Tuesday, August 4, 2026
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SC News: बच्चों को लत पैदा करने वाले कंटेंट से बचाएं… सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह नीतिगत मामला है, कुछ नहीं कर सकते

SC News: सुप्रीम कोर्ट ने 13 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कहा, यह नीतिगत (policy) मामला है।

एल्गोरिदम लागू करने के निर्देश दिए जाएं…

न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने, हालांकि, याचिकाकर्ता को संबंधित प्राधिकरण के समक्ष अभ्यावेदन (representation) देने की छूट दी। याचिका में सोशल मीडिया से कम उम्र के बच्चों पर पड़ने वाले गंभीर शारीरिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक प्रभावों का उल्लेख किया गया था और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण जैसे ठोस आयु सत्यापन प्रणाली लागू करने की मांग की गई थी ताकि बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच को नियंत्रित किया जा सके। याचिका में मांग की गई कि सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे एल्गोरिदम लागू करने के निर्देश दिए जाएं, जो बच्चों को लत पैदा करने वाले कंटेंट से बचाएं, साथ ही सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह देशव्यापी डिजिटल साक्षरता अभियान शुरू करे, ताकि माता-पिता, शिक्षक और छात्र सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूक हो सकें।

वकील मोहिनी प्रिया के माध्यम से दायर हुई याचिका

अदालत ने यह भी कहा कि अगर याचिकाकर्ता अभ्यावेदन देता है, तो आठ सप्ताह के भीतर उस पर विचार किया जाएगा। ज़ेप फाउंडेशन द्वारा दायर की गई याचिका में केंद्र और अन्य उत्तरदाताओं को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियमों के मसौदे में 13 से 18 वर्ष के बच्चों के लिए अनिवार्य पेरेंटल कंट्रोल, रीयल-टाइम मॉनिटरिंग टूल्स, सख्त आयु सत्यापन और कंटेंट प्रतिबंध जैसे प्रावधान शामिल करें। वकील मोहिनी प्रिया के माध्यम से दायर याचिका में यह भी मांग की गई थी कि जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों की सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन नहीं करते, उन पर कठोर दंड लगाए जाएं। याचिका में कहा गया कि भारत में 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक बिना किसी नियंत्रण या रोक-टोक के पहुंच है, जो कि देश में अभूतपूर्व मानसिक स्वास्थ्य संकट को जन्म दे रहा है।

बच्चों के बीच डिप्रेशन, एंग्ज़ायटी, आत्महत्या आदि की घटनाएं बढ़ीं

याचिका में यह भी कहा गया कि भारत में बच्चों के बीच डिप्रेशन, एंग्ज़ायटी, आत्महत्या और आत्म-नुकसान की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं और इसके पीछे अत्यधिक सोशल मीडिया उपयोग की सीधी भूमिका है। शोध में यह स्पष्ट रूप से सामने आया है कि जो नाबालिग बच्चे सोशल मीडिया के अत्यधिक संपर्क में रहते हैं, वे गंभीर मनोवैज्ञानिक तनाव, सामाजिक अलगाव, आदी होने जैसी प्रवृत्तियां, और संज्ञानात्मक (cognitive) क्षमता में गिरावट का शिकार होते हैं।

भारत में 462 मिलियन सक्रिय सोशल मीडिया उपयोगकर्ता हैं…

याचिका में इसे एक तरह की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति करार दिया गया और कहा गया कि भारत में 462 मिलियन सक्रिय सोशल मीडिया उपयोगकर्ता हैं, जो कुल जनसंख्या का 32.2 प्रतिशत हैं, और मोबाइल कनेक्टिविटी 78 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। इसके अनुसार, भारत की करीब 30% आबादी 4 से 18 वर्ष की उम्र के बच्चों की है। महाराष्ट्र से प्राप्त रिपोर्टों का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया कि 9 से 17 वर्ष के 17 प्रतिशत बच्चे रोज़ाना छह घंटे से अधिक सोशल मीडिया या गेमिंग प्लेटफॉर्म पर बिताते हैं।

पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा

यह एक नीतिगत विषय है। आप संसद से कानून बनवाने की मांग करें।

इसके साथ ही पीठ ने कहा

हम इस याचिका का निपटारा करते हैं और याचिकाकर्ता को प्राधिकरण को अभ्यावेदन देने की स्वतंत्रता प्रदान करते हैं।

याचिकाकर्ता के वकील ने इसे एक गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा

यह सिर्फ पेरेंटल सुपरविजन का मामला नहीं है, बल्कि इसमें उम्र सत्यापन की सख्त व्यवस्था की जरूरत है।

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