (marking) प्रक्रिया ही दोषपूर्ण थी।

नियुक्त करने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर आत्मचिंतन की आवश्यकता

सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को कहा था कि वरिष्ठ अधिवक्ता नियुक्त करने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर आत्मचिंतन की आवश्यकता है, और इस मुद्दे को न्यायमूर्ति संजीव खन्ना के समक्ष भेजा गया था ताकि यह तय किया जा सके कि क्या इसे बड़ी पीठ को सौंपा जाए। अदालत ने चिंता जताते हुए कहा था कि केवल कुछ मिनटों के इंटरव्यू में किसी उम्मीदवार की योग्यता या उपयुक्तता का सही मूल्यांकन करना संदिग्ध है।

पीठ ने यह भी कहा था:

यह गंभीर विचार का विषय है कि क्या अदालतों को वकीलों से आवेदन स्वीकार करने की अनुमति देनी चाहिए, जबकि अधिनियम में इसका उल्लेख नहीं है। यदि विधायिका ऐसा चाहती, तो अधिवक्ता अधिनियम की धारा 16(2) में वकीलों से सहमति लेने के बजाय उन्हें आवेदन करने की अनुमति दी गई होती।

हम सुझाव दे रहे हैं कि जिन उम्मीदवारों के आवेदन अस्वीकार या स्थगित किए गए थे, उनके लिए समिति ‘इंदिरा जयसिंह निर्णय’ के अनुसार नई प्रक्रिया अपनाए। समिति का पुनर्गठन कर पूरी प्रक्रिया फिर से चलाई जाए।

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